Thursday, December 2, 2021
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राजस्थान के राजभवन में गूंजा BHU का कुलगीत: वाराणसी के दीन दयाल पीठ की 17 किताबों का राज्यपाल कलराज मिश्र ने किया लोकार्पण


वाराणसी42 मिनट पहले

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BHU द्वारा प्रकाशित किताबों का लोकार्पण करते राज्यपाल कलराज मिश्र। - Dainik Bhaskar

BHU द्वारा प्रकाशित किताबों का लोकार्पण करते राज्यपाल कलराज मिश्र।

आज राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के पं दीनदयाल दयाल पीठ द्वारा प्रकाशित 17 पुस्तकों का लोकार्पण किया। जयपुर स्थित राजभवन में कलराज मिश्र ने कार्यक्रम की शुरुआत पंडित मदन मोहन मालवीय और पं दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण से किया। राजस्थान राजभवन के इतिहास में पहली बार BHU का कुलगीत गाया गया। काशी का संपूर्ण परिचय कराने वाले इस गाने को सुन लोग स्तब्ध थे। लिहाजा मंच से बताना पड़ा कि इसे शांति स्वरूप भटनागर ने लिखा था। छात्र शुभम मिश्र और विवेक उपाध्याय ने कुलगीत प्रस्तुत किया। इसके बाद राज्यपाल ने 17 पुस्तकों का एक-एक कर लोकार्पण किया। इस दौरान BHU के प्रभारी कुलपति प्रो. वीके शुक्ल भी मौजूद थे।

राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि BHU के इन किताबों का लोकार्पण करना सुखद है। उन्होंने कहा कि पं दीनदयाल उपाध्याय पर मालवीय जी के सांस्कृतिक और धार्मिक चिंतन का गहरा प्रभाव पडा है। दीनदयाल जी के सानिध्य में रह कर कार्य करने का मुझे मौका मिला है। वे जितने साधारण थे उतने ही विशाल व्यक्तित्व के धनी थे। उनके विचार सर्वकालिक और भारत की सनातन संस्कृति का निचोड़ हैं। बताया कि दीनदयाल जी ने मानव मात्र की गरिमा को फिर से स्थापित कर एकात्म मानव दर्शन का सूत्रपात किया। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि राजस्थान के बुद्धिजीवी वर्ग BHU के दीनदयाल उपाध्याय पीठ के कार्यक्रमों में हर संभव सहयोग करेंगे।

राजस्थान के राजाओं ने BHU स्थापना में की मदद
अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. मोहन लाल छीपा ने कहा कि पं दीनदयाल उपाध्याय का राजस्थान से गहरा नाता रहा है। उनका शुरूआती जीवन यहीं पर बीता। पूर्व राज्य सभा सदस्य ओंकार सिंह लखावट ने कहा कि BHU ने दीनदयाल पर किताबों का प्रकाशन कर यह सिद्ध कर दिया कि उनके विचारों को अब हर जगह स्वीकारा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पं दीनदयाल के विचारों का विस्तार राजस्थान से ही हुआ। पं मदनमोहन मालवीय ने जिस BHU का का निर्माण किया उसमें राजस्थान के राजा-महाराजाओं की अहम भूमिका रही है। इसलिए यह कार्यक्रम इतिहास की याद दिलाता है।

कुलपति ने राज्यपाल को दिया धन्यवाद

कुलपति प्रो शुक्ल ने राज्यपाल का स्वागत किया और राजभवन में विश्वविद्यालय का कार्यक्रम संपन्न कराने का मौका देने के लिए राज्यपाल का आभार व्यक्त किया। पं दीनदयाल उपाध्याय पीठ के प्रभारी और सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रोफेसर कौशल किशोर मिश्र ने संचालन किया। लोकार्पण के दौरान वाराणसी से गए विकास राज, आकाश कुमार सिंह, प्रो. राजेश कुमार रावत, प्रकाशक राहुल गुप्ता मौजूद थे।

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