कई रहस्यों को समेटे हुए है कानपुर का ये मंदिर: मुगलकालीन शिव मंदिर के शिलालेख की आजतक कोई नहीं ले सका नाप, बीरबल ने कराया था निर्माण

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घाटमपुर24 मिनट पहले

कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हाइवे किनारे अज्योरी गांव में मौजूद बिहारेश्वर महादेव मंदिर अपने आप में कई रहस्य समेटे हुए है। इस मंदिर की ख्याति आसपास जनपदों तक फैली हुई है। इस मंदिर की मान्यता है, कि मंदिर के मुख्य द्वार पर लगे शिलालेख की नाप हर बार अलग-अलग निकलती है। सावन में आसपास जनपदों से लोग यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। वही मंदिर परिसर में मेला भी लगता है।

घाटमपुर के अज्योरी गांव में मौजूद बिहारेश्वर महादेव मंदिर को मुगलकाल में बनवाया गया था। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि राजा अकबर के नवरत्नों में से एक बीरबल ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर की गर्भग्रह में बलुआ रंग का शिवलिंग स्थापित है। यहां पर दूर – दूर से आने वाले भक्त अपनी मनोकामना मांगते है।

सावन के तीसरे सोमवार को मंदिर में जलाभिषेक करने के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

सावन के तीसरे सोमवार को मंदिर में जलाभिषेक करने के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

कई महीनों तक भेष बदलकर शिवजाी ने गुजारा था समय

यह भी कहा जाता है कि औरंगजेब की कैद से छूटकर आए मराठा छत्रपति शिवाजी ने इसी मंदिर में डेढ़ साल तक अपना भेष बदलकर रहे थे। बिहारेश्वर महादेव मंदिर ककई ईटों से बना हुआ है। यहां पर सावन के महीने में हर सोमवार को मेला लगता है, जिसमे यहां पर बड़ी संख्या में पहुंचने वाले भक्त बाबा को बेल पत्र चढ़ाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते है, जिसके बाद मेला घूमते है।

खजुराहों जाने वाले पर्यटकों का है पहला स्टाप

कानपुर-सागर राष्ट्रीय राज्यमार्ग से खजुराहो जाने वाले सैलानी भी इस प्राचीन मंदिर में दर्शन करने के लिए ठहरते हैं। इस खजुराहों यात्रा का पहला स्टाप भी कहा जाता है। यहां पर सावन में भक्त कांवर भी चढ़ाते हैं।​​​​​​​ रवाईपुर गांव निवासी चंद्रपाल ने बताया कि बिहारेश्वर महादेव मंदिर में पहुंचने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह मंदिर आसपास के गांव के लोगों के लिए प्रमुख आस्था का केंद्र है।

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