Tuesday, May 18, 2021
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Capitol hill violence: बार-बार कैसे ट्रंप पर एक्शन लेते रहे ट्विटर और एफबी?


अमेरिका की राजधानी में कैपिटल हिल पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  (US President Trump) के समर्थकों ने हिंसा को अंजाम दिया, तो इस​ हिंसा के समर्थन में ट्रंप ने सोशल मीडिया (Trump Social Media) का इस्तेमाल किया. नतीजा यह हुआ है कि ट्विटर ने न केवल ट्रंप के अकाउंट से पोस्ट किए गए ट्वीट हटाए, बल्कि 12 घंटों के लिए उनका अकाउंट ही बंद (Twitter Suspends Trump Account) कर दिया. बात और भी आगे बढ़ी और ट्रंप के एफबी और यूट्यूब अकाउंट भी सस्पेंड (FB Suspends Trump) किए गए. सोशल मीडिया और ट्रंप के बीच तनातनी पहले भी रही है, लेकिन अकाउंट सस्पेंड कर दिए जाने की नौबत पहले नहीं बनी.

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के समय भी ट्विटर ने ट्रंप के पोस्ट्स को लेकर कार्यवाही की कवायद की थी. यह भी ध्यान देने की बात है कि ट्रंप हमेशा से ही सोशल वेबसाइटों के खिलाफ रहे और उन्हें कुचलने की बात कहते रहे. ट्विटर ने ट्रंप के पोस्ट्स को लेकर जहां पहले भी कार्यवाहियां कीं तो पहले फेसबुक ने ऐसे मामलों में न पड़ने का रवैया ही अपनाया था. आइए ज़रा देखें कि कैसे चला सोशल मीडिया बनाम ट्रंप युद्ध.

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मेल-इन वोटिंग को लेकर हुआ विवादपहली बार जब ट्विटर ने ट्रंप के खिलाफ कोई कार्यवाही की थी, वह मेल-इन वोटिंग को लेकर भ्रामक स्थितियां पैदा करने का मामला था. ट्रंप ने इस तरह के आरोप लगाए थे कि डेमोक्रेटिक पार्टी मेल-इन वोटिंग के इस्तेमाल से वोटर फ्रॉड करने की कोशिश कर रही थी. ट्रंप ने इस बारे में लगातार ट्वीट किए थे. लेकिन तथ्यात्मक रूप से गलत कौन था?

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डोनाल्ड ट्रंप क्रिएटिव इलस्ट्रेशन.

इस मामले में ट्विटर ने पहली बार अनुशासनात्मक रवैया अपनाया और ट्रंप के ट्वीट्स को गलत बताया. फैक्ट चेक पॉलिसी अपनाते हुए ट्विटर ने ट्रंप के ‘फेक सूचना’ देने वाले ट्वीट्स को मार्क किया और अपने यूज़रों को सही फैक्ट्स बताने के लिए ट्रंप के ​ट्वीट्स के नीचे सूचना दी. यह पहली बार था जब किसी सोशल मीडिया मंच ने किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ ऐसा कदम उठाया.

ट्रंप ने इस कदम पर ऐतराज़ जताते हुए उल्टा आरोप लगाया कि ट्विटर राष्ट्रपति चुनाव 2020 में दखलंदाज़ी की कोशिश कर रहा है, तो ट्विटर ने दावा किया कि चुनाव को लेकर भ्रामक सूचनाओं को रोकने के लिए उसने यह कवायद की. जबकि ट्रंप प्रशासन ने ट्विटर को ट्रंप के खिलाफ पक्षपाती रवैया रखने का आरोप लगाया था.

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इसके बाद, तो ट्रंप और ट्रंप के समर्थकों ने एक तरह से ट्विटर के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया था, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने अपनी नीति पर बने रहने का स्टैंड लिया. दूसरी तरफ,​ ट्विटर के प्रमुख योएल रोथ के ट्रंप के खिलाफ राय देते ट्वीट्स भी ट्रंप और ट्विटर के बीच तनाव की बड़ी वजह बने थे.

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नस्लवाद के समय का विवाद
इसके बाद, अमेरिका में जब एक अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की मौत एक पुलिसकर्मी की ज़्यादती से हुई थी, तब हिंसा भड़कने के समय ट्रंप ने दमनकारी नीति अपनाते हुए इस आशय के कई ट्वीट्स किए थे, जिसमें पुलिस बल के प्रयोग से विरोध प्रदर्शनों को दबाने की बात की गई थी. कुल मिलाकर इन ट्वीट्स को हिंसा के समर्थन में समझा गया था.

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‘वो लूट करेंगे तो हम शूट करेंगे’, इस तरह की लाइन लिखने वाले ट्रंप के ट्वीट्स के सिर्फ दो घंटों के भीतर ट्विटर ने उन पर वॉर्निंग लेबल लगाना शुरू किया था, जिसका अर्थ यह था कि ट्विटर प्लेटफॉर्म हिंसा भड़काने या उसे जायज़ ठहराने वाली कवायदों का समर्थन नहीं करता. ट्विटर ने ट्रंप के ऐसे ट्वीटों को रीट्वीट और लाइक करने वाले लोगों को भी ब्लॉक किया था.

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जब व्हाइट हाउस के अकाउंट से भी ट्रंप के ऐसे ट्वीट को रीट्वीट किया गया था, तब उस पर ट्विटर ने वॉर्निंग लेबल लगाया था. एक बार फिर हुई इस तरह की अनुशासनात्मक कार्यवाही से नाराज़ ट्रंप ने फिर सख्त रवैया अपनाने और सेक्शन 230 को खत्म करने की बात धमकाने के अंदाज़ में कही थी.

नहीं थमा विवादों का सिलसिला
ट्विटर बनाम ट्रंप की यह जंग थमी नहीं थी और 2020 में करीब पूरे साल चलती रही. अक्टूबर—नवंबर के महीने में ट्रंप के 14 ट्वीट्स को भ्रामक बताते हुए ट्विटर ने इन्हें फिर फ्लैग किया था. यह वही वक्त था जब राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सरगर्मियां चरम पर थीं. ट्विटर ने गलत सूचनाओं के खिलाफ अपना मोर्चा सख्त ढंग से संभाले रखा था. इस समय फेसबुक पर भी इस तरह की कार्यवाही करने का दबाव बन रहा था, जिससे एफबी बचता रहा था.

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इससे पहले तक एफबी के सीईओ मार्क ज़करबर्ग ने अपनी कंपनी को इस पचड़े से दूर रखने की बात कई टीवी चैनलों पर की थी. मार्क ने साफ कहा था कि इंटरनेट प्लेटफॉर्मों को ‘सच को लेकर मध्यस्थ’ नहीं होना चाहिए. लेकिन फैक्ट चेक के लिए मोरल ज़िम्मेदारी से बचने के लिए फेसबुक की आलोचना हो रही थी.

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ताज़ा विवाद की बात करें तो कैपिटल हिल की हिंसा को सपोर्ट करने के चलते ट्विटर ने न केवल ट्रंप के अकाउंट ब्लॉक किया बल्कि चेतावनी भी दी कि हमेशा के लिए अकाउंट बंद किया जा सकता है. इसके बाद फेसबुक और यूट्यूब ने भी ट्रंप के खिलाफ पहली बार अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए उनके अकाउंट से विवादास्पद वीडियो हटाए. एफबी ने ट्रंप के अकाउंट को नीतियों के उल्लंघन के चलते 24 घंटों के लिए ब्लॉक किया.





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