Friday, January 28, 2022
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चीन से बढ़ रहा खतरा, ताइवान ने अमेरिका से जल्दी मांगा ये हथियार


ताइपे. चीन से बढ़ते खतरे के बीच ताइवान (Taiwan) ने युद्ध में उतरने का मन बना लिया है. इसके लिए ताइवान ने अमेरिका (America) से जल्द से जल्द एफ-16 लड़ाकू विमानों (F-16 Fighter Jets)की डिलीवरी करने की गुहार लगाई है. ताइवान के अधिकारियों ने वॉशिंगटन से ताइपे को अमेरिकी-निर्मित एफ-16 फाइटर जेट की डिलीवरी में तेजी लाने का आग्रह किया है.

ताइपे टाइम्स ने सीएनएन की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) के प्रशासन ने ताइवान (Taiwan)के अधिकारियों के साथ ताइवान को अमेरिकी निर्मित एफ-16 (F-16 Fighter Jets)की डिलीवरी में तेजी लाने की संभावना पर चर्चा की है. साल 2019 में ताइवान ने अमेरिका से F-16 फाइटर जेट खरीदने का सौदा किया था, जो करीब 10 साल में पूरा होगा.

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रिपोर्ट में कहा गया है कि 22 फाइटर जेट्स की बिक्री को 2019 में मंजूरी दी गई थी, मगर चीनी उकसावे और खतरे के मद्देनजर ताइवान को वास्तविक डिलीवरी के समय में तेजी लाने की उम्मीद है, जिसमें आमतौर पर 10 साल तक का समय लग सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह डेवलपमेंट ऐसे वक्त में आया है, जब पेंटागन इंडो-पैसिफिक कमांड ने बढ़ती चिंता को देखा रहा है, क्योंकि चीन ने अपनी सेना का तेजी से आधुनिकीकरण किया है और ताइवान को ध्यान में रखते हुए अपने प्रशिक्षण में सुधार किया है.

ताइपे टाइम्स ने ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि लगभग 150 चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैन्य विमानों ने 1-5 अक्टूबर से ताइवान के वायु रक्षा पहचान क्षेत्र में घुसपैठ की है. ये बीजिंग की ओर से पिछले कुछ दिनों में ताइवान की सबसे बड़ी घुसपैठ है. यह घुसपैठ तब हुई, जब बीजिंग ने ताइवान पर पूर्ण संप्रभुता का दावा किया.

ताइवान और चीन के पुन: एकीकरण की वकालत करते हुए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाल ही में कहा था कि ‘ताइवान प्रश्न’ का मुद्दा सुलझाया जाएगा और उसे फिर से चीन में मिलाया जाएगा.

बता दें कि पूर्वी एशिया का द्वीप ताइवान अपने आसपास के कई द्वीपों को मिलाकर चीनी गणराज्य का अंग है. इसका मुख्यालय ताइवान द्वीप और राजधानी ताइपे है. चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, वहीं ताइवान खुद को  स्वतंत्र देश समझता है. 1949 में च्यांग काई-शेक के वक्त से दोनों देशों में ये तनातनी चली आ रही है.

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ताइवान का असली नाम रिपब्‍ल‍िक ऑफ चाइना है. इसकी सांस्‍कृतिक पहचान चीन से काफी अलग और बेहद मजबूत है. वहीं चीन का नाम पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना है. इस तरह से दोनों ही ‘रिपब्लिक ऑफ चाइना’ और ‘पीपल्‍स रिपब्‍ल‍िक ऑफ चाइना’ एक-दूसरे की संप्रभुता को मान्यता नहीं देते.

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