Tuesday, November 30, 2021
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20 साल में 1888 लोगों की हिरासत में मौत; सजा सिर्फ 26 पुलिसकर्मियों को: रिपोर्ट


नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) स्थित कासगंज (Kashganj) में 22 वर्षीय अल्ताफ की पिछले मंगलवार को हिरासत में मौत हो गई. उसे एक बालिग लड़की के लापता होने के मामले में हिरासत में लिया गया था. घटना के बाद कासगंज के कोतवाली थाने से पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया. उन्होंने दावा किया था कि अल्ताफ ने शौचालय में लगी पानी के पाइप का इस्तेमाल करते हुए अपने जैकेट के हुड में लगे फीते से खुद को फांसी लगा ली थी. यह शौचालय की पाइप जमीन से सिर्फ 2 फीट ऊपर थी. इस घटना के बाद एक बार फिर हिरासत में हुई मौतों और इन मामलों में हुई कार्रवाई लोगों के बीच चर्चा का विषय बन रही है.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वार्षिक अपराध (CII) की 2001 से साल 2020 तक की रिपोर्ट के अनुसार बीते 20 सालों में देश भर में पुलिस हिरासत 1,888 मौतें हुईं हैं. इन मौतों के बाद पुलिस कर्मियों के खिलाफ 893 मामले दर्ज किए गए और 358 कर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई. हालांकि अब तक सिर्फ 26 पुलिसकर्मी दोषी ठहराये गए.

एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार हिरासत में हुई मौतों के लिए अब तक सिर्फ साल 2006 में सबसे अधिक 11 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया गया. इस साल यूपी में सात और मध्य प्रदेश में चार दोषी पाए गए थे. अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के आंकड़ों के अनुसार साल 2020 में हिरासत में 76 मौतें हुईं, जिसमें गुजरात में सबसे अधिक 15 मौतें हुईं.

इस लिस्ट में जो अन्य राज्य हैं उसमें आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल शामिल है. साल 2017 से एनसीआरबी हिरासत में मौत के मामलों में गिरफ्तार पुलिसकर्मियों पर डेटा जारी कर रहा है. पिछले चार सालों में हिरासत में हुई मौतों के सिलसिले में 96 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है.

NCRB के अनुसार साल 2001 से अब तक हिरासत में हुई मौतों में 1185 मामले ऐसे हैं जिसमें शख्स रिमांड पर नहीं था. वहीं 703 मामलों में शख्स रिमांड में था. पिछले दो दशकों के दौरान हिरासत में हुई मौतों के संबंध में पुलिस कर्मियों के खिलाफ दर्ज 893 मामलों में से 518 उन लोगों से संबंधित हैं जो रिमांड पर नहीं थे.





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