Saturday, May 21, 2022
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DNA on Human Rights: अब अमेरिका में मानवाधिकार उल्लंघन पर भारत रखेगा नजर!


DNA on Human Rights: अमेरिका ने मानवाधिकारों पर अपनी ताजा रिपोर्ट जारी की है. जिसमें उसने भारत की कुछ घटनाओं पर चिंता जाहिर की है और इस रिपोर्ट के मुताबिक हाल के दिनों में भारत में अभिव्यक्ति की आजादी और प्रेस की आजादी कम हुई है. साथ ही धार्मिक आजादी भी पहले से घटी है. 

रिपोर्ट में भारत पर लगाए गलत आरोप

रिपोर्ट के मुताबिक सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की गैर कानूनी गिरफ्तारियां हुई हैं और भारत में धार्मिक उन्माद भी बढ़ा है. साथ ही इस रिपोर्ट में देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार हुई सामाजिक कार्यकर्ता दिशा रवि और हिन्दुओं का मजाक उड़ाने वाले Comedian मुनव्वर फारूकी का नाम भी शामिल है. इस रिपोर्ट पर अमेरिका को आईना दिखाने की जरूरत है, जब भारत को भी मानवाधिकारों पर अपनी रिपोर्ट जारी करनी चाहिए और अमेरिका जैसे देशों से सीधे सवाल पूछने चाहिए.

इन 4 बिंदुओं से समझें रिपोर्ट का सार

US State Department ने ये रिपोर्ट 12 अप्रैल को जारी की है, जिसमें दुनिया के 194 देशों में मानवाधिकारों की स्थिति की समीक्षा की गई है. लेकिन इससे भी बड़ा मजाक ये है कि इस रिपोर्ट में अमेरिका ने खुद का एक बार भी जिक्र नहीं किया है. आप इस रिपोर्ट को चार बड़े Points के जरिए समझ सकते हैं.

भारत के लोकतंत्र पर पड़ रहा असर

इस रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका को लगता है कि भारत में अभिव्यक्ति की आजादी सीमित हुई है, प्रेस की स्वतंत्रता पर पाबंदियां लगी हैं और नागरिकों के मौलिक अधिकारों में कटौती हुई है, जिसका असर भारत के लोकतंत्र पर पड़ा है.

अमेरिका ने जताई चिंता और मौन रहा भारत?

इसमें भारत को लेकर कई विषयों पर भी चिंता जताई गई है. ये विषय हैं गैर कानूनी गिरफ्तारियां, भ्रष्टाचार, धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर संकीर्ण मानसिकता, इंटरनेट पर पाबंदी और अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा. इसमें ये भी लिखा है कि अमेरिका इन मुद्दों को लेकर भारत सरकार के सामने पहले भी चिंता जता चुका है. लेकिन भारत सरकार ने अब तक इस पर कोई जवाब नहीं दिया है.

तीसरी बात इसमें ये लिखी है कि वर्ष 2021 में भारत में बहुत सारे लोगों को कानून के विरुद्ध मनमाने ढंग से गिरफ्तार किया गया और भारत की पुलिस ने भी कोर्ट में इन गिरफ्तारियों की समय पर सुनवाई नहीं होने दी.

इन आरोपियों को हीरो बनाने की कोशिश

इस रिपोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ता दिशा रवि का नाम है, जिन्हें किसान आन्दोलन के दौरान सामने आई देश विरोधी टूलकिट के मामले में गिरफ्तार किया गया था. इसमें जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का नाम है. इसमें महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में जेल में बन्द 15 आरोपियों के नाम हैं और इसमें हिन्दुओं का मजाक उड़ाने वाले Stand Up Comedian मुनव्वर फारुकी का भी नाम है. साथ ही इसमें लिखा है कि मुनव्वर फारुकी पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का जो मामला दर्ज हुआ था, वो कार्रवाई कानून के मुताबिक नहीं थी.

देश विरोधियों का पक्ष लेता अमेरिका

आज हम आपसे ये पूछना चाहते हैं कि पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे और भारत विरोधी एजेंडा चलाने को आप देशद्रोह मानेंगे या अभिव्यक्ति की आजादी मानेंगे. हमें यकीन है कि आपमें से ज्यादातर लोग इसे अपने खिलाफ एक बगावत मानेंगे. लेकिन अमेरिका के लिए ये अभिव्यक्ति की आजादी है और वो चाहता है कि भारत में रहने वाली देश विरोधी ताकतों पर इसके लिए कोई कार्रवाई भी ना हो. इस रिपोर्ट में भारत सरकार के उस आदेश की भी आलोचना की गई है, जिसमें सरकार ने ट्विटर को किसान आन्दोलन के दौरान फर्जी खबरें फैलाने वाले पत्रकारों के Accounts को बन्द करने का निर्देश दिया था. ये आदेश फरवरी 2021 में दिया गया था.

अमेरिका में कैसी है मानवाधिकारों की स्थिति

यही सही समय है कि जब भारत को भी अमेरिका में मानवाधिकारों की स्थिति पर उसे चेतावनी जारी करनी शुरू कर देनी चाहिए और भारत को भी कहना चाहिए कि वो अमेरिका में मानवाधिकारों के उल्लंघन को मॉनिटर कर रहा है. इसी महीने की 3 तारीख को अमेरिका के न्यू यॉर्क में सिख समुदाय के दो लोगों के खिलाफ नस्लीय हिंसा हुई थी, जिसमें ये लोग बुरी तरह घायल हो गए थे लेकिन इस घटना का जिक्र अमेरिका ने अपनी इस रिपोर्ट में कहीं नहीं किया है. अमेरिका को भी ये जानना चाहिए कि वो सरपंच बन कर दुनियाभर के देशों को मानवाधिकारों पर लेक्चर देता है. लेकिन असल में खुद अमेरिका में मानवाधिकारों की स्थिति बहुत खराब है.

आपको जरूर जानना चाहिए अमेरिका का ये उदाहरण

4 अप्रैल को अमेरिका के Michigan में एक पुलिसकर्मी द्वारा एक अश्वेत नागरिक पर हमला किया गया था. इस व्यक्ति की गलती ये थी कि इसकी कार पर गलत नम्बर प्लेट लगी हुई थी और ऐसे मामले में इसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए था. लेकिन क्योंकि ये व्यक्ति अश्वेत था इसलिए इसे पुलिस द्वारा बेरहमी से पीटा गया.

वर्ष 2020 में अमेरिका में अश्वेत नागरिकों के खिलाफ हिंसा की 2 हजार 871 घटनाएं हुई थीं. ये घटनाएं 2019 के मुकाबले 49 प्रतिशत ज्यादा हैं. आपको याद होगा 25 मई 2020 को भी अमेरिका में George Floyd नाम के एक अश्वेत नागरिक की पुलिस द्वारा हत्या कर दी गई थी और तब इस घटना के बाद अमेरिका में Black Lives Matter नाम से आन्दोलन चलाया गया था. लेकिन अमेरिका कभी अपने देश में मानवाधिकारों की इस खतरनाक स्थिति पर कोई बात नहीं करता.

अब भारत नहीं रहेगा चुप

लेकिन अब भारत ने अमेरिका को बता दिया है कि वो भी उसे मॉनिटर कर रहा है. भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि अब भारत ऐसे मामलों को लेकर चुप नहीं रहेगा और मानवाधिकारों पर भारत भी अमेरिका जैसे देशों पर नजर बनाए हुए है. भारत पुरानी सभ्यताओं का देश है. हमारी जो सभ्यता है, वो शांति की सबसे बड़ी दूत रही है. हमने कभी हिंसा नहीं की और उस नाते भारत को पूरा अधिकार है कि वो अपना एक मानवाधिकार आयोग बनाए और सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते पूरी दुनिया पर नजर रखे और वो पूरी दुनिया को लेकर हर साल ये रिपोर्ट जारी करे कि वहां मानवाधिकारों और लोकतंत्र की क्या स्थिति है. इस रिपोर्ट को सबसे विश्वसनीय रिपोर्ट माना जाना चाहिए. क्योंकि ये रिपोर्ट एक ऐसे देश से आएगी, जो शांति का सबसे बड़ा दूत रहा है.

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