Thursday, August 18, 2022
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सुविधा: एक मिस्डकॉल से टीबी के मरीजों को इलाज की सुविधा


बांकाएक घंटा पहले

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जिला यक्ष्मा कार्यालय बांका। - Dainik Bhaskar

जिला यक्ष्मा कार्यालय बांका।

  • केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने टीबी के मरीजों के लिए जारी किया टोल फ्री नंबर 1800-116666

भारत को 2025 में टीबी रोग से मुक्त करने को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस विषय को लेकर समाज के हर वर्ग को साझे प्रयास करने की जरूरत है। टीबी मुक्त भारत का सपना तभी साकार होगा जब सभी लोग मिलजुलकर टीबी को जड़ से खत्म करने में सहयोग करेंगे। भारत सरकार द्वारा टीबी की अधिक जानकारी के लिए टाेल फ्री नंबर 1800-116666 जारी किया गया है। जिसपर कोई भी व्यक्ति मिस्डकॉल करके टीबी के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय देश की सबसे गंभीर बीमारी समझी जाने वाली टीबी के इलाज में अब मोबाइल फोन की सहायता ले रही है। इसके लिए एक टोल फ्री नंबर पर कॉल करने के बाद टीबी के इलाज की सभी सुविधा मुहैया करायी जाएगी। जानकारी के अभाव में गंभीर रूप ले लेता है टीबी : ज्यादातर टीबी के मरीज गरीब तबके से आते है। जानकारी के अभाव में भी टीबी की बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। मिस्ड कॉल सेवा की मदद से इन्हीं मरीजों की पहचान करने और चिकित्सा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। नई सेवा स्वास्थ्य मंत्रालय को टीबी के कारण हो रहे दुष्प्रभावों के मामलों की शिनाख्त करने मे भी सहायता करेगा। प्रभारी जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. सोहेल अंजुम ने बताया कि टीबी की बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रही है। केन्द्र सरकार द्वारा अब नई सुविधा मुहैया करायी गयी है। मिस्डकॉल सुविधा से न सिर्फ मरीजों को सुविधा होगी, बल्कि विभाग को भी मदद मिलेगी कि कहां-कहां टीबी के मरीज हैं।

लगातार चलाया जा रहा है अभियान
टीबी के मरीजों की खोज के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में ग्रामीण स्तर पर आशा सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को लगाया गया है। मरीज खोजने वालों को भी प्रोत्साहन राशि दी रही है। बांका जिले में वर्तमान में कुल 712 टीबी के मरीजों का इलाज चल रहा है। टीबी के मामले ज्यादातर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। वहां के लोग अधिक मात्रा में पौष्टिक आहार नहीं ले पाते हैं। इस वजह से इस तरह का सहयोग टीबी मरीजों को मिलता है। डॉ. सोहेल अंजुम ने बताया कि टीबी मरीजों की जांच और इलाज तो मुफ्त में होता ही है। साथ में उन्हें पौष्टिक आहार के लिए 500 रुपए प्रतिमाह दिया जाता है, जबतक इलाज चलता है।

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