Saturday, May 8, 2021
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रामविलास का अंत तक नहीं छोड़ा चिराग ने साथ, राजनीति के महापर्व के बीच भी पिता के साथ रहे


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पटनाकुछ ही क्षण पहलेलेखक: अंजनी कुमार

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लॉकडाउन के दौरान चिराग पासवान ने अपने पिता की सेविंग करती हुई यह तस्वीर ट्विटर पर पोस्ट की थी।

  • एक बार पिता के लिए मंदिर में प्रार्थना करने गए
  • पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में भी एक ही बार हुए शामिल

लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के लिए यह बड़ा कठिन समय है। बिहार विधानसभा में उन्होंने अपने बूते चुनाव लड़ने की ठानी ही थी कि पिता रामविलास पासवान नहीं रहे। चिराग ने अपने पिता का अंतिम समय तक साथ नहीं छोड़ा। बीते दो महीने से, जब बिहार चुनावों की गहमागहमी शुरू हुई, तब भी वे एक आदर्श बेटे की तरह पिता के पास दिल्ली में ही मौजूद रहे। बीते 22 दिनों से जब पासवान की तबियत बिगड़नी शुरू हुई, उसके बाद से चिराग किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में नहीं गए। एक बार दिल्ली के महावीर मंदिर गए, जहां उन्होंने पिता के लिए प्रार्थना की।

बिहार चुनावों में पार्टी को अकेले दम पर उतारने का फैसला भी लिया लेकिन इस दौरान किसी भी राजनीतिक गतिविधि से दूर रहे। मीडिया से भी कभी बात नहीं की। इंटरव्यू-बाइट से दूर रहे। लगातार अस्पताल और घर के बीच जूझते रहे। इसी बीच पार्टी की आवश्यक गतिविधियों को भी चलाते रहे। महत्वपूर्ण बैठकों में औपचारिक तौर पर शामिल होते रहे। हां, सोशल मीडिया के माध्यम से अपने समर्थकों को पिता की बीमारी और स्वास्थ्य के बारे में जानकारी भी देते रहे।

निधन के बाद किया बेहद भावुक ट्वीट
रामविलास पासवान का निधन दिल्ली के एक्सकॉर्ट्स अस्पताल में हुआ है। पहले उनकी तबियत ज्यादा खराब होने की सूचना आई फिर रात 8 बजकर 40 मिनट पर चिराग पासवान ने एक भावुक ट्वीट किया, ‘पापा।।।।अब आप इस दुनिया में नहीं हैं।।।लेकिन मुझे पता है आप जहां भी हैं हमेशा मेरे साथ हैं। Miss you Papa।।।’ यह उनके दुनिया छोड़ने की आधिकारिक जानकारी भी थी।

कलमों का था शौक
रामविलास पासवान को लिखने-पढ़ने का बहुत शौक था। उन्हें कलम रखने का भी शौक था। उनके पास कलमों का अच्छा-खासा संग्रह था। जहां भी बढ़िया कलम दिखती, वे उसे अपने संग्रह का हिस्सा बना लेते। वह एक तरह का ड्रेस पहनते थे। कुर्ते के भीतर उनका सैंडो गंजी हमेशा झांकता रहता था। वह जाड़े में प्रिंस कोट पहनते थे। दाढ़ी और कपड़ा उनका एक ट्रेंड मार्क रहा। जब वह कुर्ता पहनते तो उनके पैरों में हमेशा सफेद रंग की चप्पल रहती।



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