Thursday, July 29, 2021
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ताड़ीघाट-मऊ रेलखंड विस्तारीकरण पर सुनवाई पूरी, जमीन के मुआवजे की दर को लेकर जल्द आएगा फैसला


सार

16 गांवों के 599 काश्तकारों ने 5.9459 हेक्टेयर भूमि के लिए गाजीपुर में जिलाधिकारी न्यायालय में आर्बिटेशन दाखिल की थी। परियोजना की लागत निर्धारित समय में पूरा न होने से इसकी लागत 80 करोड़ रुपये तक बढ़ी।
 

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ताड़ीघाट-मऊ रेल खंड के विस्तारीकरण में कुछ काश्तकारों ने अपनी जमीन के मुआवजे के रेट को लेकर जिलाधिकारी प्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। पिछले दो साल से लंबित इस मामले में जिलाधिकारी के न्यायालय में सुनवाई पूरी हो गई। 

अधिकारियों का कहना है कि इसमें फैसला कभी भी आ सकता है। पहले चरण की करीब चौदह किमी लंबी ताड़ीघाट-मऊ रेलखंड के विस्तारीकरण में जिले की सदर तथा जमानियां तहसील के 17 गांवों के काश्तकारों की जमीन अधिकृत की गई थी। जिसमें से 16 गांवों के  599 काश्तकारों ने 5.9459 हेक्टेयर जमीन के लिए करीब 40.79 करोड़ रुपये के भुगतान को लेकर जिलाधिकारी न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। दो सालों से लंबित आर्बिटेशन की सुनवाई पूरी होने के बाद मामले की सभी पत्रावलियां आदेश के लिए भेजी जा चुकी है। 

आरवीएनएल के परियोजना प्रबंधक सत्यम कुमार ने बताया कि दो वर्षों से लंबित सभी आर्बिटेशन के मामले की सुनवाई जिलाधिकारी के न्यायालय में पूरी हो चुकी है जिसका आदेश बहुत जल्द आयेगा। इसके बाद परियोजना के निर्माण में और तेजी आने की उम्मीद है। 

मालूम हो कि इसके पहले दोनों तहसीलों के 17 गांव के 2184 किसानों के 29.5851 हेक्टेयर का करीब 1.69 अरब रुपये का भुगतान किया जा चुका है। बता दें कि पहले चरण की इस परियोजना में सदर व जमानियां तहसील के कुल 17 गांव शामिल हैं। इन गांवों के कुल 2783 किसान परियोजना से प्रभावित हो रहे हैं। इसके लिए कुल 35.5310 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई थी जिसका करीब 2.10 अरब रुपये किसानों को मुआवजा देना था। मगर, बहुत से किसानों में मुआवजे व सर्किल रेट को लेकर असंतोष था। जिसको लेकर किसान जिलाधिकारी न्यायालय में आर्बिटेशन दाखिल कर दिए। 

ताड़ीघाट-मऊ के इस रेल परियोजना को पीएम नरेंद्र मोदी ने 14 नवंबर 2016 को रिमोट के जरिये शिलान्यास किया था। इस परियोजना पर पीएमओ की नजर बनी रहती है। बीच-बीच में पीएमओ की ओर से परियोजना की प्रगति रिपोर्ट मांगी जाती है। पहले चरण की परियोजना को साल 2021 में पूरा किया जाना था। मगर, कोरोना संक्रमण और आर्बिटेशन के चलते यह परियोजना निर्धारित समय से पूरा नही हो सकी। इसके बाद इस परियोजना को साल 2023 तक निर्धारित कर दी गई है।

बता दें कि 51 किमी लंबी करीब 1766 करोड़ की इस परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जाना है। पहले चरण में सोनवल, ताड़ीघाट, मेदिनीपुर से गंगा नदी होते हुए सिटी स्टेशन से गाजीपुर घाट तक जाना है। दूसरे चरण की परियोजना को घाट स्टेशन से मऊ तक पूरा किया जाना है। वहीं, अब परियोजना की लागत निर्धारित समय में पूरा न होने से इसकी लागत 80 करोड़ रुपये बढ़ चुकी है। 

विस्तार

ताड़ीघाट-मऊ रेल खंड के विस्तारीकरण में कुछ काश्तकारों ने अपनी जमीन के मुआवजे के रेट को लेकर जिलाधिकारी प्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। पिछले दो साल से लंबित इस मामले में जिलाधिकारी के न्यायालय में सुनवाई पूरी हो गई। 

अधिकारियों का कहना है कि इसमें फैसला कभी भी आ सकता है। पहले चरण की करीब चौदह किमी लंबी ताड़ीघाट-मऊ रेलखंड के विस्तारीकरण में जिले की सदर तथा जमानियां तहसील के 17 गांवों के काश्तकारों की जमीन अधिकृत की गई थी। जिसमें से 16 गांवों के  599 काश्तकारों ने 5.9459 हेक्टेयर जमीन के लिए करीब 40.79 करोड़ रुपये के भुगतान को लेकर जिलाधिकारी न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। दो सालों से लंबित आर्बिटेशन की सुनवाई पूरी होने के बाद मामले की सभी पत्रावलियां आदेश के लिए भेजी जा चुकी है। 

आरवीएनएल के परियोजना प्रबंधक सत्यम कुमार ने बताया कि दो वर्षों से लंबित सभी आर्बिटेशन के मामले की सुनवाई जिलाधिकारी के न्यायालय में पूरी हो चुकी है जिसका आदेश बहुत जल्द आयेगा। इसके बाद परियोजना के निर्माण में और तेजी आने की उम्मीद है। 

मालूम हो कि इसके पहले दोनों तहसीलों के 17 गांव के 2184 किसानों के 29.5851 हेक्टेयर का करीब 1.69 अरब रुपये का भुगतान किया जा चुका है। बता दें कि पहले चरण की इस परियोजना में सदर व जमानियां तहसील के कुल 17 गांव शामिल हैं। इन गांवों के कुल 2783 किसान परियोजना से प्रभावित हो रहे हैं। इसके लिए कुल 35.5310 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई थी जिसका करीब 2.10 अरब रुपये किसानों को मुआवजा देना था। मगर, बहुत से किसानों में मुआवजे व सर्किल रेट को लेकर असंतोष था। जिसको लेकर किसान जिलाधिकारी न्यायालय में आर्बिटेशन दाखिल कर दिए। 


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परियोजना पर पीएमओ की नजर



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