Friday, September 17, 2021
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टेस्ला के लिए राज्यों ने बिछाए रेड कार्पेट: गुजरात ने ऑफर की 1,000 हेक्टेयर जमीन, कर्नाटक ने भी की खास पेशकश


नई दिल्ली. इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला की मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट अपने राज्य में स्थापित कराने के लिए महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक पूरी कोशिश में जुटे हुए हैं. गुजरात ने कच्छ तट से सटे मुंद्रा में टेस्ला को 1,000 हेक्टेयर जमीन का ऑफर भी दे दिया है. गुजरात में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘वे तय नहीं कर पा रहे हैं कि उन्हें गुजरात में किसी दूर की जगह पर आना चाहिए या बेंगलुरु में ही रहें. वे गुजरात और कर्नाटक दोनों सरकारों के साथ बातचीत करने की कोशिश कर रहे हैं.’ इस साल 8 जनवरी को कंपनी ने बेंगलुरु में टेस्ला इंडिया मोटर्स एंड एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड रजिस्टर किया.

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी अन्बालागन ने बताया, ‘महाराष्ट्र सरकार और टेस्ला के अधिकारियों की चार बैठकें हुईं, और आखिरी लगभग 7-8 महीने पहले हुई थी. हमने उन्हें जमीन की पेशकश भी की ताकि वे महाराष्ट्र में प्रॉडक्शन फैसेलटीज शुरू कर सकें. राज्य में पहले से ही कई ऑटो कंपनियां हैं.’ साल 2020 में  आखिरी बातचीत के बाद से, महाराष्ट्र सरकार को कंपनी से कोई जवाब नहीं मिला.

उधर इस साल 12 जनवरी को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा था कि टेस्ला कर्नाटक में एक रिसर्च एंड डेवलपमेंट यूनिट स्थापित करेगी, लेकिन बाद में ट्वीट को हटा दिया. फरवरी में उन्होंने एक बयान दिया कि टेस्ला कर्नाटक में अपनी इलेक्ट्रिक कार की मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट खोलेगी. उन्होंने  7,725 करोड़ रुपये की लागत से बेंगलुरु से लगभग 60 किलोमीटर दूर तुमकुरु में एक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के निर्माण की घोषणा के बाद टेस्ला का जिक्र किया.

गुजरात ने मुंद्रा में अडा पोर्ट्स और विशेष आर्थिक क्षेत्र (APSEZ) के अंदर और बाहर दोनों जगह जमीन की पेशकश की है. APSEZ में 8,400 हेक्टेयर है, जिसमें से आधा खाली पड़ा है. अधिकारी ने कहा, ‘हमने उनसे कहा है कि जमीन कोई मुद्दा नहीं होगा. हालांकि उन्होंने अभी तक यह तय नहीं किया है कि भारत में वह एक्सपोर्ट यूनिट  होगी या दोनों का मिश्रण.’ APSEZ मुंद्रा में सबसे बड़ा कमर्शियल बंदरगाह और SEZ संचालित करता है. SEZs को ड्यूटी-फ्री एन्क्लेव घोषित किया गया है जहां भारतीय सीमा शुल्क कानून लागू नहीं होता है.

रिपोर्ट में आधिकारिक सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि गुजरात सरकार मुंद्रा में एक इलेक्ट्रिक व्हीकल हब बनाने की कोशिश कर रही है और इसलिए टेस्ला के साथ आने वाली सहायक यूनिट्स को भी भूमि आवंटित करने का प्रस्ताव दिया गया है. इसमें इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट और बाकी कंपोनेंट्स बनाने वाले मैन्यूफैक्चरर्स शामिल है.

हालांकि, कंपनी ने अभी तक राज्य सरकार को कोई ऐसी जानकारी नहीं दी है जिससे उनकी जरूरतों के बारे में पता चल सके . इसबीच एक अधिकारी ने कहा, ‘गुजरात में जमीन बेंगलुरु की तुलना में काफी सस्ती है लेकिन ट्रेन्ड मैनपावर की कमी है और मुंद्रा जैसे दूर-दराज के जगहों में फॉर्च्यून 500 कंपनियों को बुलाना मुश्किल है.’

टेस्ला गुजरात की पहली इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी नहीं होगी. फर्म द्वारा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) बेंगलुरु को प्रस्तुत किए गए दस्तावेज बताते हैं कि कंपनी ‘इंपोर्ट, डिस्ट्रीब्यूट, सर्विस, मेंटेनेंस और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की रिपेयर, स्टेशनरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम,  एनर्जी जनरेशन सिस्टम और उपकरणों की मरम्मत करेगी जिसमें सोलर पैनल, सोलर इलेक्टिकल सिस्टम भी शामिल है.’ कंपनी ने कहा है कि वह ‘इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, स्टेशनरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स के सेल्स, एक्सपोर्ट, सर्विस और प्रमोशन के बिजनेस को आगे बढ़ा सकती है.’



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