Wednesday, October 20, 2021
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लिंग भेदभाव रोकथाम को लेकर जागरूकता पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन


नई दिल्‍ली : लिंग भेदभाव रोकथाम के प्रति जागरूकता में युवा वर्ग का योगदान विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन प्रशिक्षण-वेबिनार का आयोजन किया गया. इसका अयोजन भागीदारी जन सहयोग समिति, राष्ट्रीय ख्यति प्राप्त स्वेच्छासेवी सामाजिक संस्था द्वारा लिंगयास विद्यापीठ एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर किया गया. कार्यक्रम में दिल्ली एवं हरियाणा की राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरणों की प्रमुख भागीदारी रही.

इस ऑनलाइन प्रशिक्षण-वेबिनार का उद्घाटन करते हुए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की सदस्या ज्योतिका कालरा ने कहा कि लैंगिक कि भावना पूरी तरह से हमारी सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक सोच से आती है. उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनकी आवश्यकता के अनुसार सुविधा देने एक नैतिकता एवं लैंगिक संवेदनशीलता है.

पंजाब पुलिस के महानिरीक्षक कौस्तुभ शर्मा ने कहा कि युवाओं के हिंसक और आक्रामक व्यवहार को रोकना अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि युवाओं से जुड़े अपराधों के मामलों को पुलिस द्वारा नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए .

युवा एवं खेल मंत्रालय की राष्ट्रीय सेवा योजना के निदेशक जितेंद्र चढ्ढा ने कहा कि युवाओं को ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के उद्देश्य के साथ मिलकर काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारतीय युवा जेंडर संवेदीकरण में मुख्य भूमिका निभाएगा.

चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट एवं जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण, कैथल के सचिव दानिश गुप्ता ने लैंगिक संवेदनशीलता में प्राधिकरण की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज का युवा खुशियों का प्रकाशस्तंभ है और इस लैंगिक पूर्वाग्रह के अंधकार हटकर सम्मान की रोशनी में हमें ले जा सकता है.

उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश की पुलिस महानिदेशक रेणुका मिश्रा ने कहा कि हमने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथान अधिनियम बनाया चाहिए, किन्तु आज भी बहुत सी महिलायें न्याय से वंचित है. उन्होंने कहा कि आज गांधी जी के तीन बंदर की सोच में बदलाव लाना होगा. बुरा होता देख चुप ना बैठकर एक जागरूक नागरिक की भूमिका निभानी होगी.

तकनीकी सत्र में अपने उद्घाटन भाषण में जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं दिल्ली राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सदस्य सचिव कंवलजीत अरोड़ा ने कानूनी साक्षरता को लैंगिक भेदभाव समाप्त करने का सशक्त माध्यम बताया और कहा कि हम शिक्षित होकर भी रूढ़िवादी सोच के शिकार है और आज भी लड़के एवं लड़की में भेदभाव रखते हैं. हमें मानसिकता को बदलने की जरूरत है, जो लड़के एवं लड़की के प्रति व्यवहार के भेदभाव को दूर कर सके.

किशोरों के मामलों की जांच में लैंगिक तटस्थता पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए दिल्ली पुलिस में सहायक आयुक्त पुलिस डॉ. गरिमा तिवारी ने कहा कि ऐसे मामलों में सुरक्षित वातावरण का होना आवश्यक है तथा किशोर की गरिमा का भी ध्यान रखना चाहिए.

हिमाचल प्रदेश की अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक डॉ. मोनिका भुतुंगुरु ने कहा कि परिवर्तन लाने के दो रास्ते हैं, पहला वह कानून जो परिवर्तन ला रहा है कानूनी रूप से और दूसरा सामाजिक रूप से परिवर्तन लाने से संबंधित है. आज सती प्रथा विलुप्त है, क्योंकि इसके खिलाफ कानूनी जनादेश लाया गया और समाज ने भी इसका समर्थन किया, लेकिन दहेज मांग के मामलों के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता है, जहां कानून होने के बावजूद यह अभी भी प्रचलित है. इसलिए, यदि हम हर बदलाव भविष्य में देखना चाहते हैं, तो हमे आज से अभियान शुरू करना चाहिए.

राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्या श्यामला एस. कुंदर ने तकनीकी सत्र के अपने अध्यक्षीय भाषण में महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा सर्वोपरि प्राथमिकता देने का आग्रह किया और कहा कि लैंगिक समानता महिलाओं के अधिकार को प्राप्त करने का सिद्धांत और मौलिक अवधारणा है तथा महिलाओं को समान अवसर प्रदान करना हमारे देश को गौरवान्वित करता है.

वहीं, दिल्‍ली के महिला एवं बाल विकास विभाग के मंत्री मुख्य अतिथि राजेंदर पाल गौतम ने लैंगिक संवेदीकरण में युवाओं की सबसे बड़ी भूमिका बताते हुए अपराध के बढ़ते मामले को जेंडर के प्रति जागरूक न होने का सबसे बड़ा कारण बताया. उन्होंने वेबिनार दर्शकों द्वारा प्राप्त अच्छे सुझाव पर अमल लाने का आश्वासन देते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग, दिल्ली सरकार के साथ गैर सरकारी संगठनों और विभिन्न अन्य संगठनों के साथ मिलकर काम का निमंत्रण भी दिया.

कार्यक्रम के मॉडरेटर एवं भागीदारी जन सहयोग समिति के महासचिव विजय गौड़ ने बताया कि कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र एवं तकनीकी सत्र में स्वागत भाषण लिंगयास विद्यापीठ के सलाहकार डॉ. राजेंदर धर एवं सुभारती यूनिवर्सिटी के कुलपति ब्रिगेडियर प्रोफेसर डॉ. वीपी सिंह ने दिया.

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