Sunday, January 23, 2022
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उपचुनाव के नतीजे तय करेंगे राजनीतिक दलों के भविष्य: JDU और RJD के लिए जीत है जरूरी, कांग्रेस में युवा बिग्रेड की साख दांव पर


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पटना33 मिनट पहले

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प्रतीकात्मक तस्वीर। - Dainik Bhaskar

प्रतीकात्मक तस्वीर।

बिहार विधानसभा की दो सीटों तारापुर और कुशेश्वरस्थान पर उपचुनाव के नतीजे बिहार की राजनीति का बड़ा बदलाव ला सकती है। नतीजों के आधार पर ही बिहार की राजनीतिक पार्टियां अपने भविष्य की रणनीति तय करेंगी। RJD और JUD की प्रतिष्ठा यहां सीधे-सीधे दांव पर लगी है तो BJP-JDU की दोस्ती भी। नीतीश कुमार की पार्टी JDU के लिए तो ये सबसे अहम है। वजह है कि बिहार विधानसभा में संख्या बल के लिहाज से JDU पहले से कमजोर है। जिन दो सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं वो पहले JDU के पास ही थी।

अगर इन दोनों सीटों पर JDU हारती है तो पार्टी के विधायकों की संख्या 43 से घटकर 41 हो जाएगी। जीत सुनिश्चित करने के लिए जदयू के मंत्री संजय झा, आशोक चौधरी समेत तमाम नेता इन दोनों सीटों पर कैंप कर रहे हैं। अगर JDU दोनों सीट हारती है तो BJP के प्रति उसका अविश्ववास और बढेगा, क्योंकि इसका मतलब ये है कि BJP अपने वोट JDU की तरफ टर्न नहीं कर सकी। इसका सीधा असर दोनों पार्टियों के संबंधों पर आनेवाले दिनों में दिख सकता है।

नीतीश कुमार पर हार का मानसिक दबाब बनाना चाहती है RJD
75 सीटों वाली RJD के लिए संख्या बल के लिहाज से ये उपचुनाव ज्यादा अहम नहीं है, लेकिन नीतीश कुमार और उनकी पार्टी से उनकी पुरानी जीती हुई सीटें छीनना उसके लिए बड़ी जीत साबित हो सकती है। वजह ये है कि तेजस्वी यादव इस जीत से अपना फायदा करें ना करें, JDU का बड़ा नुकसान कर सकते हैं।

दूसरी तरफ उपचुनाव में जीत के जरिए तेजस्वी कांग्रेस को ये संदेश देना चाहते हैं कि बिहार की राजनीति में उन्हें कांग्रेस की नहीं, बल्कि कांग्रेस को उनकी जरूरत है। इसके अलावा कांग्रेस के कन्हैया कुमार से मिल रहे यंग फेस चैलेंज के भ्रम को भी वे तोड़ सकते हैं। तेजस्वी यादव के लिए अपने बड़े भाई तेजप्रताप से विवाद से हो रहे नुकसान के आकलन का भी ये बेहतर मौका है। वजह ये है कि तेजप्रताप उपचुनाव में कुशेश्वरस्थान से कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन का ऐलान कर चुके हैं।

कांग्रेस बिहार में अकेली होगी या साथ… ये नतीजे तय करेंगे
बिहार में 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अकेले मैदान में उतरी थी। 11 साल बाद फिर से उसने अकेले चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है। पार्टी कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी जैसे युवा चेहरों के जरिए बिहार में नई संभावनाएं तलाशने में जुटी है। कुशेश्वरस्थान से 2020 चुनाव में कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही थी, हालांकि तब राजद के साथ वो गठबंधन में थी। इस बार दोनों ही सीटों पर कांग्रेस जीत से ज्यादा अपनी ताकत आंकने के लिए उतरेगी। नतीजों में अगर कांग्रेस की स्थिति संतोषजनक रही तो इसका श्रेय कांग्रेस युवा बिग्रेड को जाएगा और वो आनेवाले समय में भी राजद के सामने मजबूती से खड़ी हो पाएगी, लेकिन अगर वोट नहीं मिले तो फिर से उसे राजद की तरफ ही मुड़ना होगा।

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