Saturday, May 21, 2022
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काशी में नहीं चल सका शासन का बुलडोजर: वाराणसी के बाबा मसाननाथ श्रृंगार कल से, रसूखदारों ने नहीं हटने दिया अतिक्रमण


वाराणसी20 मिनट पहले

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वाराणसी के मणिकर्णिका घाट स्थित बाबा मसाननाथ मंदिर के पास अतिक्रमण हटाने पहुंचे नगर निगम के बुलडोजर को आज अवैध कब्जा किए व्यापारियों ने चलने नहीं दिया। - Dainik Bhaskar

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट स्थित बाबा मसाननाथ मंदिर के पास अतिक्रमण हटाने पहुंचे नगर निगम के बुलडोजर को आज अवैध कब्जा किए व्यापारियों ने चलने नहीं दिया।

वाराणसी में सोमवार को शुरू हुए नगरवधुओं का धरना अतिक्रमण हटाने का आश्वासन देकर खत्म कराया गया था, मगर वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ। आज प्रशासन ने यह अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई हुई, मगर रसूखदारों ने बुलडोजर रोकवा दिए। मणिकर्णिका घाट स्थित बाबा मसाननाथ के मंदिर के पास लकड़ी के व्यापारियों ने अवैध कब्जा कर रखा है। बाबा मसाननाथ के पास नगरवधुओं का नृत्य होता है।

लोगों का कहना है कि नगर निगम के अधिकारी पुलिस बल के साथ बुलडोजर लेकर अतिक्रमण हटाने पहुंचे थे। लेकिन दबंग कब्जाधारियों ने लकड़ी हटाने से मना कर बाबा के बुलडोजर पर ब्रेक लगा दिया। अवैध कब्जा व्यापारियों के विरोध के बीच वहां पड़ी लकड़ियां अभी तक हटाई नहीं जा सकीं। लोगों ने कहा कि यदि ये लकड़ियां आज नहीं हटीं, तो बुधवार से बाबा का श्रृंगार कार्यक्रम कैसे शुरू हो पाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यूपी में जबसे बुलडोजर बाबा की सरकार आई है तबसे ही सरकार ने भू-माफिया और गुंडों को एक-एक करके सबक सिखाना शुरू कर दिया है। मगर, बनारस के कब्जाधारियों पर बाबा का बुलडोजर नहीं चल सका।

नगरवधुओं ने सोमवार को अतिक्रमण के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया था।

नगरवधुओं ने सोमवार को अतिक्रमण के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया था।

कई कलाकार भी आते हैं इस नृत्य में
काशी के मणिकर्णिका घाट पर करीब 400 साल से बाबा महाश्मशान नाथ का तीन दिवसीय वार्षिक श्रृंगार कार्यक्रम होता चला आ रहा है। यहां जलती चिताओं के बीच नगर वधुओं का नृत्य होता है। मगर काफी समय से इस स्थान पर लकड़ी कारोबारियों अवैध कब्जा जमा रखा है। कार्यक्रम स्थल पर लकड़ियां गाज दी गईं हैं। इस कार्यक्रम में संगीत घरानों के कई विशिष्ट कलाकार और पद्म अवार्डी भी गायन और वादन के लिए आते हैं। वहीं नगरवधुओं के नृत्य परंपरा की शुरूआत 378 साल पहले राजा मान सिंह ने शुरू कराई थी। आज उस पर खतरा मंडरा रहा है। बाबा महाश्मशान नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष चैनु प्रसाद गुप्ता ने बताया कि आज यदि ये लकड़ियां नहीं हटाईं गईं तो इस परंपरा का निर्वहन कैसे होगा।

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