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इंसानों को क्यों पसंद होती है शराब? बंदरों की इस आदत में छिपा है बड़ा राज

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नई दिल्ली: कुछ इंसान शराब पीना इतना पसंद करते हैं कि उन्हें इस आदत के कारण कई बार शर्मिंदा भी होना पड़ जाता है? हालांकि किसी भी इंसान की पसंद और नापसंद पर कोई कमेंट करना वाकई मुश्किल है, खासकर जब खाने और पीने की बात आती है. लेकिन फिर भी, शोध और अध्ययन यह समझने में मदद कर सकते हैं कि वास्तव में कोई व्यक्ति दूसरों की तुलना में एक ही चीज कुछ ज्यादा ही खाना/पीना क्यों पसंद करता है. क्योंकि अब शराब पसंद करने वालों के लिए एक खास स्टडी में कुछ रोचक जानकारी सामने आई है. 

बंदरों को भी अल्कोहल की लत

बंदरों पर किए गए एक नए अध्ययन में पाया गया कि हमारे कुछ ‘वानर पूर्वज’ सक्रिय रूप से शराब यानी अल्कोहल युक्त फलों की तलाश करते हैं. दरअसल ये फल इतने पक जाते हैं कि इनकी शुगर दानेदार हो जाती है, जिससे इनके अंदर तकरीबन 2 प्रतिशत अल्कोहल का उत्पादन होता है. इस स्टडी को लेकर साइंस डेली में प्रकाशित हुआ है, बंदरों ने नियमित रूप से अल्कोहल युक्त फलों का सेवन किया है, एक ऐसी घटना जो मानव के शराब को लेकर आकर्षण पर प्रकाश डाल सकती है.

इसलिए बंदर खोजते हैं शराब

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के जीवविज्ञानी – बर्कले ने पनामा में बंदरों द्वारा खाए गए फलों की इथेनॉल मटेरियल की स्टडी की, उन्होंने पाया कि फल में नियमित रूप से 1 प्रतिशत से 2 प्रतिशत के बीच अल्कोहल होता है. जीवविज्ञानियों ने बंदरों के यूरिन (मूत्र) के सेंपल भी लिए और अधिकांश सेंपल में इथेनॉल के सेंकंडरी मेटाबोलाइट्स थे. नतीजों से पता चलता है कि जानवर सच में ऊर्जा के लिए शराब का उपयोग करते आ रहे हैं. इस रिसर्च स्टडी में कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, नॉर्थ्रिज (सीएसयूएन) के प्राइमेटोलॉजिस्ट क्रिस्टीना कैंपबेल ने नेतृत्व किया. साथ ही कैम्पबेल की स्नातक स्टूडेंट विक्टोरिया वीवर ने उनकी मदद की.

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रिजल्ट हैं चौंकाने वाले 

अध्ययन के अनुसार, रिजल्ट इस बात का सबूत देते हैं कि हमारे पूर्वजों ने फलों का अधिक पोषण पाने के लिए, अल्कोहल युक्त फलों की खोज की और स्टडी में यह भी उल्लेख किया गया है कि ‘मनुष्यों को हमारे पूर्वजों से इथेनॉल के लिए यह प्रवृत्ति विरासत में मिली होगी.’

कैम्पबेल ने नतीजों में यह भी लिखा है, ‘पहली बार, हम बिना किसी संदेह के, यह दिखाने में सक्षम हुए हैं कि जंगली प्राइमेट, बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के, फल युक्त इथेनॉल का सेवन करते हैं.’ बता दें कि कैम्पबेल, मानव विज्ञान के प्रोफेसर जिन्होंने साल 2000 में बर्कले से पीएचडी कर डिग्री प्राप्त की है.

2014 में भी लिखी गई किताब

नया अध्ययन जो यूसी बर्कले के जीवविज्ञानी रॉबर्ट डुडले द्वारा दिए गए ‘शराबी बंदर’ परिकल्पना का भी समर्थन करता है. डुडले ने 2014 में एक किताब लिखी थी जिसमें बताया गया था कि शराब के प्रति हमारा आकर्षण लाखों साल पहले पैदा हुआ था, जब हमारे वानर और बंदर पूर्वजों ने पाया कि शराब की गंध ने उन्हें पके और पौष्टिक फल दिए.

 





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