Wednesday, October 20, 2021
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AstraZeneca के बाद Pfizer ‘बूस्टर’ से बन रही ज्यादा एंटीबॉडी, स्टडी में किया दावा


मेलबर्न: एस्ट्राजेनेका वैक्सीन (AstraZeneca Vaccine) के लिए पात्रता में बदलाव, कोरोना वायरस के नए वेरिएंट और सप्लाई में आ रही दिक्कत के बीच, बहुत से लोग सोच रहे हैं कि क्या वे Covid-19 की तमाम वैक्सीन को ‘मिक्स एंड मैच’ करके ले सकते हैं. यानी अगर पहली खुराक एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की ली तो दूसरी खुराक फाइजर (Pfizer) या किसी अन्य वैक्सीन की ले सकते हैं कि नहीं. इसे ‘बूस्टर’ भी कहा जा रहा है. इसके बारे में कई स्टडी के बीच, हाल ही में स्पेन और ब्रिटेन में कुछ आंकड़े जारी किए गए हैं, जो हुत आशाजनक हैं.

कुछ देशों में चल रही है ‘मिक्स एंड मैच’ डोज

अलग-अलग वैक्सीन की डोज लेने वालों पर की गई स्टडी के बाद जारी किए गए आंकड़े बताते हैं कि मिक्स एंड मैच शेड्यूल एक ही टीके की दो खुराक की तुलना में ज्यादा एंटीबॉडी स्तर दे सकता है. ऑस्ट्रेलिया के Drug regulator, थेरेप्यूटिक गुड्स एडमिनिस्ट्रेशन (TGA) ने अभी तक मिक्स एंड मैच Covid-19 टीकाकरण कार्यक्रम को मंजूरी नहीं दी है, कुछ देश पहले से ही ऐसा कर रहे हैं. तो यह कैसे काम करता है, और यह एक अच्छा विचार क्यों हो सकता है? दो वैक्सीन को लेने से क्या फायदा? इन सब सवालों के जवाब जानना जरूरी है.

क्या फायदा है?

मेलबर्न विश्वविद्यालय और जॉन हार्ट, मर्डोक चिल्ड्रन रिसर्च इंस्टीट्यूट की फियोना रसेल कहती हैं, यदि Covid-19 के वैक्सीनेशन कार्यक्रम में वैक्सीन के मिश्रण की इजाजत हो तो इससे सुविधा बढ़ेगी और एक सुविधाजनक टीकाकरण कार्यक्रम होने से वैश्विक आपूर्ति में आ रही रुकावटें कम होंगी. यदि किसी टीके की कमी है, तो इंतजार करने के लिए टीकाकरण कार्यक्रम बंद करने की बजाय दूसरा टीका देकर वैक्सीनेशन ड्राइव जारी रखी जा सकती है. यदि एक टीका वायरस के एक निश्चित प्रकार के खिलाफ दूसरे की तुलना में कम प्रभावी है, तो मिक्स एंड मैच शेड्यूल यह सुनिश्चित कर सकता है कि जिन लोगों को पहले से ही कम प्रभावी टीके की एक खुराक मिली है, उन्हें एक वैक्सीन के साथ बूस्टर मिल सकता है जो कि वायरस के उस वेरिएंट के खिलाफ ज्यादा प्रभावी होगा.

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इन देशों में दी जा रही सलाह

कुछ देश पहले से ही मिक्स एंड मैच वैक्सीन शेड्यूल का उपयोग कर रहे हैं, क्योंकि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के बारे में सिफारिशों को बदलने के बाद खून के थक्के जमने/ब्लीडिंग के मामले कम हो गए. यूरोप के कई देश अब युवाओं को सलाह दे रहे हैं कि इस वैक्सीन की पहली खुराक लेने के बाद अब उन्हें दूसरी खुराक के रूप में कोई दूसरा टीका लेना चाहिए. जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन, नॉर्वे और डेनमार्क जैसे तमाम देश आमतौर पर फाइजर जैसे एमआरएनए टीके के बाद ‘मिक्स एंड मैच’ टीकाकरण कार्यक्रम की सलाह दे रहे हैं.

क्या ये सुरक्षित है?

मई में लैंसेट में प्रकाशित यूके मिक्स एंड मैच स्टडी में, 50 वर्ष से अधिक उम्र के 830 लोगों को पहले फाइजर या एस्ट्राजेनेका के टीके लगाए गए फिर बाद में दूसरा टीका लगाया गया. इस प्रयोग के बाद यह पाया गया कि जिन लोगों ने दो अलग-अलग वैक्सीन ली, उनमें एक ही तरह की दोनों वैक्सीन लेने के बाद के हो रहे साइड इफेक्ट की अपेक्षा ज्यादा साइड इफेक्ट पाए गए. ठंड लगना, थकान, बुखार, सिरदर्द, जोड़ों में दर्द, अस्वस्थता, मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण आए हालांकि, ये समस्याएं बहुत जल्द खत्म हो गईं. शोधकर्ता अब यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या पेरासिटामोल के शुरुआती और नियमित उपयोग से ये साइड इफेक्ट कम हो सकते हैं. स्पेन में एक अन्य समान स्टडी (जिसकी अभी समीक्षा नहीं की गई) में पाया गया कि ज्यादातर साइड इफेक्ट हल्के और दो से तीन दिन तक थे, और एक ही टीके की दो खुराक लेने वालों के बराबर ही थे. 

क्या यह प्रभावी है?

स्पेन की स्टडी में पाया गया कि एस्ट्राजेनेका की शुरुआती खुराक के बाद, फाइजर बूस्टर प्राप्त करने के 14 दिनों के बाद लोगों में एंटीबॉडी का स्तर काफी अधिक था. ये एंटीबॉडी लैब टेस्ट में कोरोना वायरस को पहचानने और निष्क्रिय करने में सक्षम थे. पहले के टेस्ट के आंकड़ों के अनुसार, एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की दो खुराक लेने के मुकाबले फाइजर बूस्टर ज्यादा असरकारक रहा. फाइजर के बाद एस्ट्राजेनेका लेने के बाद की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है. कोविड-19 को रोकने में मिक्स एंड मैच शेड्यूल कितने प्रभावी हैं, इस पर अभी तक कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है लेकिन संभावना है कि इसके परिणाम अच्छे हो सकते हैं.

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