Thursday, September 23, 2021
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लक्ष्य 1 लाख का, वैक्सीन-डोज आधे से भी कम अवेलेबल: भागलपुर में 2 जुलाई को मेगा वैक्सीनेशन कैंप; 1 लाख का है लक्ष्य, वैक्सीन की डोज मात्र 51 हजार, अब कम करनी होगी वैक्सीनेशन सेंटर की संख्या


भागलपुर17 मिनट पहले

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भागलपुर का मेगा वेक्सिनेशन केंद्र। - Dainik Bhaskar

भागलपुर का मेगा वेक्सिनेशन केंद्र।

भागलपुर में 2 जुलाई को मेगा वैक्सीनेशन कैंप लगनी है। इसमें 1 लाख लोगों को वैक्सीन लगनी थी, लेकिन राज्य सरकार की ओर से जिले को मात्र 51 हजार वैक्सीन की डोज मिली है। इसके लिए तैयारियां भी पूरी थीं। जिले में 500 वैक्सीनेशन सेंटर तैयार थे, लेकिन अब इनकी संख्या घटानी पड़ेगी। मेगा वैक्सीनेशन कैंप में 50 फीसदी डोज ही लोगों को लग पाएगी। ये हम नहीं बल्कि भागलपुर के सिविल सर्जन कह रहे हैं। सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा ने बताया कि हमलोग मेगा वैक्सीनेशन कैंप लगाने वाले थे, लेकिन राज्य सरकार से जितनी वैक्सीन मांगी गई थी, उतनी उपलब्ध नहीं हो पाई है। इसलिए कैंप पर असर तो पड़ेगा।

इधर, वैक्सीनेशन में दिन-रात काम करने वाले डाटा ऑपरेटर आज से काम पर नहीं आएंगे। इस बाबत उन्होंने लिखित चिट्ठी भी जिला स्वास्थ्य समिति को दे दी है। भागलपुर में मेगा वैक्सीनेशन कैंप प्रभावित होगा।

50 फीसदी ही हो पाएगा वैक्सीनेशन
2 जुलाई को लगने वाले मेगा वैक्सीनेशन कैंप में लक्ष्य का 50 फीसदी डोज ही उपलब्ध हो पाया है | इस संबंध में भागलपुर के सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा ने बताया कि हमलोग मैगा कैंप लगाने वाले थे, लेकिन राज्य सरकार से जितनी वैक्सीन मांगी गई थी उतनी उपलब्ध नहीं हो पाई है। हमलोगों ने 1 लाख वैक्सीन की डोज मांगी थी पर हमें 51 हजार डोज ही मिल पाई है।

सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा।

सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा।

500 वैक्सीनेशन सेंटर अब नहीं बनेंगे
सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा ने बताया कि इस मेगा वैक्सीनेशन कैंप के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 500 टीकाकरण केंद्र बनाए जाने थे ताकि केंद्र पर जुटने वाली भीड़ का वैक्सीनेशन पर असर न पड़े। अब जब वैक्सीन की डोज ही हमें नहीं मिल पाई है, हमें टीकाकरण केंद्र की संख्या कम करनी पड़ेगी |

आज से डाटा ऑपरेटर नहीं करेंगे काम
इधर, भागलपुर में आज से डाटा ऑपरेटर काम नहीं करेंगे। जिला स्वास्थ्य समिति में कार्यरत डाटा ऑपरेटरों को पिछले 5 महीनों से सैलरी नहीं मिली है। इसके अलावा वे कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन उनपर ध्यान देने वाला कोई नहीं है। ना तो अस्पताल प्रबंधन और ना ही रिक्रूट करने वाली कंपनी ही इनकी सुन रही है। इसलिए अपनी मांगों के विरोध में वे गुरुवार से काम पर नहीं आएंगे। गुरूवार से कार्य नहीं करने की लिखित सूचना सिविल सर्जन को सौंपते हुए काम नहीं करने का निर्णय लिया है। इसका सीधा असर वैक्सीनेशन पर पड़ेगा।

5 महीने से है वेतन बंद
वैक्सीनेशन में दिन-रात काम कर रहे डाटा ऑपरेटरों का कहना है कि उन्हें फरवरी से वेतन नहीं मिला है। सैलरी नहीं मिलने की शिकायत को लेकर वे लगातार संबंधित पदाधिकारियों के ऑफिस के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोरे आश्वासन के और कुछ नहीं मिला।

भागलपुर में 70 डाटा ऑपरेटर
उन्होंने बताया कि जिलेभर में जिला स्वास्थ्य समिति के द्वारा कुल 70 डाटा आपरेटरों की तैनाती की गई है ताकि काम सुचारू ढंग से चल सके लेकिन फरवरी से लेकर अब तक इन्हें सैलरी नहीं मिली है, ऐसे में काम हो पाना मुश्किल है।

नहीं मिल रहा PFऔर ESI

उन्होंने बताया कि इन लोगों को अभी मात्र 10,230 रुपए मिल रहे हैं। इसके साथ न तो PF कट रहा है और न ही ESI की सुविधा ही उन्हें मिल रही है।

पहली कंपनी ने ऐसे किया दोहन

डाटा ऑपरेटरों ने बताया कि इनलोगों ने प्रभा सॉफ्टवेयर प्राइवेट कंपनी लिमिटेड के साथ 2014 से काम करना शुरू किया था। उस कम्पनी ने 18,496 रुपए प्रति माह देने का आश्वासन दिया था लेकिन भुगतान मात्र 8,800 रुपए का ही होता रहा। PF के लिए अकाउंट भी खोला गया था। इस दौरान कभी PF कटा तो कभी नहीं कटा और फिर कुल मिलाकर सारा PF कंपनी ने गुल कर दिए।

दूसरी कम्पनी भी कर रही दोहन

फिर सारे डाटा ऑपरेटर नए टेंडर के बाद सितंबर 2014 से उर्मिला इंटरनेशनल प्राइवेट कंपनी लिमिटेड के साथ जुड़े। उन्होंने बताया कि इनके साथ काम शुरू हुआ और वेतन के नाम पर अब 10,230 रूपये मिलने लगे, लेकिन इस कंपनी ने तो PFऔर ESI की चर्चा ही गुल कर दी |

इस समय से रुकने लगा वेतन

पीड़ित डाटा ऑपरेटरों ने बताया कि नवम्बर 2020 से ही वेतन बंद था। तब डाटा ऑपरेटरों ने एक अप्रैल 2021 को सामूहिक रूप से कार्य बंद कर दिया। काम बंद करने पर DSH के द्वारा इन लोगों को जल्द से जल्द भुगतान कराने का आश्वासन मिला और फिर दो महीने यानी दिसम्बर और जनवरी 2021 के वेतन का भुगतान किया गया। अब फिर फरवरी से वेतन बंद है।

रविवार को करते हैं फ्री में काम

उन्होंने बताया कि कंपनी हमें 26 दिन ही कार्य करने को कहती हैं, लेकिन भागलपुर का स्वास्थ्य प्रशासन इनलोगों से रविवार को भी काम लेती है। उसके लिए इन्हें अलग से पैसे भी नहीं दिये जाते हैं। नाम न छापने की शर्त पर डाटा ऑपरेटरों ने बताया कि हम लोगों से ये लोग कोरोना काल में भी जी जान झोंक कर 12-12घंटे काम लिए हैं। यहां तक कि रविवार को उस प्रचंड कोरोना काल में भी काम लिया गया और अभी भी काम लिया जा रहा है, लेकिन जब सैलरी, छुट्टी, और ओवरटाइम के पैसों की बात आती है तो हमारी कोई सुनने वाला नहीं होता है। उन्होंने बताया कि एक अप्रैल को सिविल सर्जन ने आश्वासन दिया था कि रविवार को किए गए कार्यों का भी भुगतान वह अपने स्तर से करेंगे लेकिन अब तक वह बातें आई और चली गई।

क्या कहती है कंपनी

इस बाबत उर्मिला इंटरनेशनल प्राइवेट कंपनी के जिला समन्वयक चंदन कुमार ने बताया कि हमारे द्वारा बिहार राज्य स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेज दिया गया है, जिसमें तीन महीने की सैलरी के लिए कहा गया है। जैसे ही सैलरी आएगा इन्हें उसका भुगतान कर दिया जाएगा।

क्या कहते हैं सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ उमेश शर्मा ने भास्कर को बताया कि बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति अभी भुगतान नहीं कर रही है। इसके लिए हमने अपनी तरफ से जिला स्वास्थ्य समिति को पत्र लिखा है ताकि इनका भुगतान किया जा सके। वहीं, रविवार को काम के भुगतान के संबंध में उन्होंने बताया कि रविवार और ओवरटाइम के पैसे हमारे द्वारा दिए जाएंगे, इसकी भी तैयारी की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मेगा वैक्सीनेशन कैंप प्रभावित नहीं होगी। हमलोग बात कर रहे हैं जल्द ही इनके वेतन का भुगतान कर दिया जाएगा।

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