Sunday, December 5, 2021
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यूपी में महिलाएं बोली राजनीति में आज भी हम पीछे: एक दल क्यों, सभी राजनीतिक दल महिलाओं को निर्णयात्मक भूमिका में रखें


मेरठ35 मिनट पहले

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  • दैनिक भास्कर ने प्रदेश की लीडिंग महिलाओं से जानी उनकी राय

देश के सबसे बड़े प्रदेश यूपी में महिलाएं मानती हैं कि आज भी पॉलिटिक्स में उन्हें भेदभाव सहना पड़ता है। राजनीति में हमेशा महिलाओं को पीछे रखा गया। दैनिक भास्कर ने यूपी की लीडिंग लेडीज से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर राय पूछी तो अधिकांश महिलाओं ने स्वीकार किया कि हां, राजनीति में महिला सशक्तीकरण की जरूरत है।

पल्लवी फौजदार बाइक राइडर

पल्लवी फौजदार बाइक राइडर

महिलाओं में टैलेंट है, सिर्फ अवसर मिलना चाहिए
आगरा की फेमस अवार्ड विनर बाइक राइडर पल्लवी फौजदार कहती हैं राजनीति में महिलाओं की भागीदारी होनी चाहिए। अगर किसी दल ने महिलाओं को राजनीति में भागीदारी देने का निर्णय लिया है तो यह अच्छा कदम है। अवसर मिलना चाहिए। महिलाओं में टैलेंट की कमी नहीं होती है। उम्मीद है कि राजनीति में भी महिलाएं अपने आप को साबित कर सकेंगी।

जूडो खिलाड़ी गरिमा चौधरी

जूडो खिलाड़ी गरिमा चौधरी

रैली में सिर्फ झंडा उठाने के लिए नहीं हैं महिलाएं
मेरठ की ओलंपियन इंटरनेशनल जूडो खिलाड़ी गरिमा चौधरी कहती हैं कि राजनीति में महिलाओं को आगे बढ़ाना होगा। राजनीतिक दलों को समझना होगा महिलाएं केवल सभाओं में भीड़ बढ़ाने या रैली में झंडा उठाने के लिए नहीं हैं। बल्कि वो अहम पद भी बेहतर तरीके से संभाल सकती हैं।

डॉ. सोनिया तिवारी

डॉ. सोनिया तिवारी

महिलाओं की सुधरेगी स्थिति
कमला नेहरू कैंसर संस्थान प्रयागराज की कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. सोनिया तिवारी कहती हैं कि राजनीति में महिलाओं को भी आगे आने का मौका मिलना चाहिए। ये राजनीतिक दल का बेहतर कदम है। महिलाओं को सदन में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा तो निश्चित ही समाज में महिलाओं की स्थिति भी सुधरेगी। महिला प्रतिनिधि से महिलाएं अपनी समस्याएं खुलकर बता सकेंगी। सभी दलों को ऐसी पहल करने की आवश्यकता है।

राजरानी शर्मा शिक्षिका, समाजसेविका

राजरानी शर्मा शिक्षिका, समाजसेविका

यूपी को सेफ बनाने के लिए ये जरूरी कदम
मेरठ की पिंकिश फाउंडेशन की स्टेट हेड राजरानी शर्मा कहती हैं यूपी की सबसे बड़ी समस्या वुमेंस सेफ्टी है। अगर सरकारें चाहती हैं कि यूपी में महिलाएं सेफ हो तो यूपी की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ानी होगी। महिलाएं केवल भीड़ का हिस्सा न रहें, उन्हें अहम पद और जिम्मेदारी देनी होगी।

डॉ. सुरहीता करीम सीनियर सर्जन

डॉ. सुरहीता करीम सीनियर सर्जन

राजनीति से भी भेदभाव खत्म हो
गोरखपुर की सीनियर सर्जन डॉ. सुरहीता करीम कहती हैं कि सिर्फ एक दल ही क्यों। महिलाओं को राजनीति में आगे लाने की बात हर दल को सोचनी होगी। नारी सशक्तिकरण को इससे खास फायदा मिलेगा। हर किसी को बराबरी का हक और सम्मान मिलना चाहिए। चाहे वह राजनीति हो या दूसरे क्षेत्र।

शिखा गुप्ता मुरादाबाद

शिखा गुप्ता मुरादाबाद

मजबूत होगी महिलाओं की स्थिति
मुरादाबाद में एजुकेशन इंस्टीट्यूट की डायरेक्टर डॉ. शिखा के अनुसार राजनीति में महिलाओं के आने से उनकी स्थिति मजबूत होगी। महिलाओं में तेज निर्णायक क्षमता होती है। वह अपने दायित्वों के प्रति अधिक सजग होती हैं। वह राजनीति में महत्वपूर्ण पदों पर आएंगी तो इसका सीधा फायदा समाज को मिलेगा। सक्रिय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी एक सकारात्मक संकेत है।

काउंसलर डॉ. सीमा जैन

काउंसलर डॉ. सीमा जैन

40 फीसदी आरक्षण महिलाओं को दें
काउंसलर डॉ. सीमा जैन का भी मानना है कि चुनाव से पहले टिकट में हिस्सेदारी देने का फैसला सही है। वुमेन इंपावरमेंट सिर्फ नारेबाजी बनकर न रहे। पॉलिटिक्स में 40 परसेंट महिलाओं को हिस्सेदारी देनी चाहिए। अगर एक महिला घर चला सकती है तो देश भी चला सकती है।

आजमगढ़ की हिना देसाई

आजमगढ़ की हिना देसाई

निर्णायक पद पर महिलाओं को लाना होगा
आजमगढ़ की हिना देसाई गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स की पूर्व सचिव रही हैं। वह कहती हैं कि मैं मानती हूं जब महिलाएं निर्णयात्मक स्थिति में आएंगी। तभी हम एक अच्छा समाज बना सकते हैं। मैक्सिको में आज से 15 साल पहले यह शुरूआत हुई थी। राजनीति में महिलाओं की 50 फीसदी भागीदारी दी गई। इसका परिणाम आज विश्व के सामने है। आज मैक्सिको की महिलाएं राजनीति में निर्णायक पदों पर भूमिका निभा रही हैं।

डॉ. अमृत गुप्ता

डॉ. अमृत गुप्ता

महिलाओं की स्थिति में सुधार आएगा
वाराणसी में राजनीति शास्त्र की प्रवक्ता डॉ. अमृता गुप्ता कहती हैं जिस तरह हर क्षेत्र में महिलाएं आगे आ रही हैं। राजनीति में भी महिलाओं की भागीदारी के लिए एक अच्छा मौका है। महिला आरक्षण बिल के लिए भी एक ही दल ने कदम उठाया था। जबकि सदन में दूसरे दल ने उस बिल को आज तक लटकाए रखा है। इससे निश्चित तौर पर महिलाओं की स्थिति में सुधार होगा।

बरेली की पूर्व महापौर सुप्रिया ऐरन भी मानती हैं कि यूपी की पॉलिटिक्स में महिलाओं की भागीदारी बढाने की जरूरत है। इससे महिलाओं की समाज में मौजूदा स्थिति और मजबूत होगी।

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