Sunday, December 5, 2021
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बागवानी सम्मेलन:रसायनिक खादों के उत्पाद सेहत के लिए हानिकारक: जैविक खाद के उत्पादन फायदेमंद, खेती के लिये प्राकृतिक ऊर्जा का इस्तेमाल ज्यादा बेहतर


कानपुर29 मिनट पहले

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चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय - Dainik Bhaskar

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में भारतीय बागवानी सम्मेलन के तीसरे दिन जैविक खेती पर जोर दिया गया। कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि किसानों को फिर से प्राकृतिक खेती की तरफ लौटना होगा। इतना ही नही कृषि कार्य के लिये प्राकृतिक ऊर्जा को उपयोग में लाते हुए विभिन्न जैविक उत्पादों के साथ-साथ गुणवत्ता युक्त उत्पादक करना चाहिए। इसमें केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के वैज्ञानिक प्रधान वैज्ञानिक डॉ राम अवध राम ने पौधों की वृद्धि एवं उत्पादन के लिए उपयोगी विभिन्न बायो इनहैंसर जैसे अमृत पानी, जीवामृत, वीजामृत, पंचगव्य आदि के प्रयोग एवं उनके जैविक गुणवत्ता के बारे में बताया।

रसायनिक खादों के उत्पाद के दुष्प्रभाव के बारे में बताया गया…

लखनऊ के डॉ आरके पाठक एवं लुधियाना के डॉ वाईआर चन्ना एवं वीके त्रिपाठी ने रसायनिक खादों के इस्तेमाल से उत्पादन होने वाली फसल के नुकसान के बारे में बताया। उन्होंने कहा समाज में बढ़ती बीमारी की जड़ में यह रसायनिक खाद है। इससे उत्पादन होने वाला फसल सेहत के लिए नुकसान दे रहती है। इस तकनीकी सत्र में डॉ बलराज सिंह पूर्व कुलपति कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर में संरक्षित खेती पर किए जा रहे विभिन्न किसान हितेषी अनुसंधानो पर विस्तार से बताया। होमा टीचर डॉक्टर आर के पाठक ने कॉस्मेटिक ऊष्मा के प्रयोग से गुणवत्ता युक्त, बीमारी रहित रसायनों के दुष्प्रभाव से फल एवं सब्जी उत्पादन पर विस्तार से जानकारी दी।

देश भर से आये कृषि वैज्ञानिकों ने रखे शोध पत्र…
तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ बलराज सिंह पूर्व कुलपति कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर ने की। जबकि अध्यक्षता डॉ राजू बरवाली चेयरमैन माइको कंपनी ने की। इस सत्र में केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ के निदेशक डॉ शैलेंद्र राजन ने आम एवं अमरूद के मूल ब्रन्तों की गुणवत्ता एवं उनका फलोत्पादन एवं महत्व पर विस्तार से बताया। तत्पश्चात डॉ डीके घोष निदेशक नींबू अनुसंधान संस्थान नागपुर महाराष्ट्र में गुणवत्ता युक्त नींबू उत्पादन में मूल ब्रन्तों की उपलब्धता, गुण एवं बीमारी रहित उत्पादन करने के लिए मूल ब्रन्तों के उपयोग पर विस्तार से वर्णन किया।जम्मू और कश्मीर से डॉक्टर वसीम हसन रजा ने संरक्षित खेती में मृदा रहित रूटिंग मीडिया पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही आंध्र प्रदेश के डॉक्टर शरत रेड्डी ने नेट हाउस के अंदर पपीता की खेती पर किसानों के हितों पर अधिक उत्पादन हेतु चर्चा की। इस अवसर पर स्थानीय संयोजक डॉ एच जी प्रकाश, मीडिया प्रभारी डॉ खलील खान, डॉक्टर आरपी सिंह, डॉक्टर एके सिंह, डॉक्टर संजय कुमार एवं कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

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