Monday, April 12, 2021
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स्कूल खोलने से नाखुश गार्जियन चिंतित: कोरोना के डर से अफसरों ने मीटिंग VC पर की, बच्चों पर काबू कहां कर सकेंगे स्कूल


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पटना36 मिनट पहले

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बेगूसराय की गुड़िया अपने बेटे के साथ और पटना की रितु चौबे। इनके साथ ही अन्य कई पेरेंट्स ने स्कूल खोलने के मुद्दे पर अपनी चिंताएं बताईं।

बिहार में स्कूल-कॉलेज खोलने का निर्देश जारी हो गया है। इसके साथ ही पेरेंट्स की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। सबसे ज्यादा चिंतित छोटे बच्चों के गार्जियन हैं। हाल ही में पटना के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहे छात्रों के कोरोना पॉजिटिव होने की खबर आई थी। पेरेंट्स का मानना है कि जब इतने बड़े लोग शिक्षण संस्थानों में कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं कर पाए, तो छोटे बच्चे कैसे करेंगे या स्कूल कैसे उनसे इन गाइडलाइंस का पालन करवाएंगे। पटना के ही निवासी और स्कूल जाने वाले दो छोटे बच्चों के पिता ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर सरकारी अधिकारियों की मीटिंग पर ही सवाल उठाये। उनका कहना था कि यह फैसला उस मीटिंग में किया गया है, जिसमें कोरोना से डरे अधिकारी खुद ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े थे। दैनिक भास्कर ने इन्हीं मुद्दों पर पटना सहित बिहार के कई जिलों के अभिभावकों से बात की है :

पटना के किदवईपुरी की रहनेवाली रितु चौबे कहती हैं – स्कूल और कोचिंग क्लास खोलने का फैसला असमंजस वाला है। सरकार का कहना है मुफ्त में मास्क दिया जाएगा, लेकिन इससे गाइडलाइन का पालन नहीं हो जाएगा। आज भी कोई सख्ती नहीं है। सरकार को चाहिए कि पहले कोरोना से लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाए। 4 तारीख से स्कूल खुल रहा है, ये अच्छी खबर तभी होगी जब इससे संक्रमण न बढ़े। अगर थोड़ी सी भी चूक हुई तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।

नैंसी कुमारी गृहिणी हैं। दो बच्चियों की मां हैं। बड़ी बेटी स्नेहा श्री पांचवीं और वंशिका पहली की छात्रा है। नैंसी कोरोना संक्रमण के फैलाव को देखते हुए अभी अपनी बच्चियों को स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं हैं। कहती हैं, अभी दोनों बेटियों को घर के बाहर भी नहीं निकलने देती हूं। स्कूल कितनी भी सावधानी बरत लें, घर जितना ध्यान नहीं रख सकते।

नैंसी कुमारी।

नैंसी कुमारी।

पटना के जीडी पाटलिपुत्रा स्कूल में गणित के शिक्षक संजीव कुमार कहते हैं – कोचिंग संस्थानों और स्कूलों पर काफी कम समय में बचे हुए कोर्स को पूरा करने का दबाव रहेगा। ऐसे में कोरोना गाइडलाइन का ठीक से पालन हो पाएगा या नहीं, इस पर संशय है। पटना के कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे हॉस्टल या लॉज में रहते हैं। कोचिंग खुलते ही वे पटना आ जाएंगे। ऐसे में भीड़ बढ़ेगी तो संक्रमण फैलने का खतरा रहेगा। स्कूलों में सैनिटाइजेशन इक्विपमेंट की भारी कमी है। बच्चे बार-बार बाथरूम में जाते हैं, नल को छूते रहते हैं। ऐसे में उन्हें संक्रमण से बचाने की चुनौती रहेगी।

पटना के निवासी विकास मैजरवार 11वीं में पढ़ने वाली सृष्टि के पिता हैं। कहते हैं – कोरोना का वैक्सीन दिलाए बगैर किसी भी क्लास के बच्चों के लिए स्कूल खोलना सही नहीं है।

नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड के नोडल अधिकारी डॉ. निपेंद्र आनंद के अनुसार स्कूलों में इस बात की लगातार मॉनिटरिंग करनी होगी कि बच्चे ज्यादा मूवमेंट न करें। अगर बच्चे ज्यादा मूवमेंट करेंगे तो संक्रमण का खतरा रहेगा। शिक्षकों के अलावा सपोर्टिंग स्टाफ जैसे, गार्ड, मेड, बस ड्राइवर आदि को भी ट्रेनिंग देनी होगी कि बच्चों से किस तरह संपर्क में रहें। अगर किसी बच्चे में सर्दी-खांसी या बुखार के लक्षण दिखें तो तुरंत उसे आइसोलेट कर परिवार को सूचित करें।

डॉ. निपेंद्र आनंद।

डॉ. निपेंद्र आनंद।

राजीव नगर के रहने वाले विवेक विश्वास कहते हैं – सुप्रीम कोर्ट का कहना है, कोरोना जंगल की आग की तरह फैल रहा है। सभी राज्यों को कहा गया है कि हर गाइडलाइन का सख्ती पालन किया जाए। ऐसे में बिहार सरकार के फैसले से बड़ा संकट है। यहां नियम का पालन पहले भी नहीं हो रहा था, अब तो और मुश्किल होगी। बस की स्थिति देख अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसे में कोचिंग और स्कूल से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। सरकार को पहले संक्रमण को लेकर जारी गाइडलाइन पर सख्ती से काम करना होगा।

विवेक विश्वास।

विवेक विश्वास।

बेगूसराय निवासी गीतांजलि का पुत्र हर्ष आरटीएस विद्यापीठ में तीसरी क्लास में पढ़ता है। वे कहती हैं – कोरोना के कारण स्कूल बंद होने से पिछले 9 महीने से घर पर बैठे बच्चे शिक्षा से विमुख हो चुके हैं। ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था शुरू की गई, लेकिन यह व्यवस्था सही नहीं थी। क्योंकि बच्चे मोबाइल हाथ में मिलते ही पढ़ाई से अधिक गूगल और यूट्यूब की ओर चले जाते थे। बीच-बीच में फोन आने पर बाधा भी होती थी। स्कूल खोलना सही निर्णय है। लेकिन हम अपने बच्चे को तभी स्कूल भेजेंगे जब कोरोना वायरस से बचाव की पूरी गारंटी होगी।

गीतांजलि।

गीतांजलि।

भागलपुर के कहलगांव की गुड़िया कहती हैं कि बच्चों का विद्यालय कोरोना वैक्सीन के आने तक नहीं खोला जाना चाहिए। क्योंकि बच्चे सामाजिक दूरी का पालन नही कर पाएंगे। हमेशा मास्क और सिनेटाइजर का इस्तेमाल करना भी उनके लिए सम्भव नहीं है। विद्यालय में सभी जगहों के लोगों से बचाया जाना भी सम्भव नहीं है। इस स्थिति में वैक्सीन आने तक बच्चे घर मे सुरक्षित रहेंगे।

बेगूसराय के मनीष और उनकी पत्नी काजल का कहना है कि उनके बच्चे शेमफोर्ड स्कूल में पढ़ते हैं। अभी तक वैक्सीन नहीं आया, फिर हम बच्चों को स्कूल क्यों भेजें। सरकार का यह गलत निर्णय है।

मनीष और काजल।

मनीष और काजल।

भागलपुर से सर्वेश कुमार का कहना है कि मेरे बच्चे डीएवी में वर्ग 4 और वर्ग 1 में हैं। जब बड़े लोग मास्क और सामाजिक दूरी का ख्याल नहीं रख पाते हैं तो बच्चे खुद का कितना ख्याल रख पाएंगे। इसलिए सरकार को इस फैसले पर विचार करते हुए एक जनमत लेना जरूरी है।

सर्वेश कुमार।

सर्वेश कुमार।

बेगूसराय के रौशन कुमार का कहना है कि जब तक कोविड-19 का वैक्सीन नहीं आ जाता है, तब तक तो डर बना ही रहता है। लेकिन बच्चों के भविष्य को भी तो अंधेरे में नहीं धकेला जा सकता है। वैक्सीन के आने तक इसका बंद रहना ही बेहतर उपाय है।

रौशन कुमार।

रौशन कुमार।



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