Thursday, September 23, 2021
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मांझी-तेज मुलाकात के बाद बदले BJP के सुर: सुशील मोदी ने कहा- दलितों के सर्वमान्य नेता हैं जीतन राम मांझी, 24 घंटे पहले पार्टी ने मांझी को दिखाया था पाकिस्तान


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पटना12 मिनट पहलेलेखक: शालिनी सिंह

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BJP के राज्यसभा सांसद सुशील मोदी और हम पार्टी प्रमुख जीतन राम मांझी। - Dainik Bhaskar

BJP के राज्यसभा सांसद सुशील मोदी और हम पार्टी प्रमुख जीतन राम मांझी।

हम नेता जीतन राम मांझी से लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप की शुक्रवार को मुलाकात ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इस हलचल का असर यह है कि कल जिस भाजपा ने मांझी के दलित और मुस्लिम से जुड़े बयान पर उन्हें पाकिस्तान को देखने की नसीहत दी थी, आज उसी भाजपा के राज्यसभा सांसद ने मांझी को दलितों का सर्वमान्य नेता बताया।

सुशील मोदी ने बताए मुलाकात के मायने

मांझी और तेजप्रताप की मुलाकात के करीब 7 घंटे बाद सुशील मोदी ने ट्वीट किया। पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने ट्वीट कर कहा- “मांझी दलितों के सर्वमान्य नेता है, उन पर डोरे डालने वाले सफल नहीं होंगे।” यही नहीं, सुशील मोदी ने इस मुलाकात के मायने भी समझाए।

उन्होंने कहा ,”पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी NDA के वरिष्ठ नेता हैं, इसलिए किसी जनप्रतिनिधि की उनसे शिष्टाचार भेंट का राजनीतिक मायने निकालने की जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए।,” मांझी की तारीफ में मोदी ने कहा, “जीतन राम मांझी किसी एक जाति के नहीं, बल्कि बिहार में दलितों के बड़े सर्वमान्य नेता हैं। उन्होंने राजद का कुशासन भी देखा है। उनसे किसी को जबरदस्ती मिलवा देने से कोई फर्क नहीं पड़ता। “

वहीं, मांझी और तेजप्रताप की मुलाकात के बाद NDA में टूट के कयास और चर्चा पर भी सुशील मोदी ने सफाई दी। सुशील मोदी ने कहा- “NDA एकजुट, नीतीश सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी। किसी को मुगालते में नहीं रहना चाहिए।”

एक दिन पहले भाजपा ने मांझी को पाकिस्तान को देखने की दी थी नसीहत

भाजपा सांसद के ट्वीट में अपनी पार्टी के नेताओं की बयानबाजी से उभरा दर्द भी छलका। उन्होंने कहा- ” NDA एक लोकतांत्रिक गठबंधन है, इसलिए जनता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सभी घटक दलों की राय अलग-अलग हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में घटक दल को एक-दूसरे के विरुद्ध सार्वजनिक बयानबाजी करने के बजाय संगठन के आंतरिक मंच पर अपनी राय रखनी चाहिए। NDA के सभी घटक दलों से अपील है कि वे गैरजिम्मेदार बयानबाजी से बचें।”

आपको बता दें कि बीते दो दिनों से भाजपा और मांझी के बीच सोशल मीडिया पर जबदस्त तनातनी दिख रही है। 8 जून के बांका के मदरसा में विस्फोट का मामला हो या फिर दलित अत्याचार मामला। इन सब मामलों पर भाजपा ने सरकार पर निशाना साधा था। मांझी नीतीश कुमार के बचाव में उतरे तो भाजपा के जवाबी हमलों का उन्हें शिकार होना पड़ा।

गुरुवार को भाजपा के एक प्रवक्ता ने मांझी को कहा था- सही को सही और गलत को गलत कहने की हिम्मत रखिए जनता ने कश्मीर को भी देखा है और अभी बंगाल से नूरपुर तक का तमाशा भी देख रही है। आतंकी या नक्सली किसी के सगे नहीं होते, यह ‘भस्मासुर’ पालने वालों को भी नहीं छोड़ते, हिंदुस्तान के मर्म को न समझने वाले पाकिस्तान का उदाहरण देख सकते हैं।

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