Saturday, May 8, 2021
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सुप्रीम कोर्ट के वो जज, जिन्होंने सेंट्रल विस्टा फैसला मामले में जाहिर की अलग राय


जस्टिस संजीव खन्ना (Justice Sanjeev Khanna) सेंट्रल विस्टा (Central Vista) मामले में अपनी अलग तरह की राय के कारण चर्चा में आए. (फाइल फोटो)

हाल ही में सेंट्रल विस्टा (Central Vista) मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया है. इस फैसले में जस्टिस संजीव खन्ना (Justice Sanjeev Khanna) अपने अलग राय की वजह से असहमत होने के कारण चर्चा में हैं.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    January 7, 2021, 12:01 AM IST

जस्टिस संजीव खन्ना (Justice Sanjeev Khanna) इन दिनों में चर्चा में हैं. उनका संबंध सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक फैसले से है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार (Central Government) के दिल्ली के लुटियन्स के सेंट्रल विस्टा (Central Vista) इलाके को फिर से विकसित करने के फैसले के पक्ष में निर्णय दिया है. यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने दिया है जिसमें जस्टिस खन्ना भी एक सदस्य थे. यह फैसला बेंच ने एकमत होकर नहीं दिया था बल्कि इस फैसले के बहुमत में जस्टिस खन्ना शामिल नहीं थे. जस्टिस खन्ना अपने इसी असहमति को लेकर चर्चा में हैं.

सभी मुद्दों पर असहमत नहीं थे जस्टिस खन्ना
ऐसा नहीं है कि इस मामले में जस्टिस खन्ना सभी मुद्दों पर अपने साथियों से असहमत थे. लेकिन कुछ खास वजहें रहीं थी जिनसे उन्होंने अपना निर्णय बेंच के निर्णय से अगल  रखा. अंतिम निर्णय की प्रति के तीसरे पैराग्राफ में जस्टिस खन्ना के उन असहमति वाले बिंदुओं का जिक्र है.

क्यों खास है सेंट्रल विस्टासेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट एक बहुत बड़ी कीमत वाला प्रोजेक्ट है जिसके पूरा होने पर मध्य दिल्ली का चेहरा पूरी तरह से बदल जाएगा.  यह एक ऐतिहासिक क्षेत्र है जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं इसके अलावा देश की सत्ता के गलियारे भी यहीं रहे हैं. यहां एक नए संसद भवन समेत राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट के बीच कई इमारतों के निर्माण की योजना है. नए संसद भवन के निर्माण की वजह से यह हाल ही में काफी सुर्खियों में आ गया है.

इस खास बात पर जताई थी आपत्ति
जस्टिस खन्ना ने जमीन के इस्तेमाल में बदलाव को लेकर आपत्ति जताई है. उनका कहना था कि  जन सहभागिता एक यांत्रिक क्रिया नहीं हो सकती या फिर निर्णय प्रक्रिया में एक औपचारिकता नहीं हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि आपत्ति और सलाह देने की हक में प्रस्ताव से संबंधी सुस्पष्ट और पर्याप्त जानकारी देने का हक भी शामिल होता है.

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सेंट्रल विस्टा (Central Vista) इलाके में बदलाव मध्य दिल्ली (Central Delhi) में आमूल चूल बदलाव ला सकता है. (फाइल फोटो)

यह सब नहीं हुआ
जस्टिस खन्ना का कहना है कि दिल्ली विकास एक्ट और दिल्ली विकास (मास्टर प्लान और जोनल विकास योजना ) नियम 1959 में मास्टर प्लान और जोनल डिवेलप प्लान बनाने की पूरी प्रक्रिया बताई है. इस प्रक्रिया के तहत प्रतिनिधित्व, सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद भी अंतिम योजना बनाई जा सकती है यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई और नहीं इसके लिए कोई नोटिस दिया गया.

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इस बात से सहमत नहीं हो सके
जस्टिस खन्ना का यह भी कहना है कि प्रस्तावित पुनर्विकास की सही तरह से घोषणा होनी चाहिए थी जिससे जनसहभागिता का सही नतीजा निकल पाता लेकिन यह केवल एक औपचारिकता ही मात्र रही. उन्होंने कहा कि यह एक छोटी मोटी योजना नहीं बल्कि सेंट्रल विस्टा का पूरा पुर्विकास कार्यक्रम है. केंद्र सरकार ने कहा कि सेंट्रल विस्टा का पुर्विकास मास्टर प्लान के चरित्र में बदलाव नहीं लाएगा, लेकिन जस्टिस खन्ना इससे सहमत नहीं हो सके.

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इस मामले में जस्टिस खन्ना (Justice Khanna) ने कई बारीकियों पर आपत्ति जताई है. (फाइल फोटो)

और ये कमियां भी 
जस्टिस खन्ना ने यह भी कहा कि इस मामले में विरासत संरक्षण कमेटी या हेरिटेज कन्जरवेशन कमेटी (HCC) की स्वीकृति नहीं ली गई. सेंट्रल विस्ता कमेटी के कई निर्णय और स्वीकृतियों पूर्वग्राह से ग्रसित थे. वहीं सुनवाई के दौरान लोगों को आपत्तियां दर्ज करने का पर्याप्त समय भी नहीं दिया गया.

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पहले भी सुर्खियों में रहे हैं जस्टिस खन्ना
उल्लेखनीय है कि दो साल पहले बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने उस समय दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस रहे संजीव खन्ना को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्‍त करने की सिफारिश करने का विरोध किया था. बार काउंसिल ने कॉलेजियम के इस फैसले को ‘सनकी और मनमाना’ करार दिया था. हालांकि बार ने यह भी कहा था उन्हें जस्टिस खन्ना से कोई शिकायत नहीं है. जस्टिस खन्ना पूर्व जस्टिस एचआर खन्ना के भतीजे हैं जिन्होंने इंदिरा गांधी के खिलाफ इस्तीफा दिया था.


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