Saturday, June 25, 2022
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बीएचयू अस्पताल: 27 नवंबर से हड़ताल पर हैं जूनियर डॉक्टर, मरीजों की परेशानी बढ़ी


सार

नीट पीजी काउंसिलिंग में देरी के विरोध में आईएमएस बीएचयू के जूनियर डॉक्टर 27 नवंबर से हड़ताल पर हैं। वह अस्पताल तो रोज आ रहे हैं लेकिन ओपीडी, वार्ड और सामान्य ऑपरेशन में सेवा नहीं दे रहे हैं। 

धरने पर बैठे जूनियर डॉक्टर
– फोटो : अमर उजाला

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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सर सुंदरलाल  अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से मरीजों की परेशानी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। ओपीडी में सीनियर डॉक्टर बैठ रहे हैं, लेकिन जूनियर डॉक्टरों के नहीं होने से मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा।

गुरुवार को न्यूरोलॉजी, चर्म रोग, चेस्ट डिपार्टमेंट आदि विभागों के सामने मरीज स्ट्रेचर पर डॉक्टर का इंतजार करते रहे। परिजन अंदर पर्चा जमा कर गेट पर बाट जोह रहे थे कि  मरीजों को अंदर बुलाकर देखा जाए। इधर, चार दिन में दूसरी बार आईएमएस के निदेशक ने जूनियर डॉक्टरों से हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने की अपील की है।

मांगे पूरी न होने तक हड़ताल की चेतावनी

नीट पीजी काउंसिलिंग में देरी के विरोध में आईएमएस बीएचयू के जूनियर डॉक्टर 27 नवंबर से हड़ताल पर हैं। वह अस्पताल तो रोज आ रहे हैं लेकिन ओपीडी, वार्ड और सामान्य ऑपरेशन में सेवा नहीं दे रहे हैं। उधर, सीटी स्कैन सेंटर के बाहर डॉक्टरों ने प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द मांगें मानने की बात कही। साथ ही यह भी कहा कि मांगे पूरी न होने तक वह काम पर लौटने वाले नहीं है। 
पढ़ेंः डॉक्टरों ने युवक के फेफड़े से निकाला लोहे का टुकड़ा, कार्डियोथोरेसिक डिपार्टमेंट की टीम ने की सफल सर्जरी

आईएमएस के निदेशक प्रो. बीआर मित्तल ने जूनियर डॉक्टरों से अपील की है कि वह मरीजों से जुड़ी सेवाएं बाधित न करें और जरूरतमंदों की सेवा में काम पर लौट आए। कहा है कि सर सुंदरलाल चिकित्सालय और ट्रॉमा सेंटर देश की एक बड़ी आबादी की चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करता है, जिसमें रेजिडेंट डॉक्टरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। 

वेतन विसंगति, नियमितीकरण, ट्रांसफर नीति, बीमा पॉलिसी आदि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने के विरोध में संविदा स्वास्थ्य कर्मी (चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ) शुक्रवार से कार्य बहिष्कार पर रहकर वाराणसी सीएमओ कार्यालय पर धरना देगे। अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर इमरजेंसी सेवा छोड़कर बाकी अन्य कामकाज नहीं करेंगे।

उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. अब्दुल जावेद, मंत्री डॉ. कुंवर अमित सिंह ने सीएमओ और जिलाधिकारी को ज्ञापन के माध्यम से जानकारी दे दी है। पदाधिकारियों ने बताया कि सभी प्रदेश मुख्यालयों पर होने वाले प्रदर्शन में अपनी बात प्रमुखता से रखेंगे।

वाराणसी जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात एएनएम इन दिनों मानदेय न मिलने से परेशान हैं। कई बार आवाज उठाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो बृहस्पतिवार को सीएमओ कार्यालय पहुंचकर एएनएम ने प्रभारी सीएमओ को ज्ञापन देकर मानदेय दिलाने की मांग की। इस दौरान उनकी प्रभारी सीएमओ से नोकझोंक भी हुई।

एएनएम ने बताया कि कोरोना काल में जनवरी से टीकाकरण का काम किया जा रहा है। गाइडलाइन के अनुसार टीकाकरण के लिए जो प्रोत्साहन भत्ता मिलना चाहिए, वह भी नहीं मिला। यहीं नहीं हर महीने वेतन से 2300 रुपये कटने के बाद भी अब तक ईपीएफ अकाउंट नंबर नहीं मिल सका है। हालांकि, सीएमओ ने जल्द से जल्द उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है, जिसके बाद एएनएम कार्यालय से वापस लौट गईं। 

विस्तार

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सर सुंदरलाल  अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से मरीजों की परेशानी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। ओपीडी में सीनियर डॉक्टर बैठ रहे हैं, लेकिन जूनियर डॉक्टरों के नहीं होने से मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा।

गुरुवार को न्यूरोलॉजी, चर्म रोग, चेस्ट डिपार्टमेंट आदि विभागों के सामने मरीज स्ट्रेचर पर डॉक्टर का इंतजार करते रहे। परिजन अंदर पर्चा जमा कर गेट पर बाट जोह रहे थे कि  मरीजों को अंदर बुलाकर देखा जाए। इधर, चार दिन में दूसरी बार आईएमएस के निदेशक ने जूनियर डॉक्टरों से हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने की अपील की है।

मांगे पूरी न होने तक हड़ताल की चेतावनी

नीट पीजी काउंसिलिंग में देरी के विरोध में आईएमएस बीएचयू के जूनियर डॉक्टर 27 नवंबर से हड़ताल पर हैं। वह अस्पताल तो रोज आ रहे हैं लेकिन ओपीडी, वार्ड और सामान्य ऑपरेशन में सेवा नहीं दे रहे हैं। उधर, सीटी स्कैन सेंटर के बाहर डॉक्टरों ने प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द मांगें मानने की बात कही। साथ ही यह भी कहा कि मांगे पूरी न होने तक वह काम पर लौटने वाले नहीं है। 

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