Sunday, September 26, 2021
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जीका वायरस के 14 केस आने के बाद केरल अलर्ट, केंद्र ने भेजी एक्सपर्ट की टीम; जानें अब तक की अहम बातें


नई दिल्ली. एक तरफ केरल में कोरोना वायरस के मामलों की प्रतिदिन बढ़ती संख्या ने राज्य में चिंता पैदा कर दी है, वहीं एक ओर वायरस यहां की स्वास्थ्य प्रणाली के लिए नया खतरा बनकर उभरा है. पिछले दो दिनों में दक्षिणी राज्य केरल में जीका वायरस के कम-से-कम 14 मामलों का पता चला है. यह बीमारी डेंगू जैसी मच्छरों से फैलता है. जीका वायरस के मामलों पर जानें सब कुछ:

जीका वायरस को लेकर केरल सतर्क

केरल में जीका वायरस के पहले मामले का पता गुरुवार (8 जुलाई) को चला, जब तिरुवनंतपुरम के पास 24 वर्षीय गर्भवती महिला की जांच की गई और उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई. शनिवार तक, मामले बढ़कर 14 हो गए, जिसमें वे 13 सैम्पल भी शामिल हैं जो नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की जांच में पॉजिटिव पाए गए हैं. राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने एएनआई को बताया, “हमारा विभाग हाई अलर्ट पर है और स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है. कोविड के लिए, हमने हमेशा मामलों की संख्या को चिकित्सा क्षमता से कम रखने की कोशिश की है. केरल में ऑक्सीजन की आपूर्ति की कमी के कारण किसी की मौत नहीं हुई.” जॉर्ज ने इससे पहले कहा था कि जीका के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए एक कार्य योजना तैयार की गई है.

केंद्र ने निगरानी और मदद के लिए भेजी अपनी टीम

केरल में गुरुवार को जीका वायरस का पहला मामला सामने आने के बाद शुक्रवार को केंद्र ने हालात पर नजर रखने और मामलों के प्रबंधन में राज्य सरकार की सहायता के लिए विशेषज्ञों की एक टीम भेजी. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने नई दिल्ली में संवाददाताओं को बताया कि केरल से जीका के कुछ मामले सामने आए हैं. उन्होंने कहा, ‘स्थिति की निगरानी और राज्य सरकार की मदद करने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, वेक्टर जनित रोग विशेषज्ञ और एम्स के चिकित्सक सहित छह सदस्यीय टीम को पहले ही वहां पहुंचने और जीका के प्रबंधन के मामले में राज्य सरकार की सहायता करने के निर्देश जारी किए गए हैं.’

कर्नाटक और तमिलनाडु में चौकसी तेज

इस बीच, कर्नाटक के स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारियों को राज्य में जीका से संबंधित नियंत्रण उपायों को तेज करने का निर्देश दिया है, क्योंकि पड़ोसी राज्य केरल में इस वायरस के मामले सामने आ रहे हैं. केरल की सीमा से लगे दक्षिण कन्नड़, उडुपी, चामराजनगर जिलों को और अधिक सतर्क रहने को कहा गया है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण सेवाओं के आयुक्तालय द्वारा जारी एक परिपत्र में कहा गया है, ‘पड़ोसी राज्य केरल में जीका वायरस रोग (जेडवीडी) की खबरों के मद्देनजर, कर्नाटक में भी वायरस से संबंधित नियंत्रण उपायों को तेज करना बेहद अहम है. फिलहाल मानसून का मौसम चल रहा है, जो कि जीका वायरस रोग को फैलाने के कारक एडीज मच्छर के व्यापक प्रसार में मदद करता है.’ इसी तरह से तमिलनाडु ने अपने सभी जिलों, विशेष रूप से जो पड़ोसी राज्य केरल से सटे हैं, को भी निगरानी तेज करने का निर्देश दिया है.

जीका वायरस के लक्षण क्या हैं?

डेंगू और मलेरिया की तरह, जीका एक तरह का वायरस है जो मच्छर के काटने से फैलता है. यह मुख्य रूप से एडीज मच्छरों द्वारा प्रसारित एक वायरस की वजह से होता है, जो दिन में ही काटता है. यही मच्छर डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने के लिए भी जिम्मेदार है. जीका का पहला दिखाई देने वाला लक्षण बुखार है, जो कि काफी हद तक डेंगू जैसा ही होता है. हालांकि, पहली बार में इसकी पहचान करना बहुत मुश्किल है. कई रोगी फ्लू के लक्षणों से भ्रम में पड़ जाते हैं और इसलिए उन्हें यह नहीं पता होता है कि उन्हें जीका हुआ है या नहीं. जीका वायरस से संक्रमित मरीजों के सामान्य लक्षणों में बुखार, चकत्ते और जोड़ों में दर्द शामिल हैं. इस वायरस से मरीजों के संक्रमित होने या फिर इसके लक्षण सामने आने में तीन से 14 दिनों का समय लगता है.

भारत में कब आया जीका वायरस का पहला केस

भारत के लिए जीका वायरस नया नहीं है. भारत में इस वायरस के पहले मामले की पुष्टि 2017 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने की थी. फरवरी 2016 में, डब्ल्यूएचओ ने जीका को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल (Global Health Emergency) घोषित किया था. गुजरात भारत का पहला राज्य था जहां जीका वायरस के मामले सामने आए थे, उसके बाद इस वायरस का शिकार होने वाला तमिलनाडु दूसरा राज्य बना.

क्या आप जीका से मर सकते हैं?

यह जरूरी नहीं है. मच्छर के काटने से होने वाली अन्य बीमारियों की तरह ही आराम और दवा जीका को ठीक कर सकती है. आमतौर पर जीका वायरस से संक्रमित मरीज ठीक हो जाते हैं, लेकिन यह बीमारी लगभग 1 फीसदी मरीजों की जान ले लेती है.

क्या जीका वायरस से बचाव का कोई उपाय है?

जीका से बचाव के लिए फिलहाल कोई टीका मौजूद नहीं है. हालांकि, फ्रांस में शोधकर्ता एक सुरक्षित और प्रभावी टीका विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं जिसका परीक्षण जारी है.



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