Friday, July 23, 2021
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DNA ANALYSIS: Tokyo Olympics में भारत समेत 11 देशों के लिए क्यों बनाए गए ज्यादा सख्त नियम?


नई दिल्ली: आज हम टोक्यो ओलम्पिक्स को लेकर जापान सरकार के बनाए नए नियमों का DNA टेस्ट करेंगे. टोक्यो ओलम्पिक्स का आयोजन अगले महीने जुलाई की 23 तारीख से शुरू होगा और इस पर जापान सरकार ने खिलाड़ियों के लिए नए नियम बना दिए हैं. महत्वपूर्ण बात ये है कि भारत समेत 11 देशों के लिए ये नियम ज्यादा सख्त हैं और दूसरे देशों को जापान सरकार ने इन नियमों में कुछ डिस्काउंट दिया है.

अब बहस इस बात पर है कि सभी खिलाड़ियों के लिए नियम एक जैसे क्यों नहीं है? इस विश्लेषण में हम आपको यही समझाने की कोशिश करेंगे.

11 देशों के खिलाड़ियों के लिए अलग नियम

सबसे पहले आपको नए नियमों के बारे में बताते हैं. जापान सरकार ने कोरोना वायरस को देखते हुए 11 देशों के खिलाड़ियों को एक अलग श्रेणी में रखा है और उनके लिए नियमों को भी सख्त बनाया गया है और ये सभी वो देश हैं, जहां कोरोना वायरस का डेल्टा वैरिएंट मिला है. इनमें भारत के अलावा पाकिस्तान, ब्रिटेन, अफगानिस्तान, मालदीव, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, इजिप्ट, मलेशिया और वियतनाम हैं.

पहले सात दिन तक हर रोज कोरोना जांच

जापान सरकार के नए नियम कहते हैं कि इन देशों से टोक्यो ओलम्पिक्स में हिस्सा लेने के लिए आने वाले खिलाड़ियों को जापान आने से पहले सात दिन तक हर रोज अपनी कोरोना की जांच करानी होगी.

ये खिलाड़ी अपने मैच से 5 दिन पहले ही जापान पहुंच सकते हैं और इन पांच दिनों में भी 3 दिन उन्हें क्वारंटीन रहना होगा. यानी खिलाड़ियों को मैच से पहले प्रैक्टिस का मौका ही नहीं मिलेगा और जापान पहुंचने के बाद भी हर दिन इन खिलाड़ियों का कोरोना टेस्ट किया जाएगा. ये नियम सिर्फ इन देशों के खिलाड़ियों के लिए हैं, बाकी देशों के खिलाड़ियों के लिए ये नियम इतने सख्त नहीं हैं.

दुनिया के 200 से ज्यादा देश लेंगे हिस्सा 

इस साल के टोक्यो ओलम्पिक्स में दुनिया के 200 से ज्यादा देश हिस्सा लेंगे और कुल 10 हजार 900 खिलाड़ियों के बीच 339 गोल्ड मेडल्स के लिए लड़ाई होगी, लेकिन भारत समेत इन 11 देशों के खिलाड़ियों के लिए ये ओलम्पिक्स ज्यादा मुश्किल होने वाले हैं, क्योंकि वो न तो मैच से पहले प्रैक्टिस कर पाएंगे और कोरोना की वजह से क्वारंटीन में रहने का दबाव भी उन पर होगा.

इंडियन ओलम्पिक एसोसिएशन ने नियमों को बताया भेदभावपूर्ण 

इसी बात को आधार बनाते हुए इंडियन ओलम्पिक एसोसिएशन ने इन नियमों को भेदभावपूर्ण बताया है और इंटरनेशनल ओलम्पिक कमेटी से इसमें हस्तक्षेप करने की मांग की है. ये जरूरी भी है क्योंकि, इन नियमों की वजह से भारतीय महिला हॉकी टीम के दो प्रैक्टिस मैच खराब हो सकते हैं और टेनिस प्लेयर सानिया मिर्ज़ा और अंकिता रैना, जो काफी समय से ब्रिटेन में प्रैक्टिस कर रही हैं, वो भी इस नियम की वजह से प्रभावित होंगी.

दुनिया का सबसे बड़ा खेल आयोजन 

ओलम्पिक्स को वैसे तो दुनिया का सबसे बड़ा खेल आयोजन माना जाता है क्योंकि, इसमें दुनिया के लगभग सभी देश हिस्सा लेते हैं, लेकिन व्यूअरशिप के मामले में ओलम्पिक्स, फुटबॉल के FIFA World Cup से थोड़ा पीछे है.

2016 के रियो ओलम्पिक्स के ब्रॉडकास्ट को पूरी दुनिया में 320 करोड़ लोगों ने देखा था, जबकि 2018 के FIFA World Cup को 357 करोड़ लोगों ने देखा था. अगर क्रिकेट की बात करें तो 2019 का ICC World Cup पूरी दुनिया में 160 करोड़ लोगों ने देखा था.

23 जुलाई को टोक्यो ओलम्पिक की शुरुआत

आज से ठीक 30 दिन बाद यानी 23 जुलाई को टोक्यो में ओलम्पिक की शुरुआत हो जाएगी. पूरी दुनिया जब कोरोना के कहर से जूझ रही है, ऐसे मुश्किल समय में टोक्यो ओलम्पिक के लिए जापान ने हर संभव तैयारी की है.

रविवार को टोक्यो ओलंपिक विलेज और ओलंपिक प्लाजा को मीडिया के लिए खोला गया. इस ओलम्पिक विलेज में 11 हजार खिलाड़ी रहेंगे. इन खिलाड़ियों के लिए वर्ल्ड क्लास सुविधाएं हैं.

‘यूनाइट बाय इमोशन’ का संदेश 

कोरोना काल में जहां लोग एक दूसरे ये दूर हो रहे हैं, वहां टोक्यो ओलम्पिक लोगों को ‘यूनाइट बाय इमोशन’ का संदेश दे रहा है. ओलम्पिक विलेज में खिलाड़ियों के रहने के लिए 23 बिल्डिंग हैं, जिसमें 12 हजार खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ रह सकते हैं.

सिर्फ 50% दर्शकों की इजाजत 

ओलम्पिक विलेज का मीडिया सेंटर है. यहां कैफेटेरिया बनाया गया है. खिलाड़ियों के रहने के लिए जो अपार्टमेंट बने हैं, उसमें कॉमन रूम के साथ हर सुख सुविधा मौजूद है. खिलाड़ियों के लिए वर्ल्ड क्लास जिम, ग्राउंड तक लाने और ले जाने के लिए बस भी तैयार है. बस अब खिलाड़ियों का इंतजार है. हर जगह पर सोशल डिस्टेंसिंग का खास ध्यान रखा गया है. स्टेडियम में क्षमता से सिर्फ 50% दर्शकों की इजाजत है. किसी भी स्टेडियम में ज्यादा से 10 हजार दर्शक ही मौजूद रह सकते हैं.

इतने बड़े आयोजन में दर्शकों की मौजूदगी को कम करने से स्थानीय लोग खुश नहीं है. कुछ ऐसे लोग भी हैं जो मानते हैं कि कोरोना को देखते हुए स्टेडियम में दर्शकों की इजाजत होनी ही नहीं चाहिए.

ओलम्पिक विलेज में आइसोलेशन एरिया 

कोरोना से निपटने के लिए खास तैयारी की गई है. ओलम्पिक विलेज में ही आइसोलेशन एरिया बनाया गया है. इसे Fever Clinical Isolation Area का नाम दिया गया है.

इन तैयारियों को देखकर ये तो कहा ही जा सकता है कि कोरोना के कहर के बावजूद जापान में ओलम्पिक का शानदार आयोजन होने वाला है.

हालांकि ओलम्पिक के दौरान कोरोना संक्रमण न फैले इसके लिए उन 11 देशों के लिए खास नियम बनाए गए हैं, जिन देशों में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट मिला है. वहां के एथलीट सिर्फ 5 दिन पहले ही जापान पहुंचे पाएंगे और इसमें भी 3 दिन उन्हें क्वारंटीन रहना होगा. इन 11 देशों में भारत भी शामिल है. भारतीय ओलम्पिक संघ इस नियम को भेदभावपूर्ण बता रहा है. भारतीय ओलम्पिक संघ सवाल उठा रहा है कि इतनी देर से पहुंचने पर खिलाड़ी अभ्यास कब करेंगे.

कब हुई ओलम्पिक्स की शुरुआत

ओलम्पिक्स की शुरुआत वर्ष 1896 में हुई थी और तब से अब तक सिर्फ तीन बार ऐसा हुआ है, जब ओलम्पिक्स खेलों को रद्द करना पड़ा.

-1916 में ओलम्पिक्स खेलों का आयोजन पहले विश्व युद्ध की वजह से रद्द हो गया था.

-1940 का ओलम्पिक्स दूसरे विश्व युद्ध की वजह से रद्द हो गया था.

-और 1944 में भी दूसरे विश्व युद्ध की वजह से इसे रद्द कर दिया गया था.

-वर्ष 1920 में ऐसा भी हुआ था, जब ओलम्पिक्स से जर्मनी को इसलिए अलग रखा गया था क्योंकि, जर्मनी पहले विश्व युद्ध का कारण था.





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