Friday, April 16, 2021
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वायरस, वैक्‍सीन, मेडिसिन और फिल्‍में: अद्भुत संयोग


मुंबई. पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Epidemic) के प्रकोप से प्रताड़ित है. कोरोना चीन के वुहान से दुनिया में दाखिल होता है, तेजी से फैलता है. ठंडा पड़ता है, फिर फैलता है फिर कमजोर पड़ता है. एक बार फिर नए और ज्‍यादा विकराल रूप में सामने आता है. इस बार चीन की जगह लेता है ब्रिटेन. कोरोना का यह नया वेरिएंट पहले ब्रिटेन को अपने आगोश में लेता है और यूरोप में पैर पसारकर पूरी दुनिया को एक नई दहशत में डाल देता है. कोरोना वायरस का यह नया स्‍ट्रेन कई देशों में हड़कंप मचाता है, मचा रहा है.

कोरोना अपने शवाब पर है. दवा लापता है, वैक्‍सीन कब आएगा कहना मुहाल है. फिल्‍मी भाषा में कहें तो विलेन गर्राता फिर रहा है और हीरो नदारद है. ऐसे मे कुछ फिल्‍मों की याद आती है. जिन्‍होंने इस वायरस और इससे फैली महामारी के बारे पहले ही बता दिया था. उन्‍होंने मानो फ्युचर में पहले ही प्रवेश कर लिया था. एक फिल्‍म ने तो मानो 2020 के हालात का खाका 2011 में ही सटीक तरीके से पूरी तरह खींच कर रख दिया था. यह फिल्‍म थी 2011 में रिलीज़ कंटेजन. इसके बाद नंबर आता है मिशन इम्‍पासिबिल 2 (2000) का, फिर मूनरेकर ( 1975) का और अंत में नाम आता है ट्रांसपोर्टर 2 (2005) का.

स्‍टीवन सोडनवर्ग द्वारा निर्देशित और स्‍कॉब्‍ जेड बर्न्‍स द्वारा लिखित कंटेजन एक अमरीकी थ्रिलर फिल्‍म थी. यह फिल्‍म कोरोना के वर्तमान दौर से इस हद तक मिलती है कि इस अद्भुत संयोग को देखकर दिमाग चकरघन्‍नी की तरह घूमने लगता है. तय करना मुश्किल हो जाता है कि 2020 के वर्ष को पहले आया माना जाए कि 2011 को. बहरहाल हम इसकी बात नहीं करेंगे क्‍योंकि इस पर हाल ही में बहुत ज्‍यादा लिखा, पढ़ा और सुना जा चुका है. हम कुछ दूसरी फिल्‍मों की बात करेंगे. मुख्‍य रूप से बात करेंगे टॅाम क्रूज की ब्‍लॉक बस्‍टर मूवी मिशन इम्‍पासिबिल सीरीज़ की 2000 में रिलीज़ ‘मिशन इम्‍पासिबिल 2’ की. 1979 में रिलीज़ जेम्‍स बांड सीरीज़ की मूवी मूनरेकर का विषय भी इससे मिलता जुलता था. मूनरेकर कुछ लोगों की कहानी है, ये लोग एक ऐसा रसायन गैस फार्म में बनाते हैं जो दुनिया से मनुष्‍य प्रजाति को नष्‍ट कर सकता है, लेकिन उसका असर पेड़-पौधों और वनस्‍पति तथा जानवरों पर नहीं होता. ये लोग कई दर्जन वैज्ञानिक रूप से परिपूर्ण युवा पुरूषों और महिलाओं को अंतरिक्ष स्‍टेशन तक पहुंचा देते हैं. ये लोग वहां तब तक रहेंगे जब तक पृथ्‍वी मानव जीवन के लिए सुरक्षित न हो जाए. उनके वंशज नए मास्‍टर रेस के बीज होंगे. मानव की इस नई जनरेशन से ये लोग ऐसी नई दुनिया बसाना चाहते हैं. जिन पर उनका कंट्रोल रहे. यानि गैस के
यह फिल्‍म विज्ञान लेखक इयान फ्लेमिंग के उपन्‍यास पर आधारित थी. इसमें रोज़र मूर बॉण्‍ड की भूमिका में थे. इसी तरह 2005 में बनी फिल्‍म ट्रांसपोर्टर 2 अंग्रेजी भाषा में बनी फ्रेंच फिल्‍म थी. इसमें भी बिना सवाल किए कंसाईंनमेंट को एक जगह से दूसरी जगह भेजने वाले एक पात्र के साथ एक खतरनाक वायरस के भेजा जाता है. ये तो हुई फिल्‍मों की बात लेकिन इस आलेख में हम ‘मिशन इम्‍पासिबिल 2’ यानि एमआई 2 की बात ही खास तौर पर करेंगे. ये मूवी कोरोना वायरस से जुडे़ कुछ सवालों को हमारे सामने खड़ी करती है. एमआई सीरीज़ की सभी फिल्‍में बहुत रोचक और मनोरंजन से भरपूर थ्रिलर फिल्‍में रही हैं. एमआई 2 भी बहुत इंटरेस्टिंग मूवी है. इसकी कहानी भी दिलचस्‍पी से भरपूर है.

कहानी कुछ यूं है. शुरूआत में डॉक्‍टर निकोल्विस को बायो साइट कंपनी की लैब में दिखाया जाता है. दर्शक को पता चलता कि डॉक्‍टर एंटी बॉयोटिक बनाने पर रिसर्च कर रहे हैं. इस दौरान उनसे गलती से कायमेरा (CHIMERA) नाम का बेहद खतरनाक वायरस बन जाता है. डॉक्‍टर अपनी रिसर्च जारी रखते हैं और अंतत: वे इस वायरस का एंटी डोज़ खोज लेते हैं. जिसका नाम वो बेलेरोफोन रखते हैं. इस रिसर्च के बारे में जब बायोटेक कंपनी के मालिक मेकलॉय को जानकारी मिलती है तो उसके दिमाग़ में एक षड़यंत्रकारी प्‍लान आता है. वह चाहता है कि पहले कायमेरा वायरस को पूरी दुनिया में फैला दिया जाए और बाद में इसका इलाज करने वाली मेडीसन बेलेरोफोन को बेच कर भरपूर कमाई की जाए. इस बात से डॉक्‍टर परेशान हो जाते हैं और वो इस वायरस को अपने शरीर में इंजेक्‍ट कर लेते हैं.

शरीर में इंजेक्‍ट इसलिए करते हैं क्‍योंकि कायमेरा वायरस को एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान पर ट्रेवल करने के लिए किसी मानव शरीर की जरूरत पड़ती है. यही इसका एकमात्र केरियर है. कायमेरा से बचने के लिए मरीज़ को 20 घंटे के भीतर एंटीडोज़ दिया जाना जरूरी है. डाक्‍टर अपने साथ इसकी दवा बेलेरोफोन भी चुराकर अपने घर ले आते हैं. इसके बाद टॅाम क्रूज़ की एंट्री होती है जिसका नाम है ईथन हंट.
ईथन डॉक्‍टर का भरोसेमंद दोस्‍त है, जो इम्‍पासिबिल मिशन फोर्स यानि आईएमएफ में काम करता है. डॉक्‍टर उसे एक वीडियो मेसेज भेजते हैं.मेसेज में डाक्‍टर कहते हैं ‘जब हम एक नायक की खोज करते हैं, तो एक खलनायक भी पैदा करते हैं. ऐसा मेरे साथ भी हुआ है. उस खलनायक का नाम है कायमेरा वायरस. मैं सिडनी से अटलांटा जा रहा हूँ तुम मुझे सिडनी में मिलो. ताकि हम साथ में एटलांटा जा सकें. मेरे पास 20 घंटे से ज्‍यादा समय नहीं है.
अगले दृश्‍य में डाक्‍टर को ईथन हंट के साथ एक प्‍लेन में सफर करते दिखाया जाता है. जहां वे उसे पूरा किस्‍सा बताते हैं. तभी फ्लाइट के केप्‍टेन की आवाज सुनाई देती है जिसमें वो यात्रियों से अनुरोध करता है कि हम जिस ऊंचाई पर उड़ रहे हैं वहां आक्‍सीजन की कमी है अत: सभी यात्री आक्‍सीजन मास्‍क पहन लें.

डाक्‍टर इस बात से परेशान हो जाते हैं. वे ईथन से कहते हैं पता करो क्‍या हो रहा है. ईथन उन्‍हें आश्‍वस्‍त करता है और पायलट केबिन में जाता है. वहां दिखाया जाता है कि केप्‍टेन मुस्‍कुराते हुए प्‍लेन चला रहा है और को पायलट बेहोश पड़ा हुआ है. इधर सभी यात्री आक्‍सीजन मास्‍क पहन लेते हैं डाक्‍टर अज्ञात भय के कारण मास्‍क नहीं पहनता. मास्‍क पहनने के बाद सभी यात्री बेहोश हो जाते हैं. डाक्‍टर ये देखकर दहशत में आ जाता है. तभी उसे ईथन आता दिखाई देता है, उसके साथ पायलट भी है दौनों निश्चिंत नज़र आ रहे हैं. डॉक्‍टर निकोल्‍विस कुछ करें इसके पहले ही ईथन उन्‍हें मार देता है. तथा उसके पास रखा बैग अपने कब्‍जे में ले लेता है इस बैग में कायमेरा की दवा है.

अब ईथन अपने चेहरे से मास्‍क उतारता है. पता चलता है यह आईएमएफ में काम करने वाला ईथन का सहयोगी शीन एम्‍ब्रोस है. जिसे आईएमएफ ने खुद उसे ईथन के वेश में भेजा है. क्‍योंकि डॉक्‍टर निकोल्विस सिर्फ ईथन से मिलना चाहते थे और ईथन हंट से संपर्क नहीं हो पा रहा था. शॉन एम्ब्रोस कायमेरा और बेलेरोफोन के सहारे अकूत धन कमाने के लालच में आईएमएफ से चीट करता है. प्‍लेन का पायलट एम्ब्रोस का सहयोगी है. और उसके साथ षड़यंत्र में शामिल है. एम्‍ब्रोस और उसके साथी प्‍लेन को क्रेश कर देते हैं और खुद पैराशूट से कूद जाते हैं.

आईएमएफ वाले छुट्टी मना रहे ईथन हंट को ढूंढकर उसे मेसेज देते हैं ‘तुम्‍हारे लिए एक मिशन है इसमें तुम्‍हें एक वायरस को ढूंढना है जिसका नाम कायमेरा है. इस मिशन में तुम अपने साथी चुन सकते हो. लेकिन उनमें एक नाम जरूर शामिल करना पड़ेगा, जिसका नाम नाया नार्डाफ हाल है. वो एक पेशेवर चोर है और एम्‍ब्रोस की एक्‍स गर्ल फ्रेंड है. ध्‍यान रहे हमेशा की तरह ये शर्त यहां भी लागू रहेगी कि अगर तुममें से कोई पकड़ा गया तो सरकार तुममें से किसी की भी जिम्‍मेदारी नहीं लेगी.’

नाया एक एक्‍जीब्‍युशन में कीमती हार चुराने जाती है. जहां ईथन भी पहुंच जाता है. नाया हार चुराते हुए पकड़ ली जाती है. सिक्‍युरिटीज़ से अपने संपर्कों का इस्‍तेमाल कर ईथन उसे बचा लेता है. वह नाया को अपने मिशन में शामिल होने के लिए कहता है, मनाता है, नाया नहीं मानती और वहां से निकल जाती है. एक पहाड़ी पर कार में घूमते हुए ईथन उसे समझाता है कि तुम एक मशहूर चोर हो और पूरी दुनिया की पुलिस तुम्‍हारे पीछे पड़ी है. मैं तुम्‍हें इन सबसे आसानी से छुटकारा दिलवा सकता हूं. अंतत:नाया ईथन के मिशन में शामिल होने के लिए मान जाती है.

नाया का मिशन में शामिल होना इसलिए जरूरी होता है क्‍योंकि वह एम्‍ब्रोस की पूर्व गर्ल फ्रेंड रह चुकी है. एमआईएफ ओर ईथन को वायरस और इसके इलाज के बारे में कुछ पता नहीं है. उन्‍हें बस इतना पता है कि एम्‍ब्रोस ने अपनी संस्‍था एमआईएफ के साथ जो धोखा किया है वह किसी बड़ी लालच के कारण किया है. लेकिन इससे एम्‍ब्रोस का फायदा कैसे पहुंचने वाला है वो कैसे पैसे कमाने वाला है यह पता नहीं है. नाया का यही पता लगाना है.

इसके बाद फिल्‍म रोचक तरीके से आगे बढ़ती है. नाया के सहारे ईथन एम्‍ब्रोस का प्‍लॉन जान लेता है. क्‍लाईमेक्‍स में एक नाटकीय घटनाक्रम में नाया अपने शरीर में कायमेरा वायरस इंजेक्‍ट कर लेती है ताकि एम्‍ब्रोस उसे गोली ना मार सके. एम्‍ब्रोस नाया को सिडनी शहर के भीड़ वाले इलाके में छोड़ देता है ताकि 20 घंटे में नाया मर जाए ओर वायरस सिडनी के सहारे पूरी दुनिया में फैल जाए. ताकि एम्‍ब्रोस अपने पास मौजूद वायरस की दवा मनमाने दाम पर बेच सके.हीरो न सिर्फ नाया को बचाता है बल्कि दुनिया को कायमेरा वायरस से निज़ात भी दिलाता है. तो ये थी कहानी एमआई 2 की.

अब बात कोरोना वायरस और वैक्‍सीन की. एमआई 2 का डायलाग दोहराएं तो कहेंगे कि जब हम एक नायक की खोज करते हैं तो एक खलनायक भी पैदा करते हैं. 2020 बीतने को है और दुनिया के सबसे बड़े खलनायक कोरोना से जंग जीतने के‍ लिए एक योद्धा की एक नायक की खोज की जा रही है जिसे हम वेक्‍सीन के नाम से पुकारते हैं. आज तक अनेक बीमारियों के वैक्‍सीन बने अनेकानेक ऐसी भी हैं जिनके नहीं बन पाए. अब तक वैक्‍सीन बनाने में 28 से लेकर 11 साल तक का समय लगा है. एक मात्र इबोला ऐसी बीमारी है जिसका वैक्‍सीन सबसे कम समय यानि चार साल में तैयार किया गया. इसके अलावा डेंगू का वैक्‍सीन साढ़े पांच साल में तैयार जरूर हुआ था लेकिन उसे वापिस लिया गया और अभी तक दोबारा बन नहीं पाया है. वापस इसलिए लिया गया क्‍योंकि इसके साइड इफेक्‍ट ओरिजनल बीमारी से ज्‍यादा घातक थे. सास से 10 फीसदी मौत हो जाती थी 2003 में आया चीन से निकला सास और कोरोना एक ही फैमिली से है. 17 साल में सॉस की वैक्‍सीन नहीं बन पाई, लेकिन हम दुआ करते हैं कोरोना वैक्‍सीन एक अपवाद साबित होगा और यह सबसे कम समय में सफल वैक्‍सीन बनने का रिकार्ड भी बनाएगा. उम्‍मीद है कोरोना का वैक्‍सीन ना सिर्फ जल्‍द आएगा बल्कि इस महामारी से देश और दुनिया को जल्‍द निज़ात भी दिलाएगा.

चलते चलते एक बेहद दिलचस्‍प जानकारी. पिछले चार सौ साल में हर सौवें साल में एक महामारी आई है. 1720 में द ग्रेट प्‍लेग ऑफ मार्शले आया. मार्शले फ्रांस का एक शहर है, जहां से यह फैला. एक लाख जानें गईं. 1820 में एशियाई देशों में हैजा यानी कालरा फैला, जिसमें एक लाख से ज्‍यादा लोग मारे गए. 1918 से 1920 के दौरान स्‍पेनिश फ्लू आया, जिसमें पांच करोड़ जानें गईं. अब 1920 में कोरोना. यानी हर सौवें साल में एक महामारी दुनिया में आती है. वो साल भी 20 होता है, 1720, 1820, 1920 और अब 2020. कैसा अजीब इत्‍तेफाक है. अच्‍छा तो नहीं है, लेकिन क्‍या किया जाए. ये प्रकृति का निर्णय है.

ब्लॉगर के बारे में

शकील खानफिल्म और कला समीक्षक

फिल्म और कला समीक्षक तथा स्वतंत्र पत्रकार हैं. लेखक और निर्देशक हैं. एक फीचर फिल्म लिखी है. एक सीरियल सहित अनेक डाक्युमेंट्री और टेलीफिल्म्स लिखी और निर्देशित की हैं.

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