Sunday, December 5, 2021
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गांव पहुंचेगी स्वर्णिम विजय वर्ष मशाल: 21 नवंबर को 1971 की जंग में शहीद दीनानाथ की मूर्ति का आज होगा अनावरण


प्रयागराज3 मिनट पहले

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शहीद की 50वीं पुण्यतिथि पर मूर्ति का अनावरण सेना के अधिकारी हेड क्वार्टर पूर्वा उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश सब एरिया के द्वारा किया जाएगा। - Dainik Bhaskar

शहीद की 50वीं पुण्यतिथि पर मूर्ति का अनावरण सेना के अधिकारी हेड क्वार्टर पूर्वा उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश सब एरिया के द्वारा किया जाएगा।

प्रधानमंत्री की ओर से स्वर्णिम विजय वर्ष मशाल आज शाम पांच बजे 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच जंग में 21 नवंबर को बांग्लादेश के जकीगंज में शहीद दीनानाथ के गांव मुरारपट्‌टी सुमेरपुर पहुंचेगी। इसी दौरान शहीद की 50वीं पुण्यतिथि पर मूर्ति का अनावरण सेना के अधिकारी हेड क्वार्टर पूर्वा उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश सब एरिया के द्वारा किया जाएगा।

भाई-बहनों में सबसे बड़े थे दीनानाथ

मुरारपट्‌टी सुमेरपुर गांव में 9 सितंबर 1944 को दीनानाथ का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। शहीद दीनानाथ के पिता झल्लर यादव और मां चुन्नू देवी थी। दीनानाथ अपने पांच भाई और एक बहन में सबसे बड़े थे। परिवार का खर्चा चलाने के लिए वे मध्य प्रदेश के सतना स्थित बिड़ला फैक्ट्री में नौकरी करने लगे, लेकिन उनका मन ज्यादा दिनों तक नहीं लगा। देश की सेवा के लिए 1962 में भारतीय सेना में 9 गार्ड्स बटालियन में बतौर गार्ड्समैन भर्ती हो गए।

9 वर्षों तक की देश की सेवा

भारत-चीन युद्ध के बाद भारतीय सेना में शामिल गार्ड्समैन दीनानाथ ने 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में भाग लिया। इन्हें समर सेवा स्टार एवं रक्षा मेडल से नवाजा गया। इसके बाद 1971 में भारत-पाक युद्ध में भी लड़ाई में पूरे दमखम के साथ भाग लिया। 14 दिनों तक चले युद्ध में पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी। इस दौरान बांग्लादेश के जाकीगंज में बहादुर शेर दीनानाथ 21 नवंबर 1971 में वीर गति को प्राप्त हो गए।

तीन वर्ष में बनकर तैयार हुआ मंदिर

शहीद दीनानाथ के भतीजे दशरथ लाल यादव ने बताया कि ताऊ का मंदिर बनाने को लेकर 2014 से प्रयास शुरू हुआ। इस मंदिर का काम 2018 में शुरू हुआ, जो लगभग तीन साल में बनकर तैयार हुआ। परिवार और शुभचिंतकों की इच्छा थी कि मंदिर में शहीद दीनानाथ की प्रतिमा का अनावरण सेना के अधिकारी द्वारा किया जाए।

अब इस सपने को साकार करने का अवसर आ गया है। प्रधानमंत्री की ओर से स्वर्णिम विजय वर्ष मशाल भी 21 नवंबर को प्रयागराज के सुमेरपुर गांव में आएगी। इस दौरान मूर्ति का अनावरण भी किया जाएगा। यह हम सबके लिए गर्व की बात है।

29 नवंबर को होगा समापन

भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 के युद्ध में भारत की जीत के 50 साल का जश्न मनाने के लिए ‘स्वर्णिम विजय वर्ष’ मशाल 21 नवंबर को प्रयागराज पहुंची। 21 से लेकर 29 नवंबर तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस कार्यक्रम में आम आदमी के साथ जिला प्रशासन, डिफेंस, स्कूली बच्चे आदि शामिल हो सकेंगे।

आजाद पार्क में मशाल पहुंचने पर सेना के अधिकारियों एवं जिला के आलाधिकारियों ने स्वागत किया। इसके बाद सेना मेला में अलग-अलग अस्त्र का प्रदर्शन किया गया।

आजाद पार्क में मशाल पहुंचने पर सेना के अधिकारियों एवं जिला के आलाधिकारियों ने स्वागत किया। इसके बाद सेना मेला में अलग-अलग अस्त्र का प्रदर्शन किया गया।

चंद्रशेखर आजाद पार्क में रखी गई मशाल, सेना मेला में उमड़े लोग

आजाद पार्क में मशाल पहुंचने पर सेना के अधिकारियों एवं जिला के आलाधिकारियों ने स्वागत किया। इसके बाद सेना मेला में अलग-अलग अस्त्र का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान सैन्य जवानों ने प्रदर्शन करते हुए अपना दमखम दिखाया। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहां पर तीन घंटे तक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

पीएम ने प्रज्वलित की थी मशाल

वर्ष 1971 के भारत- पाकिस्तान युद्ध के 50 साल पूरे हो गए हैं। 16 दिसंबर 2020 को विजय दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय समर स्मारक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक की अमर ज्योति से ‘स्वर्णिम विजय मशाल’ प्रज्वलित कर उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में रवाना किया था। मोदी ने राष्ट्रीय समर स्मारक पर लगातार जलती रहने वाली ज्योति से चार विजय मशाल प्रज्वलित की और उन्हें 1971 के युद्ध के परमवीर चक्र और महावीर चक्र विजेताओं के गांवों सहित देश के विभिन्न भागों के लिए रवाना किया।

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