Monday, April 12, 2021
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इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने शरीफ को ‘घोषित अपराधी’ ठहराने का फैसला टाला


इस्लामाबाद: इस्लामाबाद हाई कोर्ट (Islamabad High Court) ने मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ (Nawaz sharif) को घोषित अपराधी के तौर पर घोषित करने के फैसले को दो दिसंबर तक के लिए टाल दिया है. जियो टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति आमिर फारूक और न्यायमूर्ति मोहसिन अख्तर कयानी की दो सदस्यीय खंडपीठ ने अल-अजीजिया और एवेनफील्ड भ्रष्टाचार मामले में पूर्व प्रधानमंत्री की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला लिया.

अक्टूबर महीने में पीठ ने आगाह करते हुए कहा था कि आगे की प्रतिकूल प्रक्रिया से बचने के लिए शरीफ को 30 दिनों के अंदर आत्मसमर्पण करना होगा. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के लिए इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने एक आदेश जारी करते हुए शरीफ को 24 नवंबर तक पेश होने का आदेश दिया था. अगर ऐसा नहीं होता है तो उन्हें अपराधी घोषित कर दिया जाएगा. डॉन न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय ने अल-अजीजिया और एवेनफील्ड भ्रष्टाचार मामले में अपील पर कार्यवाही का लिखित आदेश जारी किया था.

विदेश कार्यालय में यूरोप मामलों के निदेशक मोहम्मद मुबाशीर खान ने पीठ के समक्ष एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया कि नवाज अदालत की कार्यवाही से अवगत हैं. उन्होंने कहा, “उद्घोषणा के बारे में स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रिंट और डिजिटल मीडिया पर खबरें आईं. उन्होंने रॉयल मेल के माध्यम से अदालत का समन भी प्राप्त किया.” न्यायमूर्ति फारूक ने कहा, “हम संतुष्ट हैं कि नवाज की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए हर उपाय किया गया.”

पीठ ने संघीय जांच एजेंसी के अधिकारियों – एजाज अहमद और तारिक मसूद के बयान दर्ज करने का फैसला किया और इस मामले पर अब आगे की सुनवाई दो दिसंबर के लिए निर्धारित कर दी गई है. उसी दिन अदालत नवाज को घोषित अपराधी घोषित करने पर फैसला करेगी. एक जवाबदेही अदालत ने नवाज को अल अजीजिया स्टील मिल्स एंड हिल मेटल इस्टैब्लिशमेंट संदर्भ में दोषी ठहराया और उन्हें 10 साल के लिए सार्वजनिक पद संभालने से अयोग्य ठहराते हुए 1.5 अरब रुपये और 2.5 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया.

एवेनफील्ड संदर्भ में नवाज को 10 साल कैद की सजा सुनाई गई थी और उन्हें फ्लैगशिप संदर्भ में बरी कर दिया गया था. इन संदर्भो को पनामागेट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भ्रष्टाचार निरोधी निकाय की ओर से दायर किया गया था. चिकित्सा आधार पर अल अजीजिया संदर्भ में नवाज को पिछले साल आठ हफ्ते की जमानत दी गई थी और फरवरी में यह जमानत अवधि समाप्त हो चुकी है.

(इनपुट- एजेंसी IANS)





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