Monday, April 12, 2021
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DNA ANALYSIS: दो हंसों के जोड़े की भावुक कहानी


नई दिल्‍ली: आज हम आपको जर्मनी से आई हंसों के एक जोड़े की एक मार्मिक ख़बर के बारे में बताएंगे.  ये कहानी आपको वर्ष 2021 के लिए प्रेम, विश्वास और परिवार के महत्व पर एक बड़ी सीख देगी. जर्मनी के क़ासेल शहर में ए‍क  हंस अपने साथी के साथ गलती से एक हाई स्पीड रेलवे लाइन पर पहुंच गया.  इस रेलवे ट्रैक के ऊपर बिजली के तार लगे हुए थे.  इनमें से एक हंस को बिजली के तारों से करंट लग गया और उसकी मौत हो गई. अपने साथी की मौत के बाद ये हंस उसी रेलवे लाइन के करीब बैठ गया और हंस का ये व्यवहार लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गया क्योंकि आजकल समाज में ऐसे गुण दिखाई नहीं देते हैं. 

कहा जाता है कि हंस अपनी पूरी जिंदगी एक ही जीवनसाथी के साथ बिता देता है. अगर हंस के जोड़े में से किसी एक की मौत हो जाए तो इस दुख से दूसरा हंस भी अपनी जान दे देता है. इसलिए हंसों के जोड़े को सच्चे प्यार का प्रतीक भी माना जाता है. अक्सर इनकी तुलना उन लोगों से की जाती है जो प्यार में होते हैं और उन्हें ‘दो हंसों का जोड़ा’ भी कहा जाता है. 

हंस की जान बचाने के लिए ट्रेनों को रोक दिया गया

ये हंस भी अपने पवित्र प्रेम को दिखाते हुए रेलवे ट्रैक पर ही अपने साथी के साथ मौजूद रहा और उसे छोड़कर नहीं गया.  पहले वहां पर आसपास के लोग पहुंचे. उन्होंने इस हंस की जान बचाने के लिए उसे रेलवे ट्रैक से हटाने की कोशिश की. लेकिन हंस अपने साथी को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था.  इसके बाद लोगों ने फायर डिपार्टमेंट को ख़बर दी. हंस की जान बचाने के लिए इस ट्रैक पर ट्रेनों को रोक दिया गया. फायर डिपार्टमेंट के कर्मचारियों ने बड़ी मुश्किलों के बाद इस हंस को रेलवे ट्रैक से हटाकर पास की एक नदी तक पहुंचाया. इन कोशिशों में करीब 1 घंटे का समय लग गया. जिसकी वजह से 23 ट्रेनें समय पर अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाईं.  आपको जर्मनी के उन लोगों की भी तारीफ करनी चाहिए,  जिन्होंने इस हंस की भावनाओं का भी पूरा ध्यान रखा और उसके साथ इंसाफ करने का पूरा प्रयास किया.

धरती के सबसे सुंदर और समझदार पक्षियों में से एक 

हमारे देश में धार्मिक मान्यता ये है कि हंस ज्ञान और विद्या की देवी सरस्वती का वाहन है. Greek Mythology में भी प्रेम की देवी का वाहन हंस ही है.  हंस ज्यादातर समय पानी में ही रहते हैं लेकिन वो भीगते नहीं है. इनकी तुलना उन संतों से भी की जाती है जो समाज में रहते हुए भी सांसारिक बंधनों से दूर रहते हैं.  भारतीय आध्यात्म की निर्गुण धारा में हंसों की पवित्रता को देखते हुए उन्हें आत्मा का प्रतीक भी माना जाता है. 

हंस,  धरती के सबसे सुंदर और समझदार पक्षियों में से एक हैं. इनमें भी इंसानों की तरह पारिवारिक और सामाजिक भावनाएं होती हैं. इन्हें विश्वास और भरोसे का प्रतीक माना जाता है. कोरोना महामारी के इस संकट के बीच आपने इन भावनाओं को बहुत करीब से देखा और महसूस किया होगा और वर्ष 2021 में हमें इस सीख को याद रखने की जरूरत पहले से भी कहीं ज्यादा है. 





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