Wednesday, October 27, 2021
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ऐसे तो कुपोषण को मात दे चुके लाडले: PMCH में पुनर्वास केंद्र में हो रहा मनमानी का पोषण; बच्चों के खाने-पीने के सामान को खुले में फेंका, बचा तो लगा दी आग



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पटना12 मिनट पहले

हाईजीन का दिखावा करने वालों की मनमानी का बड़ा खुलासा

कोरोना का खतरा टला नहीं है। दूसरी के बाद अब तीसरी लहर को लेकर दहशत है। संकट बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। माना जा रहा है कि तीसरी लहर में सबसे अधिक बच्चे प्रभावित होंगे। ऐसे में बच्चों की सेहत और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की चिंता हर गार्जियंस की है। ऐसे में शारीरिक रूप से कमजोर बच्चों की जान को खतरा अधिक है। बच्चों की सेहत और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को लेकर जब दैनिक भास्कर ने पड़ताल की तो बड़ा खुलासा हुआ। पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कुपोषित बच्चों के लिए बनाया गया पुनर्वास केंद्र ही मनमानी का शिकार हो गया है। बच्चों के लिए आया खाने का सामान बाहर खुले में फेंक दिया जाता है या फिर जला दिया जाता है।

कुपोषण को मात देने के लिए सेंटर की स्थापना

पटना मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विभाग के कैंपस में ही पुनर्वास केंद्र बनाया गया है। यहां 5 साल तक के बच्चों को रखकर उनका कुपोषण दूर करने की पूरी व्यवस्था है। सेंटर पर माताओं को प्रशिक्षण देने की भी व्यवस्था है कि किस तरह से वह कुपोषण को मात दें। वर्ष 2017 में सेंटर फॉर एक्सीलेंस की स्थापना का उद्देश्य ही कुपोषण को मात देना है। यहां भर्ती होने वाले बच्चों को पौष्टिक आहार दिया जाता है जिससे तेजी से उनका कुपोषण दूर होता है। मां को भी यहां प्रशिक्षण दिया जाता है कि वह किस तरह से बच्चों के साथ खुद को भी स्वस्थ रख सकती हैं।

पड़ताल में सामने आई हकीकत

पुनर्वास केंद्र के भवन के पीछे अधिक मात्रा में खाद्य सामग्री खुले में फेंकी गई है। इसमें अधिक मात्रा में ऐसे सामान हैं जिनकी पैकिंग तक नहीं खुली है। कुछ सामान तो बोरे में बंध हैं और कुछ को जला दिया गया है जिसकी राख मौके पर दिखाई पड़ी। पुनर्वास केंद्र के पास सामान कहां से आए इसका जवाब देने वालों कोई नहीं है। खाद्य सामग्री में सबसे अधिक नमक के पैकेट दिखाई पड़े। इसमें सत्तू और बेसन के भी ऐसे पैकेट हैं जो खुले में फेंके गए हैं। अब सवाल यह है कि पुनर्वास केंद्र के किचन में इन सामानों का उपयोग क्यों नहीं किया गया? अगर स्टोर की कमी के कारण बाहर खुले मे फेंका गया तो फिर अन्य सामानों को जलाया क्यों गया? ऐसे कई सवाल है जो पुनर्वास केंद्र में भर्ती बच्चों की सेहत पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।

पुनर्वास केंद्र पर नहीं मिली जानकारी

दैनिक भास्कर की टीम ने जब पुनर्वास केंद्र की पड़ताल की तो वहां कोई जिम्मेदार नहीं मिला। कुर्सी खाली पड़ी थी, वार्ड में मौजूद एक नर्स ने फोटो लेने से मना करते हुए कहा कि प्रभारी अभी चली गई हैं। किचन और पुनर्वास केंद्र से जुड़ी कोई भी जानकारी साझा करने से नर्स ने मना कर दिया। नर्स ने प्रभारी का नंबर देने से मना करते हुए यह भी नहीं बताया कि उनसे मुलाकात कब हो सकती है। वार्ड में बच्चे भर्ती थे उनकी दवाएं भी चल रही थीं लेकिन उनके बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी गई।

ऐसे मनमानी से बच्चों पर खतरा

शारीरिक रूप से कमजोर बच्चों को लेकर चलाए जा रहे सरकार के विशेष अभियान में जिम्मेदारों की मनमानी से बच्चों की सेहत पर बड़ा खतरा है। सामान जो किचन के लिए आ रहा है उसे बाहर खुले में फेंका जा रहा है। ऐसे में कुपोषित बच्चों में कोरोना जैसे खतरनाक वायरस से लड़ने की क्षमता कहां से आएगी यह बड़ा सवाल है।

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