Thursday, December 2, 2021
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अयोध्या में सालिग्राम तुलसी विवाह आज: वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पड़ेंगे सात फेरे,रामलला दर्शन मार्ग स्थित लवकुश मंदिर से निकलेगी बारात


अयोध्या37 मिनट पहले

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अयोध्या के रामलला दर्शन मार्ग स्थित लवकुश मंदिर जहां आज भव्य रूप से तुलसी व सालिग्राम का विवाह होगा व बारात निकलेगी - Dainik Bhaskar

अयोध्या के रामलला दर्शन मार्ग स्थित लवकुश मंदिर जहां आज भव्य रूप से तुलसी व सालिग्राम का विवाह होगा व बारात निकलेगी

अयोध्या के रामलला दर्शनमार्ग स्थित लवकुश मंदिर में सोमवार को सालिग्राम-तुलसी का विवाह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लेकर होगाl विवाह के बाद मंदिर के महंत रामकेवल दास की अगुवाई में शाम सात बजे धूमधाम से बाराज निकलेगी जिसका जगह-जगह महंत पुष्पवर्षा कर आरती उतारेंगेl

लवकुश मंदिर के महंत रामकेवल दास ने बताया कि सालिग्राम व तुलसी विवाह में सभी रस्मों का पालन किया जाएगा

लवकुश मंदिर के महंत रामकेवल दास ने बताया कि सालिग्राम व तुलसी विवाह में सभी रस्मों का पालन किया जाएगा

समारोह में दिल्ली व गोरखपुर सहित कई स्थानों से आए श्रद्धालु पहुंचे

महंत रामकेवल दास ने बताया कि जिस प्रकार एक कन्या का विवाह होता है उसी तरह वैदिक परंपरा के तहत सालिग्राम का शिला व तुलसी के पौघे का विवाह सभी रस्मों का पालन करते हुए होगाl इस समारोह में दिल्ली व गोरखपुर सहित कई स्थानों से आए श्रद्धालु विवाह में शामिल होने के बाद शाम को बारात में शामिल होंगेl सायंकाल बारात कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पूरे रामकोट मुहल्ले का भ्रमण करेगीl

सजाया गया है लवकुश मंदिर में मौजूद भगवती बगलामुखी का मंदिर

सजाया गया है लवकुश मंदिर में मौजूद भगवती बगलामुखी का मंदिर

भगवती बगलामुखी व भगवान शिव के मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया

इस अवसर पर लवकुश मंदिर में मौजूद भगवती बगलामुखी व भगवान शिव के मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया हैl लवकुश मंदिर में मौजूद भगवती बगलामुखी का यह विग्रह अयोध्या को विपदाओं से मुक्त कर भक्तों के कल्याण की कामना से महंत रामकेवल दास की ओर से स्थापना कराई गई हैl उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम की कुलदेवी काली हैं और बगलामुखी का एक नाम वीरकाली हैl

अयोध्या के कई मंदिरों में मनाया जाता है यह उत्सव

सालिग्राम तुलसी विवाह का यह उत्सव अयोध्या के कालेराम मंदिर में भी भव्य रूप से मनाया जाता हैl इसके अलावा गहोई मंदिर, परशुराम मठ, लक्ष्मण किला आदि स्थानों पर इस महोत्सव की धूम होती हैl हनुमत किला गहोई मंदिर के महंत रामलखन शरण ने बताया कि मंदिर में इस महोत्सव की सभी तैयारियां पूरी कर ली गईं हैंl

आखिर क्यों मनाया जाता है सालिग्राम व तुलसी का विवाह

पौराणिक काल में वृंदा नामक एक कन्या का राक्षस कुल में उसका जन्म हुआ था। वह भगवान विष्णु की परम भक्त थी।उसका विवाह राक्षस जलंधर से हो गया। वृंदा बड़ी ही पतिव्रता स्त्री थी सदा अपने पति की सेवा किया करती थी। एक बार देवताओं और दानवों में युद्ध हुआ जब जलंधर युद्ध में चले गए और वृंदा व्रत का संकल्प लेकर पूजा में बैठ गई।व्रत के प्रभाव से देवता भी जलंधर को न जीत सके सारे देवता जब हारने लगे तो भगवान विष्णु जी के पास गए। सबने भगवान से प्रार्थना की तो उन्होंने भगवान ने जलंधर का रूप रखा और वृंदा के महल में पहुंच गए जैसे ही वृंदा ने अपने पति को देखा,वे तुरंत पूजा में से उठ गई और उनके चरण छू लिए। जैसे ही उनका संकल्प टूटा,युद्ध में देवताओं ने जलंधर को मार दियाl वृंदा सारी बात समझ गई उसने भगवान को श्राप दे दिया कि आप पत्थर के हो जाओ,भगवान तुंरत पत्थर के हो गए। वंदा सती हो गई और उनकी राख से एक पौधा निकला तब विष्णु जी कहा किआज से इनका नाम तुलसी है,और मेरा एक रूप इस पत्थर के रूप में रहेगा जिसे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जाएगा और मैं बिना तुलसी जी के भोग स्वीकार नहीं करुंगा। अयोध्या के मंदिरों में भगवान को भोग में तुलसी की पत्ती का भोग लगता है व उसकी मंजरी चढ़ाई जाती हैl

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