Saturday, November 27, 2021
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गूगल क्रोम को लेकर बड़ा खुलासा, यूजर की गतिविधियों को करता है ट्रैक


नई दिल्ली. आपको शायद इस खबर पर आसानी से यकीन नहीं होगा, लेकिन एक लेटेस्ट रिपोर्ट कहती है कि आपके फोन में इंस्टॉल क्रोम ब्राउज़र आपके पर्सनल डेटा पर नजर रखता है. और वह भी आपकी जानकारी और अनुमति के बिना. फॉर्ब्स (Forbes) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रोम की सहायता से कंपनी अपने यूजर्स का क्रिटिकल डेटा मॉनिटर करती है और उसके जरिए वह उनकी एक्टिविटीज और पिनपॉइंट लोकेशंस के बारे में जानकारी लेती है. हालांकि गूगल क्रोम ने इसके जवाब में कहा है कि यूजर चाहें तो इसे रोक सकते हैं.

बता दें कि कुछ दिन पहले ही फेसबुक के बारे में भी एक ऐसी ही रिपोर्ट आई थी. उसके अनुसार फेसबुक एक्सीलरोमीटर की मदद से अपने यूजर्स की लोकेशन चेक करता रहता है. बड़ी सोशल मीडिया कंपनी के तौर पर स्थापित हो चुकी फेसबुक पर अपने यूजर्स का डेटा तब भी ट्रैक करने का आरोप लगा था, जब यूजर अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स में जाकर ट्रैकिंग का ऑप्शन बंद कर देता है. यह बेहद गंभीर मालमा था. हालांकि फेसबुक ने बाद में अपनी सफाई में कहा था कि वह अब एक्सीलरोमीटर से डेटा ट्रैक नहीं करता. अब क्रोम ब्राउजर के माध्यम से गूगल भी वैसा ही काम कर रहा है.

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गूगल द्वारा डेटा कलेक्शन
टॉमी माइस्क (Tommy Mysk) नामक एक शोधकर्ता ने अपनी ब्लॉग पोस्ट में क्रोम के बारे में कई जानकारियां शेयर की है. टॉमी माइस्क ने लिखा है कि गूगल क्रोम एंड्रॉयड यूजर्स का मोशन सेंसर बाय डिफॉल्ट शेयर करता है. उन्होंने कहा कि एंड्रॉयड/क्रोम में सभी वेबसाइट पर मोशन सेंसर बाय डिफॉल्ट एक्सेसिबल है, जबकि सफारी/आईओएस में इसके लिए परमिशन चाहिए होती है.

शोधकर्ता टॉमी माइस्क ने यहां तक कहा कि एंड्राइड द्वारा एक्सीलरोमीटर को हैंडल करने का तरीका फेसबुक से भी ज्यादा खराब है. इसके जवाब में क्रोम की तरफ से कहा गया है की कंपनी क्रोम में मोशन सेंसर रेजोल्यूशन को शुरुआती तौर पर सीमित कर रही है. इसके अलावा कहा गया है कि यूजर

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वेबसाइट्स को डिवाइस के मोशन सेंसर को एक्सेस करने से रोक सकते हैं. गूगल ने ये भी कहा है कि वह क्रोम में सिक्योरिटी और प्राइवेसी को बेहतर बनाने की दिशा में निरन्तर कार्यरत है.

कौन सेफ? गूगल या ऐपल
इससे पहले डबलिन स्थित ट्रिनिटी कॉलेज के एक शोधकर्ता ने मोबाइल हैंडसेट प्राइवेसी को लेकर एक शोध किया था. उसने गूगल पिक्सेल स्मार्टफोन और आईफोन के डेटा को कंपेयर किया था. शोधकर्ता ने अपनी स्टडी में पाया था कि ऐपल के मुकाबले गूगल अपने यूजर्स का 20 गुना ज्यादा डेटा कलेक्ट करता है. हालांकि गूगल ने इस रिपोर्ट पर असंतोष (Displeasure) व्यक्त किया था.

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