Sunday, September 26, 2021
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क्या गंगाजल में है कोरोना का उपचार: बीएचयू के न्यूरोलॉजिस्ट ने कहा, गंगा में 1300 प्रकार के बैक्टिरियोफेज, यह एंटीबायोटिक से ज्यादा कारगर, यह वैक्सीन नहीं उपचार होगा


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वाराणसी9 मिनट पहले

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प्रो. विजय नाथ मिश्रा। - Dainik Bhaskar

प्रो. विजय नाथ मिश्रा।

कोरोना वायरस के संक्रमण को खत्म करने के लिए दुनिया भर में लगातार शोध जारी हैं। इसी बीच गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंगा जल से कोविड-19 के उपचार के दावे संबंधी जनहित याचिका स्वीकार की तो बीएचयू आईएमएस के डॉक्टरों का साल भर पुराना दावा एक बार फिर चर्चा में आ गया।

दरअसल, साल 2020 में बीएचयू के डॉक्टरों ने दावा किया था कि गंगा में पाए जाने वाले बैक्टिरियोफेज से कोरोना का उपचार संभव है। हालांकि इस दावे को आईसीएमआर ने खारिज कर दिया था। कहा था कि ऐसी कोई क्लीनिकल स्टडी नहीं हुई है कि गंगा के पानी से कोरोना का इलाज किया जा सके। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखने लायक बात होगी कि जनहित याचिका पर क्या फैसला आता है।

कालरा महामारी के दौरान गंगाजल पर हुआ था शोध

बीएचयू के न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रो. विजय नाथ मिश्रा ने बताया कि 1896 में जब कालरा महामारी का प्रकोप था तो डॉ. हैकिंग ने एक शोध किया था। उनके शोध में यह बात सामने आई थी कि जो लोग गंगाजल का सेवन करते हैं वह कालरा से पीड़ित नहीं हैं। हालांकि इस शोध पर एक अरसे तक ध्यान नहीं दिया गया। साल 1980 में यह बात सामने आई कि बैक्टीरियोफेज सभी नदियों में होते हैं। गंगा में ऐसे 1300 प्रकार के बैक्टीरियोफेज मिलते हैं। प्रो. गोपाल नाथ ने 1980 से 1990 के दौरान बीएचयू में मरीजों का बैक्टिरियोफेज के माध्यम से इलाज किया था। उदाहरण के तौर पर टीबी के इलाज के लिए बीसीजी का उपयोग किया जाता है। बीसीजी कोई दवा नहीं है, बल्कि लाइव बैक्टीरिया होता है और उससे टीबी खत्म होता है।

प्रो. मिश्रा ने बताया कि गंगा मामलों के एक्सपर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता अरुण गुप्ता ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा था कि गंगा जल के औषधीय गुणों और बैक्टीरियोफाज का पता लगाया जाना चाहिए। इसी क्रम में गंगा किनारे के 50 मीटर के दायरे में रहने वाले 491 लोगों पर सर्वे किया गया। उनमें से 274 ऐसे लोग मिले जो रोजाना गंगा में नहाते हैं और गंगाजल पीते हैं। उनमें किसी को कोरोना नहीं हुआ था। अन्य 217 लोग भी इसी क्षेत्र में रहते थे लेकिन वे गंगाजल का उपयोग नहीं करते थे। उनमें से 20 लोगों को कोरोना हुआ और 2 लोगों की मौत भी हो गई थी।

प्रधानमंत्री से अनुरोध है वह साइंटिफिक बैकग्राउंड चेक करने की अनुमति दें

प्रो. विजय नाथ मिश्रा ने कहा कि गंगाजल कई प्रकार की औषधीय गुणों से युक्त है। इस पर निरंतर शोध होते रहने की आवश्यकता है। गंगा एक नदी ही नहीं हैं बल्कि वह एक सभ्यता और संस्कृति की परिचायक हैं। उनके जल में कई गूढ़ रहस्य छुपे हुए हैं। हमारा यही कहना है कि करोड़ों लोग जिस जल में रोजाना नहाते हैं, उसमें कौन सा एथिकल अप्रूवल चाहिए। एक साल से तो गुहार लगा रहा हूं। गंगाजल से इलाज होता है कि नहीं, इसके लिए साइंटिफिक बैकग्राउंड ही तो चेक करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हमारा यही अनुरोध है कि वह इसकी इजाजत दें। यह वैक्सीन नहीं है, बल्कि कोरोना का सबसे सस्ता उपचार साबित होगा।

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