Friday, January 21, 2022
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महिलाओं के लिए तालिबान का एक और फरमान, कोई भी तोड़ा नियम तो खैर नहीं


काबुलः तालिबान (Taliban) ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि महिलाओं के प्रति उनका रवैया नहीं बदलने वाला है. अफगानिस्तान (Afghanistan) में तालिबानी अधिकारियों ने महिलाओं की आजादी में एक बार फिर कटौती की है. नए फरमान के मुताबिक अफगानिस्ता में अब महिलाएं लंबी दूरी की यात्रा अकेले नहीं कर पाएंगी. महिलाएं इसी शर्त पर लंबी दूरी की यात्रा कर सकेंगी, जब उनके साथ उनका कोई करीबी पुरुष रिश्तेदार होगा.

लंबी यात्रा के लिए पुरुष पर होना होगा निर्भर

अल जज़ीरा के मुताबिक मंत्रालय के प्रवक्ता सादिक अकिफ मुहाजिर ने कहा, ’72 किमी (45 मील) से अधिक की यात्रा करने वाली महिलाओं के साथ परिवार का कोई करीबी पुरुष सदस्य होना अनिवार्य है.’

महिलाओं के लिए हिजाब अनिवार्य

‘मिनिस्ट्री फॉर द प्रमोशन ऑफ वर्चु एंड प्रीवेंशन ऑफ वाइस’ मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी की गई गाइडलाइंस में यह भी कहा गया था कि हिजाब पहनने वाली महिलाओं को ही वाहन मालिक अपने वाहन में बैठने की अनुमति दे सकेंगे. तालिबान के इन फरमानों की पूरी दुनिया में निंदा हो रही है.

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महिलाओं को आजादी देने की कोई मंशा नहीं!

अफगानिस्तान पर अपनी सत्ता काबिज करते हुए तालिबान ने कहा था कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक उदार छवि पेश करने की इच्छा रखते हैं. इसमें यह भी कहा गया था महिलाओं को पूरा अधिकार दिया जाएगा. लेकिन सत्ता पर काबिज होने के बाद तालिबान ने यह साबित कर दिया है कि उनकी महिलाओं को आजादी देने की कोई मंशा नहीं है.

महिला टीवी पत्रकारों को सिर पर स्कॉर्फ का भी फरमान

सोशल मीडिया नेटवर्क पर नई गाइडलाइंस में लोगों को अपने वाहनों में संगीत बजाना बंद करने के लिए भी कहा गया है. याद दिला दें कि एक सप्ताह पहले मंत्रालय ने अफगानिस्तान के टेलीविजन चैनलों से महिला अभिनेत्रियों वाले नाटक और सोप ओपेरा दिखाना बंद करने को कहा था. इस फरमान में महिला टीवी पत्रकारों को सिर पर स्कॉर्फ पहने के लिए भी कहा गया है.

तालिबान में हिजाब की परिभाषा

यहां हिजाब वह पोशाक होती है, जो बालों को ढंकने से लेकर चेहरे के घूंघट या पूरे शरीर को ढंकने तक हो सकता है. अधिकांश अफगान महिलाएं पहले से ही हेडस्कार्फ़ (हिजाब) पहनती हैं.

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‘महिलाओं को बंदी बनाना’

ह्यूमन राइट्स वॉच ने तालिबान में जारी नई गाइडलाइंस की कड़ी निंदा की है. महिला अधिकारों के समूह के एसोसिएट डाइरेक्टर हीथर बर्र ने एएफपी समाचार एजेंसी से कहा, ‘यह नया आदेश अनिवार्य रूप से महिलाओं को कैदी बनाने की दिशा में लाया गया है.’ बर्र ने कहा, ‘यह उनकी (महिलाओं) घूमने की आजादी, दूसरे शहर की यात्रा करने, व्यापार करने, (या) घर में हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने के अधिकारों को खत्म करता है.’

महिलाओं की शिक्षा के अधिकार का हनन

इस महीने की शुरुआत में तालिबान ने अपने सर्वोच्च नेता के नाम पर एक फरमान जारी किया था. जिसमें सरकार को महिलाओं के अधिकारों को लागू करने का निर्देश दिया गया था. लेकिन इसमें लड़कियों की शिक्षा तक पहुंच का उल्लेख नहीं था. रविवार को अफगानिस्तान के उच्च शिक्षा मंत्री अब्दुल बकी हक्कानी ने कहा कि अधिकारी इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं.

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हक्कानी का अजीब बयान

हक्कानी ने संवाददाताओं से कहा, ‘इस्लामिक अमीरात महिलाओं की शिक्षा के खिलाफ नहीं है, बल्कि को-एज्यूकेशन के खिलाफ है.’ यानी लड़कियां.. लड़कों के साथ पढ़ाई नहीं कर सकतीं. उन्होंने कहा, ‘हम एक इस्लामी माहौल बनाने पर काम कर रहे हैं, जहां महिलाएं पढ़ सकें… इसमें कुछ समय लग सकता है.’ लेकिन हक्कानी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि लड़कियां देश भर में स्कूल और कॉलेजों में कब लौट सकती हैं.

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