Saturday, November 27, 2021
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मुरादाबाद में बाढ़: सुस्ती अफसरों की, खामियाजा पब्लिक ने भुगता: 3 दिन से साफ था मौसम, आधी रात हाईवे और गांवों में घुसा 8 फीट तक पानी, बेखबर DM चैन से सोते रहे


मुरादाबाद2 घंटे पहले

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मुरादाबाद में 3 दिन से बारिश नहीं थी। धूप निकली हुई थी। इसके बाद भी रामनगर बैराज से पानी छोड़े जाने की वजह से नेशनल हाईवे पानी में डूब गया। करीब 100 गांवों में बाढ़ है। - Dainik Bhaskar

मुरादाबाद में 3 दिन से बारिश नहीं थी। धूप निकली हुई थी। इसके बाद भी रामनगर बैराज से पानी छोड़े जाने की वजह से नेशनल हाईवे पानी में डूब गया। करीब 100 गांवों में बाढ़ है।

मुरादाबाद में पिछले 3 दिन में 2 बूंद बारिश नहीं पड़ी। इसके बाद भी दिल्ली – लखनऊ नेशनल हाईवे बाढ़ में डूब गया। मूंढापांडे और रामपुर के 100 से ज्यादा गांवों में बाढ़ है। घरों में पानी घुसने के बाद लोग छतों पर रात गुजार रहे हैं। गांवों में रस्सी से बंधे पशुओं की बाढ़ में डूबकर मौत हो गई तो हाईवे पर बसें और ट्रक पानी में डूब गए। लेकिन इस सबसे बेखबर मुरादाबाद के पुलिस – प्रशासनिक अफसर अपने बंगलों में चैन से सोते रहे।

प्रशासन की ओर से नहीं था कोई अलर्ट

जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ काे लेकर कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया था। रामनगर में कोसी बैराज से 1.20 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की कोई सूचना ग्रामीणों काे नहीं दी गई थी। अमूमन जब भी कालागढ़ डैम या रामनगर से पानी आता है तो उसे लेकर अलर्ट जारी किया जाता है। डूब क्षेत्र के गांवों में मुनादी कराई जाती है। लेकिन मुरादाबाद के DM शैलेंद्र सिंह इससे सबसे बेखबर अपने बंगले में चैन की नींद सो रहे थे।

3 दिन से बारिश नहीं हो रही थी। मंगलवार को भी धूप निकली थी। लिहाजा ग्रामीणों को रात में पानी आने की रत्तीभर आशंका नहीं थे। ग्रामीण बेफिक्र होकर सोए थे। लेकिन रात को 2 बजे के करीब जब ग्रामीण गहरी नींद में थे तो अचानक पानी उनके घरों में घुस आया। ग्रामीणों को इतना भी वक्त नहीं मिला कि वह अपना जरूरी सामान बटोर पाते। कई गांवों में पानी 8 फीट तक था। जिसकी वजह से ग्रामीणों को रात छतों पर गुजारनी पड़ी।

मूंढापांडे इलाके में मुरादाबाद और रामपुर के करीब 100 गांव जलमग्न हैं।

मूंढापांडे इलाके में मुरादाबाद और रामपुर के करीब 100 गांव जलमग्न हैं।

बाढ़ में डूबकर मरीं 6 बेबस गायें
मूंढापांडे क्षेत्र के गांवों में रात को जब पानी आया तो ग्रामीण गहरी नींद में थे। जब उनकी आंख खुली तो पानी घरों में घुस चुका था। ग्राीमणों ने आनन फानन अपने पशुओं की रस्सियां खोलीं। लेकिन कुछ लोगों को इसका मौका नहीं मिला। जिसकी वजह से स्योहारा बाजे में मंदिर के पास बंधी 6 गायें बाढ़ में डूबकर मर गईं। मुरादाबाद का जिला प्रशासन मुस्तैद होता और मंगलवार को मुनादी कराई होती तो नुकसान को कम किया जा सकता था।

बाढ़ की तस्वीरें।

बाढ़ की तस्वीरें।

हजारों एकड़ फसल तबाह हुई

बाढ़ की वजह से मूंढापांडे क्षेत्र और इससे सटे रामपुर के करीब 100 गांवों में किसानों की हजारों एकड़ फसल बाढ़ से बर्बाद हो गई। इस नुकसान से किसान सदमे की हालत में हैं। किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है। इन ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी गुस्सा है कि यदि रामनगर बैराज से पानी आ रहा था तो प्रशासन ने इसकी मुनादी प्रभावित गांवों में क्यों नहीं कराई। समय से मुनादी होती तो किसानों को अपने जरूरी सामान और पशुओं के लिए वैकल्पिक इंतजाम कर सकते थे।

बाढ़ की तस्वीरें।

बाढ़ की तस्वीरें।

सुबह 10:30 बजे मौके पर पहुंचे DM शैलेंद्र कुमार सिंह।

सुबह 10:30 बजे मौके पर पहुंचे DM शैलेंद्र कुमार सिंह।

रात 2 बजे से हाईवे बंद, DM पहुंचे सुबह 10:30 पर

नेशनल हाईवे पर मूंढापांडे थाना क्षेत्र में रामपुर बॉर्डर पर गणेशघाट के पास कोसी नदी हाईवे के ऊपर से बह रही थी। हाईवे के करीब एक किमी के हिस्से में रात में 2 बजे 8 फीट के करीब पानी था। रोडवेज की बसें, ट्रक और तमाम वाहन इसमें फंसे हुए थे। गांवों में लोग छतों पर लटके थे। लेकिन मुरादाबाद की अफसरशाही चैन से अपने बंगलों में सो रही थी। सुबह 8 बजे तक अफसर हाईवे ब्लॉक होने और गांवों में बाढ़ आने से बेखबर थे। DM शैलेंद्र कुमार सिंह सुबह 10:30 बजे मौके पर पहुंचे। इसके बाद राहत कार्य शुरू किया गया। डायवर्जन को लेकर दोपहर 1 बजे तक भी स्थिति साफ नहीं थी। नेशनल हाईवे करीब 20 घंटे तक ब्लॉक था और इस दौरान प्रशासन पूरी तरह सुस्त नजर आया।

बाढ़ की तस्वीरें।

बाढ़ की तस्वीरें।

इन गांवों में छतों पर हैं ग्रामीण

स्योहारा बाजे, बरवारा खास, खबरिया भूड़, हिरनखेड़ा, भीतखेड़ा, जैतपुर बिसाठ, हीरापुर, रनियाठेर, गदईखेड़ा, रझौड़ा, भैय्या नंगला, हरपाल नगर आदि गांव बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें से सबसे अधिक खराब हालात भैय्या नंगला और हरपाल नगर का बताया जा रहा है। ग्रामीण छतों पर हैं। हालांकि कुछ गांवों में ग्रामीणों को आसपास के ऊंचाई वाले स्थानों पर ले जाया गया है। लेकिन अपने पशु और जरूरी सामान को छोड़कर ग्रामीण जाने को तैयार नहीं हैं। लिहाजा वह घर की छतों पर ही पनाह लिए हैं। हालांकि जिला प्रशासन 11 गांवों में ही बाढ़ की पुष्टि कर रहा है। DM शैलेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि अभी तक की सूचना के मुताबिक मूंढापांडे के 5 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। जबकि 6 गांवों के कृषि क्षेत्र में पानी है।

बाढ़ की तस्वीरें।

बाढ़ की तस्वीरें।

हाईवे पर वाहनों की कतारें।

हाईवे पर वाहनों की कतारें।

हाईवे पर रहीं वाहनों की मीलों लंबी कतारें
मुरादाबाद से लेकर गणेशघाट तक और दूसरी तरफ रामपुर से कई किमी की दूरी तक हाईवे पर वाहनों की कतारें रहीं। पूरा दिन हाईवे के ऊपर से कोसी नदी का पानी बहता रहा। इस दौरान हाईवे पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया।

दिल्ली की तरफ से आने वाले वाहन मुरादाबाद से – बिलारी (आगरा हाईवे)- शाहबाद होकर रामपुर क्रास करके नेशनल हाईवे पर भेजे गए। लखनऊ की तरफ से आने वाले वाहन रामपुर से पहले – शाहबाद- बिलारी होते हुए मुरादाबाद में हाईवे पर कनेक्ट हुए। हालांकि शाम को 4 बजे भारी वाहनों के लिए हाईवे खोल दिया गया। बुधवार रात में करीब 10 बजे हाईवे पर पानी कम होने के बाद छोटे वाहन भी यहां से निकले रहे थे।

बाढ़ की तस्वीरें।

बाढ़ की तस्वीरें।

21 ट्रेनें निरस्त, 5 डायवर्ट की गईं
बाढ़ की वजह से मूंढापांडे और रामपुर के बीच रेल पुल क्षतिग्रस्त हाे गया। जिसकी वजह से मुरादाबाद से होकर गुजरने वाली 5 ट्रेनों को डायवर्ट कर दिया गया। जबकि 21 ट्रेनों को सुबह ही कैंसिल कर दिया गया था।

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