Saturday, September 18, 2021
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पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी के विरूद्ध कांग्रेस का केरल में प्रदर्शन


कांग्रेस पार्टी की केरल इकाई ने पेट्रोल और डीजल के मूल्यों में हो रही वृद्धि के विरूद्ध प्रदर्शन किया.

Petrol and Diesel Price Hike: देश में पेट्रोल और डीजल के मूल्यों में हो रही वृद्धि के विरूद्ध कांग्रेस पार्टी की केरल इकाई ने पेट्रोल पम्पों के समक्ष शुक्रवार को प्रदर्शन किया. इस बीच, शुक्रवार को एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के मूल्य में क्रमश: 31 पैसे और 28 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई.

तिरुवनंतपुरम. कांग्रेस पार्टी की केरल इकाई ने देश में पेट्रोल और डीजल के मूल्यों में हो रही वृद्धि के विरूद्ध पूरे राज्य में पेट्रोल पम्पों के समक्ष शुक्रवार को प्रदर्शन किया. इस बीच, शुक्रवार को एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के मूल्य में क्रमश: 31 पैसे और 28 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई. राजधानी तिरुवनंतपुरम में पेट्रोल 97.54 रुपये और डीजल 92.04 रुपये लीटर मिल रहा है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला, ओमान चांडी, नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीशन, मुल्लापल्ली रामचंद्रन, संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के संयोजक एम एम हसन और अन्य नेताओं ने राज्य के विभिन्न पेट्रोल पम्पों पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया. चांडी ने प्रदर्शन स्थल पर कहा, ‘‘राज्य और केंद्र सरकार लोगों को लूट रही है. ईंधन की कीमत का आधे से अधिक हिस्सा हम सरकार को कर के रूप में चुका रहे हैं. कच्चे तेल की कम कीमत होने के बावजूद देश की जनता ईंधन के लिए अधिक कीमत चुका रही है.’’

विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष चेन्निथला ने यहां के वेल्लीयाम्बलम में प्रदर्शन की शुरुआत की. इस मौके पर उन्होंने कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतों से आम आदमी प्रभावित हो रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘ कीमतों में हो रही इस वृद्धि से आम आदमी प्रभावित हो रहा है. जब कीमतें बढ़ती हैं तो राज्य सरकार खुश होती है. भाजपा सरकार इस देश के लोगों की जिंदगी मुश्किल बना रही है और राज्य सरकार इसमें केंद्र का समर्थन कर रही है.’’ प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस की युवा इकाई के कार्यकर्ताओं ने त्रिशूर में एक तेल टैंकर को अपने कब्जे में लिया. हालांकि, बाद में वाहन को जाने दिया गया.

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दरअसल, भारत में पेट्रोल-डीज़ल का खुदरा भाव वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के भाव से लिंक है. इसका मतलब है कि अगर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल का भाव कम होता है तो भारत में पेट्रोल-डीज़ल सस्ता होगा. अगर कच्चे तेल का भाव बढ़ता है तो पेट्रोल-डीज़ल के लिए ज्यादा खर्च करना होगा, लेकिन हर बार ऐसा होता नहीं है. जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल का भाव चढ़ता है तो ग्राहकों पर इसका बोझ डाला जाता है, ले​किन जब कच्चे तेल का भाव कम होता है, उस वक्त सरकार अपनी रेवेन्यू बढ़ाने के लिए ग्राहकों पर टैक्स का बोझ डाल देती है. इस प्रकार वैश्विक बाजार में कच्चे तेल का भाव कम होने से आम लोगों को कुछ खास राहत नहीं मिलती है.

पिछले साल ही जब कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत हुई थी, तब क्रूड ऑयल के भाव में बड़ी गिरावट देखने को मिली. तेल कंपनियों ने लगातार 82 दिनों तक खुदरा ईंधन के भाव में कोई बदलाव नहीं किया. इस प्रकार ग्राहकों को 2020 के पहले 6 महीने में सस्ते कच्चे तेल का लाभ नहीं ​मिला, जबकि दूसरे 6 महीने में सरकार ने टैक्स का बोझ डाल दिया.









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