Wednesday, October 20, 2021
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आगरा विश्वविद्यालय के 8384 छात्रों को 15 साल बाद राहत: बीएड-2005 फर्जीवाडे़ में अब विश्वविद्यालय इन छात्रों की मार्कशीट-डिग्री करेगा सत्यापित, अब हटेगा फर्जी का टैग


आगरा25 मिनट पहले

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बीते 15 सालों से संदेह के घेरे में रह रहे डॉक्टर भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 8,384 बीएड डिग्री धारकों को बड़ी राहत मिलने वाली है। विश्वविद्यालय ने सभी छात्रों की मार्कशीट, डिग्री जारी करने और उनका सत्यापन करने पर सहमति दे दी है। ऐसे में अब यह छात्र अपनी मार्कशीट सत्यापित करा सकेंगे। अब इन छात्रों को फर्जी होने की नजर से नहीं देखा जाएगा। इस प्रक्रिया में एसआईटी की जांच में पकड़े गए टेंपर्ड, फर्जी और डुप्लीकेट प्रमाण पत्र वाले छात्रों को शामिल नहीं किया जाएगा।

परीक्षा समिति ने लिया निर्णय
बीएड फर्जीवाडे़ के बाद से सही तरीके से बीएड करने वाले 8384 छात्रों को भी संदेह की नजर से देखा जाता था। बीएड 2005 की डिग्री से नौकरी करने वालों को नौकरी पर तलवार लटकी हुई थी। उन्हें डिग्री और मार्कशीट सत्यापित करवाने को कहा गया था, लेकिन विश्वविद्यालय में बीएड 2005 देखते ही उनके सत्यापन के आवेदन को अलग कर दिया जाता था।

एसआईटी जांच चलने के कारण कोई इस मामले में नहीं पड़ना चाहता था। ऐसे में ये छात्र 15 साल से परेशान चल रहे थे। मगर, अब विश्वविद्यालय ने परीक्षा समिति की बैठक में बीएड वर्ष 2005 के प्रकरण में टैम्पर्ड और फर्जी छात्र-छात्राओं को चिन्हित करने के लिए उच्च न्यायालय के आदेश पर विश्वविद्यालय द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रदर्शित करने का निर्णय लिया है।

इसके साथ इस सूची के अतिरिक्त वास्तविक छात्र-छात्राओं की उपाधियों का अब सत्यापन कर दिया जाएगा । प्रभारी कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय का कहना है कि बीएड 2005 के वास्तविक छात्रों के मार्कशीट और डिग्री सत्यापन का काम जल्द शुरू किया जाएगा।

ये है फर्जीवाडे़ की कहानी
बीएड सत्र 2004-05 में बीएड की परीक्षा वर्ष 2006 में 10 से 24 मई को हुई थी। इन परीक्षा में 82 कॉलेज के 8384 छात्रों ने हिस्सा लिया था। इनका परीक्षा परिणाम 21 जून 2006 को घोषित किया गया था। मगर, विवि के चार्टों में फर्जीवाड़ा करते हुए 84 कॉलेज के 13150 छात्र दर्ज कर दिए गए।

4766 छात्रों को बीएड की फर्जी मार्कशीट जारी कर दी गई। इस मामले में छात्र सुनील कुमार ने विवि द्वारा दो मार्कशीट जारी करने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद ही इस प्रकरण की जांच एसआईटी को सौंपी गई थी। तब यह फर्जीवाड़ा सामने आया था।
8 साल पहले शुरू हुई जांच

  • 82 कॉलेज शामिल हुए थे बीएड सत्र 2005 में
  • 2006 में जारी किया था विवि ने परीक्षा परिणाम
  • 2013 में एसआईटी ने शुरू की फर्जीवाड़े की जांच
  • 2017 में एसआईटी ने विवि को फर्जी रोल नंबर की सूची सौंपी
  • 2019 में कार्य परिषद ने लिया डिग्री निरस्त करने का फैसला
  • 2020 में कार्य परिषद ने एसआईटी की जांच पर मानी डिग्री फेक
  • 2021 में कार्य परिषद ने टेम्पर्ड पर भी लिया फैसला, लगाई मुहर

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