Sunday, September 26, 2021
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राहत पैकेज बिहार के लिए राहत कम मुश्किल वाला ज्यादा: केंद्र के आर्थिक पैकेज पर व्यवसायी बोले-पहले से जो कर्ज लिया, वह चुकाना मुश्किल, नया लोन कहां से चुकाएंगे


पटनाकुछ ही क्षण पहले

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कोरोना के कारण बिहार सहित पूरे देश में बेपटरी पर्यटन उद्योग के लिए उम्मीद की किरण तीन दिन पहले ऐलान किया गया केन्द्र सरकार का 6 लाख 28 हजार करोड़ का वह पैकेज है, जिसमें पर्यटन उद्योग के लिए भी राहत देने की बात कही गई है। हालांकि, बिहार के लिए यह पैकेज राहत कम, मुश्किल देने वाला ज्यादा है। वजह यह है कि इस राहत पैकेज का फायदा बैंकों से कर्ज के रूप में मिलना है। बिहार के व्यवसायियों ने पहले ही ब्याज भुगतान को कोरोना काल की अपनी सबसे बड़ी मुश्किल बताया है। ऐसे में वो सवाल पूछ रहे हैं अब फिर कर्ज लिया तो चुकायेंगे कैसे?

कर्ज नहीं, आर्थिक मदद की मांग कर रहा पर्यटन उद्योग
पटना में विजय श्री होटल के मालिक गौरव झुनझुनवाला, लगभग 1 दशक से होटल चला रहे हैं। गौरव कहते हैं कि बीते 2 साल से होटल का मेनटेनेंस खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। पहले से कर्ज ले रखा है और कर्ज ले भी लिया तो चुकाउंगा कैसे? यह हाल सिर्फ गौरव का नहीं, बल्कि बिहार के ज्यादातर होटल व्यवसायियों का है। गौरव की तरह ज्यादातर व्यवसायी कोरोना संकट में बैंक आधारित मदद को नाकाफी मानते हैं। बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कुछ दिनों पहले ही सरकार को कर्ज से जुड़ी परेशानियों को लेकर एक पत्र भी लिखा था। चैंबर ने सरकार से ये मांग की थी कि सरकार की तरफ से बैंकों द्वारा ब्याज वसूली में राहत दिलाए जाए। चैंबर का कहना था कि कोरोना की मंदी के कारण व्यवसायी समय पर सूद चुकाने की हालत में नहीं हैं। यही वजह है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का 6 लाख 28 हजार करोड़ का देशव्यापी आर्थिक पैकेज भी व्यवसायियों को बहुत उत्साहित नहीं कर पाया। जाने-माने उद्योगपति सत्यजीत सिंह कहते हैं कि पर्यटन जैसे उद्योगों को सीधी मदद की जरूरत है।

ट्रैवल एजेंसियों को लिए आर्थिक पैकेज में नहीं कोई राहत
पर्यटन उद्योग से जुड़ा एक दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा है ट्रैवल एजेंसियों का। वित्तमंत्री ने जो आर्थिक पैकेज दिया है, उसमें पर्यटन क्षेत्र को 60 हजार करोड़ ऋण के रूप में दिया जाना है। इसमें होटल और रजिस्टर्ड टूरिस्ट गाइड के लिए लोन के जरिए राहत देने की कोशिश की गई है, लेकिन ट्रैवल एजेंसियों के हाथ खाली रह गए हैं। बिहार के तीन रजिस्टर्ड ट्रैवल एजेंसियों में एक इंडियन टूरिज्म ब्यूरो के प्रमुख राजेश कुमार कहते हैं कि हमारे लिए बिजनेस को जिंदा रखने का संकट खड़ा हो गया है। आलम यह है कि टूर पैकेज की पूछताछ से जुड़े फोन कॉल्स भी आने बंद हो गए हैं। राजेश कहते हैं ट्रैवल एजेंसियों के लिए कोई मदद नहीं होना निराशाजनक है।

मदद लेने में बैंकों का रुख सबसे बड़ा बाधक
बिहार जैसे राज्य के व्यवसायियों के लिए बैंकों का रुख भी एक बड़ी समस्या है। हालांकि, केन्द्र सरकार ने आर्थिक पैकेज के तहत मिलने वाले नए ऋण के लिए गारंटी का जिम्मा खुद लिया है, बावजूद इसके बैंकों के रुख को लेकर व्यवसायी आशंकित हैं। उनके आशंकित होने का कारण बैंकों के CD रेशियो को देखकर समझा जा सकता है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में बैंकों में डिपॉजिट बढ़कर तीन लाख 96 हजार 471 करोड़ रुपए हो गया। इसकी तुलना में इसी साल एक लाख 75 हजार 474 करोड़ रुपए का ही लोन बांटा गया। इस तरह CD रेशियो महज 46.40 प्रतिशत रहा। मतलब यह है कि बिहार में बैंक लोगों से डिपॉजिट लेने में जितनी तत्परता दिखाते हैं, उस अनुपात में लोन देने में उदारता नहीं दिखाते हैं। यही वजह है कि बैंकों के जरिए संचालित होने वालीं आर्थिक योजनाएं बिहार में जमीन पर पहुंचने में काफी मुश्किल होती हैं।

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