Sunday, September 26, 2021
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Antarctic Glaciers Melting: अंटार्कटिक ग्लेशियर ‘पाइन आईलैंड’ पर बढ़ा संकट, पिघलने से बचाने वाली बर्फ की हो रही गायब


नई दिल्ली: पहले से ही नाजुक स्थिति वाला अंटार्कटिक का ग्लेशियर (Antarctica Glacier)और अधिक असुरक्षित प्रतीत होने लगा है. ऐसा इसलिए क्योंकि सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों में बर्फ की वह परत पहले के मुकाबले तेजी से टूटती हुई नजर आ रही है, जो इस ग्लेशियर (Antarctica Glacier) को पिघलाकर समुद्र में मिलने से रोकती है. एक नए अध्ययन में बताया गया है कि यह परत टूटते हुए विशाल हिमखंडों को जन्म दे रही है. ‘पाइन आईलैंड’ ग्लेशियर की बर्फ की परत का टूटना 2017 में तेज हो गया था.

वैज्ञानिकों की बढ़ी चिंता

इससे वैज्ञानिकों को चिंता सताने लगी थी कि जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर का पिघलना अनुमानित कई सदियों के मुकाबले बहुत जल्दी होगा. तैरती बर्फ की यह परत तेजी से पिघलते ग्लेशियर के लिए बोतल में एक कॉर्क के समान है और ग्लेशियर के बर्फ के बड़े हिस्से को महासागर में बह जाने से रोकती है (Ice Shelf Antarctica). अध्ययन के मुताबिक बर्फ की यह परत 2017 से 2020 के बीच ग्लेशियर से 20 किलोमीटर पीछे तक हट गई है.

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टाइम लैप्स से ली गईं तस्वीरें

ढहती हुई परत की तस्वीरें यूरोपीय सैटेलाइट से ‘टाइम-लैप्स’ वीडियो में ली गईं, जो हर छह दिन में तस्वीरें लेता है. टाइम लैप्स फोटोग्राफी तकनीक से लिए गए वीडियो को सामान्य गति पर चलाने से, समय तेजी से बीतता दिखता है. अध्ययन के प्रमुख लेखक, ‘यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन’ के ग्लेशियर विशेषज्ञ इयान जॉगिन ने कहा, ‘आप देख सकते हैं कि चीजें कितनी तेजी से टूट रही हैं. इसलिए यह बिलकुल ऐसा लगता है जैसे बर्फ का तेजी से टूटना अपने आप में ग्लेशियर (Glaciers of Antarctica) को कमजोर कर रहा है.’

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20 प्रतिशत हिस्सा गायब 

उन्होंने कहा कि अब तक हमने मुख्य परत का संभवत: 20 प्रतिशत हिस्सा गंवा (Antarctica Ice Shelf Who Protecting Glacier Breaking up Faster) दिया है. जॉगिन ने बताया कि 2017 से 2020 के बीच बर्फ टूटने की तीन बड़ी घटनाएं हुईं जिसमें आठ किलोमीटर लंबे और 36 किलोमीटर तक चौड़े हिमखंड उत्पन्न हो गए थे (Global Warming). जो बाद में बहुत से छोटे-छोटे हिस्सों में बंट गए. बर्फ टूटने की छोटी-छोटी घटनाएं भी हुईं. यह अध्ययन ‘साइंस एडवांसेस’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. इससे पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन कितना घातक होता जा रहा है.

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