Sunday, September 26, 2021
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गांधीजी को बिहार लाने वाले के गांव से रिपोर्ट: 2017 में बांध की मरम्मत का वादा कर गए थे CM; अब पानी में बहा मुरली भरवा गांव तो कोई देखनहार नहीं, दहशत में हैं लोग


बेतिया16 मिनट पहले

पानी बहने के बाद दलदल बना गांव।

बेतिया के गौनाहा प्रखंड के ‘मुरली भरवा’ गांव का हाल बेहाल है। बुधवार को पंडई नदी के कटाव से गांव के 30 घर बह गए थे। लोग जान बचाकर गांव से भागे थे। आज गांव से पानी निकल चुका है, लेकिन जनजीवन अस्त-व्यस्त है। पश्चिम चंपारण का यह ऐतिहासिक गांव गांधी को बिहार लाने वाले स्वतंत्रता सेनानी और चंपारण सत्याग्रह के प्रणेता राजकुमार शुक्ल का है। लगातार दूसरी बार ये गांव बाढ़ में बहा है।

2017 में जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यहां आए थे तो बांध की मरम्मत की बात कह गए थे, लेकिन उनके वादे बाढ़ में धुल गए। आज तक ना तो बांध की मरम्मत हो पाई है और ना ही कोई जनप्रतिनिधि ही इनकी गुहार सुनने आया है। कल जब बाढ़ में गांव बहा तो लोगों ने वीडियो के माध्यम से प्रशासन तक बात पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन आज तक इनके पास कोई आलाधिकारी नहीं पहुंच पाया है। दैनिक भास्कर पर पढ़िए राजकुमार शुक्ल के गांव से ग्राउंड रिपोर्ट।

चंपारण सत्याग्रह के प्रणेता राजकुमार शुक्ल का स्मारक।

चंपारण सत्याग्रह के प्रणेता राजकुमार शुक्ल का स्मारक।

कल पानी था, आज दलदल में धंसने का डर

स्थानीय लोगों ने बताया कि पंडई नदी का जलस्तर कम होने लगा है। सुबह 11 बजे गांव से पानी निकलने लगा, लेकिन अब यहां कीचड़ ही कीचड़ है। बाढ़ ने गांव की मिट्टी को 6-7 फीट तक खोद डाला है। ऊपर से कीचड़ के कारण दलदल, लोगों की परेशानी का सबब बन रहा है। स्थिति तो यह है कि पैर रखते ही लोग नीचे धंस जा रहे हैं। ग्रामीणों के ना तो रहने के लिए कोई व्यवस्था है, ना ही पशुओं को खिलाने के लिए कोई चारे का इंतजाम। सुनील कुमार ने बताया कि घर में भी जो राशन-पानी था, वह पानी में बह गया। अब बच्चों को भी क्या खिलाएंगे।

पानी में सब बह गया, अब पशुओं को खिलाने के लिए चारे का इंतजाम भी नहीं है।

पानी में सब बह गया, अब पशुओं को खिलाने के लिए चारे का इंतजाम भी नहीं है।

खानाबदोश की तरह बितानी पड़ती है जिंदगी

गौनाहा प्रखंड में आई बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई है कि लोग फिर से एक बार खानाबदोश हो गए हैं। पंडई नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होने से गांव बाढ़ में गांव बह जाता है। इसके बाद सैंकड़ों परिवार खानाबदोश की तरह जिंदगी बिताने पर मजबूर हो जाते हैं। गांव के कुछ युवकों ने कल छाती भर पानी का वीडियो बनाकर अधिकारियों को भेजा था। बावजूद इसके आज तक कोई प्रशासनिक अधिकारी गांव वालों का हाल-चाल लेने नहीं पहुंचे हैं। प्रशासन की बेरुखी से लोगों में गहरा रोष है।

2017 में आए थे CM नीतीश कुमार

ग्रामीणों ने बताया कि 2017 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गांव आए थे। वह गांव वालों को केवल आश्वासन देकर चले गए थे कि पंडई नदी के बांध को अच्छे से बांधा जाएगा, लेकिन आज तक कुछ हुआ नहीं। ना ही कोई अधिकारी हमारे पास हमारा हाल लेने पहुंचे हैं। बाढ़ के पानी से पूरा गांव टापू में तब्दील हो गया है, जिससे गांव का संपर्क प्रखंड और अनुमंडल मुख्यालय से टूट गया है।

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