Friday, September 17, 2021
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मुकुल रॉय पर बोले दिलीप घोष, कटमनी पार्टी से आए लोगों के लिए बीजेपी में रहना मुश्किल


नई दिल्ली. बीजेपी के वरिष्ठ नेता रहे मुकुल रॉय के टीएमसी में वापस लौटने के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि वे लोग जो एक ऐसी पार्टी से आए थे, जहां कट मनी और सिंडिकेट का राज चलता है, उनके लिए बीजेपी में रहना मुश्किल है. उनके बीजेपी छोड़कर जाने से कोई असर नहीं पड़ेगा. पार्टी के लिए नो प्रॉफिट नो लॉस की स्थिति है. मुकुल रॉय ने शुक्रवार को बीजेपी को जोरदार झटका देते हुए अपने पुत्र शुभ्रांशु के साथ अपनी पुरानी पार्टी तृणमूल कांग्रेस में वापस ज्वॉइन कर ली. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य की सत्ताधारी पार्टी के अन्य नेताओं ने वापसी पर उनका स्वागत किया. मुकुल रॉय के तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के पहले ही बीजेपी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. बीजेपी के राज्य महासचिव सायंतन बोस ने कहा कि आठ जून को एक अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति बनाई गयी है, जो कुछ नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर की गयी पार्टी विरोधी टिप्पणियों का संज्ञान लेगी.

ममता से मुकुल की मुलाकात

पार्टी में औपचारिक रूप से फिर से शामिल होने के पहले मुकुल रॉय ने तृणमूल भवन में ममता बनर्जी के साथ मुलाकात की. तृणमूल के संस्थापकों में शामिल रॉय ने कहा कि वह ‘सभी परिचित चेहरों को फिर से देखकर खुश हैं.’’ रॉय के पार्टी में शामिल होने के बाद तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा कि रॉय को बीजेपी में धमकी दी गई थी और उन्हें प्रताड़ित किया गया, जिसका असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ा. मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मुकुल की वापसी साबित करती है कि बीजेपी किसी को भी चैन से नहीं रहने देती और सब पर अनुचित दबाव डालती है.’’

टीएमसी में क्रम तयइस मौके पर आयोजित समारोह में रॉय मुख्यमंत्री के बायीं ओर बैठे थे और अभिषेक उनके बाद बैठे थे. वहीं, पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता पार्थ चटर्जी मुख्यमंत्री के दाहिने ओर बैठे थे. तृणमूल सूत्रों के अनुसार, यह पार्टी के भविष्य के क्रम का संकेत था. ममता ने कहा, ‘‘उन्होंने (रॉय) जो भूमिका पहले निभाई, वह वही भूमिका निभाएंगे.’ उन्होंने कहा कि रॉय की वास्तविक भूमिका बाद में तय की जाएगी. उन्होंने हालांकि, यह भी कहा कि ‘पार्टी पहले से ही मजबूत है, हम शानदार जीत के साथ लौटे हैं.’

तृणमूल सुप्रीमो ने यह भी आरोप लगाया कि ‘बीजेपी आम लोगों की पार्टी नहीं है, वह जमींदारों की पार्टी है.’’ उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी नीत केंद्र सरकार अपने विरोधियों को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का गलत तरीके से उपयोग करती है. दिलचस्प है कि ममता और रॉय दोनों ने दावा किया कि उनके बीच कभी भी कोई मतभेद नहीं था.

मुकुल की पत्नी का हाल लेने गए अभिषेक

ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल सांसद अभिषेक के हाल ही में शहर के एक अस्पताल में रॉय की पत्नी से मिलने के बाद उनकी संभावित घर वापसी को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं. अभिषेक के दौरे के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन कर रॉय की पत्नी के स्वास्थ्य की जानकारी ली थी. राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार प्रधानमंत्री का यह कदम रॉय को बीजेपी में बनाए रखने का प्रयास था.

बंगाल बीजेपी में दलबदल की आशंका

हालांकि, उस समय रॉय ने बीजेपी छोड़ने की किसी भी इच्छा से इनकार किया था, लेकिन उन्होंने चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस समर्थकों की कथित हिंसा पर चर्चा के लिए बीजेपी की राज्य इकाई की बैठक में भाग नहीं लिया था. ममता ने कहा कि वह उन लोगों के मामले पर विचार करेंगी, जो मुकुल रॉय के साथ पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे और अब वे वापस आना चाहते हैं. उनके इस बयान को संकेत माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में बीजेपी की बंगाल इकाई से दलबदल की शुरुआत हो सकती है.

यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी पार्टी दूसरे दल में शामिल हो गए अन्य नेताओं को भी वापस लेगी, ममता ने स्पष्ट किया कि अप्रैल-मई के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तृणमूल छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले लोगों को वापस नहीं लिया जाएगा. कभी तृणमूल में दूसरे सबसे प्रमुख नेता रहे रॉय को नारद स्टिंग मामले में नाम आने के बाद फरवरी, 2015 में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के पद से हटा दिया गया था. वह नवंबर, 2017 में बीजेपी में शामिल हुए थे.

मुकुल का मामला ‘स्पेशल’

रॉय को वापस लाने की पहल संभवत: तब शुरू हुई थी, जब ममता ने मार्च में एक चुनावी रैली में उनके आचरण को बहुत खराब नहीं बताया था. यह मुख्यमंत्री के अन्य चुनावी भाषणों के विपरीत था और उन्होंने शुभेंदु अधिकारी जैसे दल बदलने वाले नेताओं के खिलाफ तीखी टिप्पणी की थी. जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक और कलकत्ता रिसर्च ग्रुप के सदस्य रजत रॉय ने कहा कि तृणमूल चुनिंदा लोगों को वापस लेगी.

उन्होंने कहा कि इसका मकसद बीजेपी को संगठनात्मक रूप से कमजोर करना होगा, लेकिन साथ ही पार्टी बहुत सारे दलबदलुओं को वापस नहीं लेना चाहेगी, क्योंकि इसे असंतोष को पुरस्कृत किए जाने के तौर पर देखा जाएगा. उन्होंने कहा कि मुकुल रॉय का मामला विशेष है क्योंकि उनके बारे में कहा जाता है कि वह संगठन के लिहाज से अहम हैं.





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