Thursday, December 2, 2021
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मुफ्त में प्रशिक्षण और फिर रोजगार भी: वाराणसी में बुनकरों के बच्चों के लिए सौगात, बुनाई की बारीकी सीखने के साथ बनेंगे डिजाइनर


वाराणसी21 मिनट पहले

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बुनाई और डिजाइन की कक्षा में छात्राएं कंप्यूटर पर काम करते हुए। - Dainik Bhaskar

बुनाई और डिजाइन की कक्षा में छात्राएं कंप्यूटर पर काम करते हुए।

वाराणसी की कॉटन मिल कॉलोनी में बुनकर पृष्ठभूमि से आने वाले युवा अब खुद को मास्टर बुनकर और डिजाइनर के रूप में तैयार कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें मुफ्त में प्रशिक्षण मिलेगा। प्रशिक्षण में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फैशन बाजार की मांगों के अनुसार डिजाइनिंग से लेकर निर्माण तक सभी कामों के बारे में बारीकी से बताया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद युवाओं को नौकरी दिलाने या फिर करघा दिलाकर उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पादों के लिए बाजार की व्यवस्था भी की जाएगी।

टेक्सटाइल डिजाइनर आसिफ शेख (बाएं) वाराणसी में अपने सहयोगियों के साथ।

टेक्सटाइल डिजाइनर आसिफ शेख (बाएं) वाराणसी में अपने सहयोगियों के साथ।

अहमदाबाद के टेक्सटाइल डिजाइनर की है पहल

अहमदाबाद के टेक्सटाइल डिजाइनर आसिफ शेख के क्राफ्ट डिजाइन सोसाइटी आर्ट फाउंडेशन ने डिजाइन और बुनाई का स्कूल शुरू किया है। आसिफ शेख के अनुसार दुनिया भर में प्रामाणिक बनारसी हथकरघा कपड़ों की मांग बहुत अधिक है। हालांकि, बनारसी कपड़ा उद्योग का हथकरघा क्षेत्र इस तरह की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए जमीनी हकीकतों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कपड़ा और फैशन प्रौद्योगिकी के सरकारी और निजी संस्थानों के पाठ्यक्रम का अध्ययन किया। इसके बाद सीडीए आर्ट फाउंडेशन के वर्किंग हैंड-इन-हैंड प्रोजेक्ट के तहत हमने बीसी जिंदल समूह की वित्तीय सहायता से इस संबंध में एक स्कूल शुरू करने का फैसला लिया। स्कूल के लिए वाराणसी से बेहतर कोई और जगह नहीं हो सकती थी।

ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से पढ़ेंगे

आसिफ शेख ने बताया कि छात्र मैन्युअल और कंप्यूटर दोनों कार्यों के लिए डिजाइनिंग और रंग संयोजन की कला सीखेंगे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने-माने कपड़ा विशेषज्ञ और डिजाइनर भी उन्हें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से पढ़ाएंगे। छात्रों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में अपनी पहुंच बनाने के लिए मार्केटिंग, पैकेजिंग और ऑनलाइन बिक्री के तरीके सिखाए जाएंगे। छात्रों को मुफ्त में स्टेशनरी भी मिलेगी। अगर छात्रों की उपस्थिति 3 महीने तक 80% से अधिक रहती है तो उन्हें मानदेय दिया जाएगा।

बुनाई और डिजाइनिंग की कक्षा में छात्र-छात्राएं।

बुनाई और डिजाइनिंग की कक्षा में छात्र-छात्राएं।

10वीं तक पढ़े हों छात्र-छात्राएं

शेख ने कहा कि हमारा स्कूल तीन साल का पूर्णकालिक पाठ्यक्रम शुरू कर रहा है। पाठ्यक्रम में शामिल होने वाले अभ्यर्थी को न्यूनतम दसवीं कक्षा तक पढ़ाई किया हुआ होना चाहिए। आसिफ शेख के प्रोजेक्ट में मदद करने वाले जरी निर्माता श्याम सुंदर ने बताया कि वह छात्रों को बनारसी बुनाई उद्योग के इतिहास और शुद्ध रेशम, ज़री व अन्य सामग्रियों के बारे में जागरूक करेंगे। उन्होंने बताया कि छात्रों को बनारसी बुनाई उद्योग के इतिहास व परंपरा और स्थानीय गद्दीदारों (बनारसी कपड़ा व्यापारी) की आवश्यकताओं और मांगों के बारे में समझाया जाएगा।

रिजल्ट अच्छा रहा तो अन्य जगह खोलेंगे स्कूल

शेख ने बताया कि कपड़ा उद्योग के सहायक उत्पादों के बुनकरों या कारीगरों के परिवारों के लड़के और लड़कियों से अब तक 30 आवेदन प्राप्त हुए हैं। उनके साथ नवंबर अंत तक काम किया जाएगा। फिर इनमें से 15 को पाठ्यक्रम में शामिल होने के लिए चुना जाएगा। यह परियोजना वाराणसी में प्रयोग के आधार पर शुरू की जा रही है और यदि इसके सकारात्मक परिणाम मिलते हैं तो देश के सभी पारंपरिक बुनाई केंद्रों पर इसी तरह के स्कूल शुरू किए जाएंगे।

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