Sunday, January 23, 2022
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12 से 18 साल के बच्चों का व्यवहार वयस्कों जैसा, कोरोना से उनको सुरक्षित करना जरूरी: अरोड़ा


कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में भारत ने एक और कदम आगे बढ़ा दिया है। देश में तीन जनवरी से 15-18 साल के बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा। बच्चों के लिए टीकाकरण के ऐलान के बाद यह भी सवाल उठने लगा है कि उनके वैक्सीनेशन का यह सही समय है या नहीं। इन सब के बीच कोविड-19 टास्क फोर्स के चेयरमैन डॉ एनके अरोड़ा का बयान सामने आया है।

एनके अरोड़ा ने कहा कि 12 से 18 साल की आयु के बच्चे वयस्कों की तरह व्यवहार करते हैं। भारत में कोविड-19 से होने वाली मौतों में से लगभग दो तिहाई इसी आयु वर्ग हैं। इसलिए किशोरों को सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकता है। वे गतिशील (घूमते-फिरते रहते हैं) हैं और इसलिए उन्हें संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है।

वैक्सीनेशन के कार्यान्वयन में कोई विशेष प्रयास की आवश्यकता नहीं है। इन बच्चों का टीकाकरण विशेष तैयारी के साथ कम समय में शुरू किया जा सकता है। इनके लिए भी दो डोज के बीच में चार सप्ताह का समय पर्याप्त है। इनको भी टीके की डोज की आवश्यकता जवानों के समान ही है। 

बता दें कि ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) के वरिष्ठ महामारी विशेषज्ञ और अस्पताल में व्यस्कों और बच्चों पर हुए कोवैक्सीन ट्रायल के मुख्य जांचकर्ता ने सरकार के फैसले पर आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने सरकार के इस फैसले को अवैज्ञानिक बताते हुए कहा है कि इससे कोई अतिरिक्त फायदा नहीं होगा। डॉ. संजय के राय ने कहा कि फैसले पर अमल से पहले उन देशों के आंकड़ों का विश्लेषण करना चाहिए जिन्होंने पहले ही बच्चों का टीकाकरण शुरू कर दिया है।

कोविड-19 की तीसरी लहर की आशंकाओं और वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के देश में बढ़ते मामलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को घोषणा की कि अगले साल तीन जनवरी से 15 से 18 साल की आयु के बीच के किशोरों के लिए टीकाकरण अभियान आरंभ किया जाएगा। पीएम मोदी ने कहा, ’15 साल से 18 साल की आयु के बीच के जो बच्चे हैं अब उनके लिए देश में टीकाकरण आरंभ होगा। वर्ष 2022 में तीन जनवरी को इसकी शुरुआत की जाएगी।’





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