Tuesday, November 30, 2021
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शर्मनाक: दाने-दाने को मोहताज परिवार ने एक ही चिता पर किया तीन सगी बहनों का अंतिम संस्कार, ट्रेन के आगे कूदकर दी थी जान


सार

जौनपुर के बदलापुर क्षेत्र में आर्थिक तंगी से परेशान होकर तीन सगी बहनों ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी थी। शनिवार को तीनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। कोई भी जनप्रतिनिधि पीड़ित परिवार की सुध लेने नहीं पहुंचा। 

मृतक बहनों के घर पर जुटी महिलाएं
– फोटो : अमर उजाला

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यूपी के जौनपुर जिले में ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी करने वाली तीन सगी बहनों का अंतिम संस्कार शनिवार को रामघाट पर किया गया। दाने-दाने के लिए मोहताज परिवार के पास दाह संस्कार तक के लिए पैसा नहीं था। इतना ही नहीं, जिम्मेदारों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। आखिर में रिश्तेदारों की मदद से एक ही चिता पर तीनों का शव रखकर अंतिम संस्कार किया गया। भाई गणेश ने मुखाग्नि दी तो मौजूद रिश्तेदारों की आंखें नम हो गईं।

महराजगंज थाना क्षेत्र के अहिरौली गांव निवासी निवासी प्रिती (16), आरती (14) और काजल (11) ने बदलापुर थाना क्षेत्र के फत्तूपुर रेलवे क्रासिंग पर गुरुवार रात ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी कर ली थी। शुक्रवार को शवों का पोस्टमार्टम किया गया। गरीबी का आलम ये रहा कि परिजनों के पास शवों के घर ले जाने के लिए भी पैसे नहीं थे। 

परिवार से जुड़े लोगों के मुताबिक रिश्तेदारों की मदद से 600 रुपये में एक एंबुलेस तय किया गया। शनिवार को शवों को रामघाट ले जाया गया। जहां रिश्तेदारों ने लकड़ी की व्यवस्था की और एक ही चिता पर तीनों सगी बहनों का अंतिम संस्कार किया गया। 
पढ़ेंः तीन सगी बहनें ट्रेन के आगे कूदीं: मां देख नहीं सकती, नौ साल पहले पिता की मौत, गरीबी से परेशान था परिवार

वहीं, शनिवार को गांव में मातमी सन्नाटा पसरा रहा। तीन-तीन मौत के बाद भी गांव में कोई जनप्रतिनिधि शोक जताने नहीं पहुंचा। दूसरी ओर नेत्रहीन मां आशा देवी अपनी बेटियों के लिए तड़प रही थीं। बहन रेनू और ज्योति का रो-रोकर बुरा हाल है।

घर में दाना-पानी और एक फूटी कौड़ी नहीं
रेनू यह बताते हुए रो पड़ी कि कुछ दिन पहले बहन प्रीती ने मुझे फोन किया था। बता रही थी कि घर में दाना-पानी और एक फूटी कौड़ी नहीं है। कैसे पांच परिवार की व्यवस्था की जाए। वह यह बताते हुए रो रही थी। कह रही थी कि मां अंधी है, किसके घर मजदूरी कंरू। वहीं दूसरी बहन ज्योति ने कहा कि हमसे बात ही नहीं होती थी। कभी-कभी हालचाल चचेरे भाई महेंद्र द्वारा मिल जाती थी।

पढ़ेंः खौफनाक कदम: जौनपुर में 3 सगी बहनों ने ट्रेन के आगे कूदकर दी जान

पीड़ित परिवार के घर संवेदना जताने पहुंचे महराजगंज के खंड विकास अधिकारी शशिकेश सिंह ने एक बोरी अनाज, कंबल व नकद सहायता दी। उन्होंने ग्राम प्रधान राकेश वर्मा व ग्राम पंचायत अधिकारी को मृत किशोरियों की मां आशा देवी को स्वीकृत आवास का छत शीघ्र बनवाने का निर्देश दिया। कार्यवाहक एडीओ (पंचायत) विजयभान यादव ने बताया कि आशा देवी के परिवार को लाल कार्ड देने का प्रस्ताव ग्राम पंचायत की बैठक में पारित कर भेजा जा चुका है।

मृत किशोरियों की मां आशा देवी का कृषि योग्य भूमि का पट्टा दिया जाएगा। इसके लिए प्रशासनिक स्तर से कवायद भी शुरू हो गई है। शनिवार को एसडीएम लाल बहादुर अहिरौली के दलित बस्ती में पहुंचे। आशा देवी  की दयनीय हालत देखकर कुछ आर्थिक सहयोग किया। साथ कृषि योग्य भूमि देने का भी आश्वासन दिया। अधूरे पीएम आवास को अतिशीघ्र पूरा कराने व नि:शुल्क राशन अंत्योदय कार्ड जारी  करने का निर्देश भी दिया। संबंधित कानूनगो हल्का  लेखपाल संदीप जायसवाल को कृषि आवंटन के लिए फाईल तैयार करने को कहा।

विस्तार

यूपी के जौनपुर जिले में ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी करने वाली तीन सगी बहनों का अंतिम संस्कार शनिवार को रामघाट पर किया गया। दाने-दाने के लिए मोहताज परिवार के पास दाह संस्कार तक के लिए पैसा नहीं था। इतना ही नहीं, जिम्मेदारों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। आखिर में रिश्तेदारों की मदद से एक ही चिता पर तीनों का शव रखकर अंतिम संस्कार किया गया। भाई गणेश ने मुखाग्नि दी तो मौजूद रिश्तेदारों की आंखें नम हो गईं।


महराजगंज थाना क्षेत्र के अहिरौली गांव निवासी निवासी प्रिती (16), आरती (14) और काजल (11) ने बदलापुर थाना क्षेत्र के फत्तूपुर रेलवे क्रासिंग पर गुरुवार रात ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी कर ली थी। शुक्रवार को शवों का पोस्टमार्टम किया गया। गरीबी का आलम ये रहा कि परिजनों के पास शवों के घर ले जाने के लिए भी पैसे नहीं थे। 

परिवार से जुड़े लोगों के मुताबिक रिश्तेदारों की मदद से 600 रुपये में एक एंबुलेस तय किया गया। शनिवार को शवों को रामघाट ले जाया गया। जहां रिश्तेदारों ने लकड़ी की व्यवस्था की और एक ही चिता पर तीनों सगी बहनों का अंतिम संस्कार किया गया। 

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