Tuesday, January 18, 2022
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गंगा को प्रदूषित करने वालों खिलाफ होगा केस: पटना में मूर्ति विसर्जन करने वालों की तलाश, घाटों पर तैनात मजिस्ट्रेट की निगरानी पर उठे सवाल


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पटना35 मिनट पहले

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घाटों पर सीसीटीवी कैमरा भी नहीं था जिसकी मदद से ऐसे लोगों की पहचान कर ली जाए। -फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar

घाटों पर सीसीटीवी कैमरा भी नहीं था जिसकी मदद से ऐसे लोगों की पहचान कर ली जाए। -फाइल फोटो।

गंगा में मूर्ति विसर्जन को लेकर की गई सख्ती के बाद भी गंगा को प्रदूषण से नहीं बचाया जा सका है। इसका बड़ा कारण है कि घाटों पर तैनात किए गए मजिस्ट्रेट कागजी आदेश की तरह बैठे रह गए। मजिस्ट्रेट और भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती इसलिए ही की गई थी कि गंगा में मूर्ति व पूजा सामग्रियों का विसर्जन न होने पाए, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से सारी सख्ती फेल हो गई। अब गंगा में मूर्ति विसर्जन करने वालों की तलाश की जा रही है। ऐसे लोगों पर FIR दर्ज कराने का आदेश दिया गया है जिन्होंने गंगा में मूर्ति विसर्जन किया है।

प्रशासन ने कहा- जानबूझ कर की है गलती
गंगा को प्रदूषण से बचाने को लेकर मूर्ति विसर्जन के लिए घाटों पर कृत्रिम तालाब बनाए गए थे। इन तालाबों में गंगा का पानी डाला गया था और इसी में मूर्तियों का विसर्जन करना था। इसके लिए हर घाट पर मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की गई थी। जिस तरह से नियम बनाकर सख्ती दिखाई गई, उस हिसाब से घाटों पर तैनात मजिस्ट्रेट ने ध्यान नहीं दिया। इस कारण से गंगा को प्रदूषित होने से नहीं रोका जा सका।बताया जा रहा है कि कई घाटों पर तो मजिस्ट्रेट देखने तक नहीं गए कि किस तरह से विसर्जन हो रहा है और समस्या क्या आ रही है। अब प्रशासन का कहना है कि मूर्ति विसर्जन करने वालों की ओर से जानबूझकर मनमानी की गई है।

प्रशासन का मानना है कि अधिकांश लोगों ने सरकारी आदेश और निर्धारित मानक का पालन करते हुए मूर्ति का विसर्जन कृत्रिम तालाब में किया है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा जानबूझकर मूर्ति विसर्जन में सरकारी आदेश एवं निर्धारित मानक का उल्लंघन किया गया है। बताया जा रहा है कि जिला प्रशासन की ओर से सभी समितियों को नियमों की जानकारी दी गई थी। पटना डीएम डॉक्टर चंद्रशेखर सिंह ने सभी अनुमंडल पदाधिकारी को ऐसे लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के साथ कड़ी कार्रवाई करने का आदेश जारी किया है।

बड़ा सवाल- अब कैसे होगी पहचान
डीएम ने सभी अनुमंडल पदाधिकारी को आदेश जारी कर ऐसे लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने का आदेश दिया है जिन्होंने गंगा में मूर्ति विसर्जन किया है। अब सवाल यह है कि जब घाटों पर मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई थी तो फिर गंगा में मूर्ति का विसर्जन कैसे हो गया है। अगर मजिस्ट्रेट की तैनाती के बाद भी गंगा में मूर्ति का विसर्जन हुआ है तो सबसे पहले मजिस्ट्रेट के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। अब अनुमंडल पदाधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे लोगों की पहचान करना है। घाटों पर सीसीटीवी कैमरा भी नहीं था जिसकी मदद से ऐसे लोगों की पहचान कर ली जाए।

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