Friday, September 17, 2021
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Bank Privatisation पर बड़ी खबर! LIC और सरकार इस Bank में बेचेंगी 100 % हिस्सेदारी, मैनेजमेंट कंट्रोल भी ट्रांसफर


नई दिल्ली: Bank Privatisation: भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और सरकार (Government) जल्द ही अपनी पूरी हिस्सेदारी आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) में बेचने जा रही है. एलआईसी की 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को आर्थिक मामलों की कैबिनेट कंपनी की मंजूरी मिल गई है. डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने इसकी जानकारी दी. विभाग के अनुसार, आईडीबीआई बैंक में भारत सरकार और एलआईसी की हिस्सेदारी जल्द होने वाले ट्रांजैक्शन में बेची जाएगी. इसके अलावा मैनेजमेंट कंट्रोल भी ट्रांसफर किया जाएगा.

सेबी की गाइडलाइंस के तहत लगेगी बोली 

गौरतलब है कि एलआईसी की अभी आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) में कुल 49.24 फीसदी हिस्सेदारी है. वहीं, इस बैंक में सरकार की 45.48 फीसदी हिस्सेदारी है. बाकी 5.29 फीसदी हिस्सेदारी गैर-प्रमोटरों की है. अब सरकार और एलआईसी आईडीबाआई में अपनी 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने जा रही है. इसके लिए डीआईपीएम (DIPAM) ने बताया कि सेबी की गाइडलाइंस के तहत ओपन ऑफर के तहत बोली लगाई जाएगी.

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किसे होगी बोली की इजाजत 

डीआईपीएम ने बताया कि आईडीबीआई कैपिटल मार्केट्स भी ट्रांजेक्शन एंडवाइजर्स बनने के लिए बोली नहीं लगा सकेगी. इसके अलावा मर्चेंट बैंकर में 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी या नियंत्रण योग्य हिस्सेदारी रखने वाले व्यक्ति या कंपनी को भी आईडीबीआई बैंक के लिए बोली लगाने की इजाजत नहीं होगी. आपको बता दें कि शुक्रवार को आईडीबीआई बैंक के शेयर का भाव 3.19 फीसदी चढ़कर 38.80 रुपये पर बंद हुआ था.

बैंकों के प्राइवेटाइजेशन की योजना 

दरअसल एलआईसी ने जनवरी 2019 में आईडीबीआई बैंक में नियंत्रण हिस्सेदारी हासिल की थी. बैंक प्राइवेटाइजेशन के तहत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने 2021-22 के अपने बजट में ये स्पष्ट रूप से कहा था कि आईडीबीआई बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया चालू वित्त वर्ष में पूरी हो जाएगी. सरकार ने चालू वित्त वर्ष में अल्पांश हिस्सेदारी बिक्री और निजीकरण से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रखी है.

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पिछले महीने भी लगी थी बोली 

डीआईपीएम ने पिछले महीने आईडीबीआई बैंक में रणनीतिक बिक्री और प्रबंधन नियंत्रण के हस्तांतरण पर प्रबंधन और सलाह के लिए बोलियां मंगवाई थी. इनमें लेन-देन सलाहकारों और कानूनी फर्मों ने हिस्सा लिया था. कुल मिलाकर बैंकों के प्राइवेटाइजेशन का दौर शुरू हो चुका है. 

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