Saturday, May 28, 2022
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DNA with Sudhir Chaudhary: थर्ड वर्ल्ड वॉर की हो चुकी शुरुआत? रूसी मीडिया का दावा


DNA on Third World War: क्या तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो चुका है? यूक्रेन ने दावा किया है कि उसने Black Sea में तैनात रूस के तीसरे सबसे बड़े Warship यानी युद्धपोत को नष्ट कर दिया है. इस हमले की कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं. जिनमें ये युद्धपोत समुद्र के बीच आग में धधकता हुआ दिख रहा है और इस युद्धपोत का नष्ट होना एक बड़ा Turning Point है. 

तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत?

रूस के सरकारी मीडिया ने ये कहना शुरू कर दिया है कि अब ये युद्ध दो देशों के बीच सीमित नहीं रहा है. बल्कि अब तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हो चुकी है. जिसमें अमेरिका और यूरोप के देश रूस के खिलाफ लड़ रहे हैं. इसलिए आइए जानते हैं कि क्या Black Sea में इस Warship के डूब जाने की घटना इस युद्ध में एक बहुत खतरनाक मोड़ ला सकती है.

रूस ने जारी किया वीडियो

रूस के रक्षा मंत्रालय ने इस घटना पर अब तक ज्यादा जानकारी नहीं दी है. लेकिन उसकी तरफ से एक वीडियो जारी किया गया, जिसमें इस युद्धपोत के Crew Members नजर आ रहे हैं. रशिया का कहना है कि इस घटना के दौरान इस Warship पर उसके जो 500 नौसैनिक तैनात थे, वो पूरी तरह सुरक्षित हैं और रशिया ने यूक्रेन के उस दावे को भी गलत बता दिया है, जिसमें उसने ये जानकारी दी थी कि उसकी नौसेना ने Black Sea में रशिया के इस युद्धपोत पर दो Neptune Missiles दाग कर उसे समुद्र में डुबो दिया है.

रूस के रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि इस युद्धपोत पर कोई हमला नहीं हुआ था. बल्कि उसकी नौसेना इस युद्धपोत को एक तटीय इलाके में ले जा रही थी और तभी इसमें आग लग गई, जिसकी वजह से ये विशाल युद्धपोत समुद्र में डूब गया. हालांकि इस घटना के बाद से रूस और यूक्रेन के बीच तनाव काफी बढ़ गया है और ये Warship अचानक से इस पूरे युद्ध के केन्द्र में आ गया है. तो ये युद्धपोत इस युद्ध का टर्निंग पॉयंट कैसे बन गया है, पहले आपको ये समझना होगा. 

40 साल बाद नष्ट हुआ कोई युद्धपोत

40 वर्षों के बाद ऐसा हुआ है, जब किसी युद्ध में कोई Warship नष्ट होने के बाद समुद्र में डूब गया. इससे पहले वर्ष 1982 में जब ब्रिटेन और Argentina के बीच युद्ध लड़ा गया था, तब भी इसी तरह Argentina ने Anti Warship Missiles से ब्रिटेन के एक विशाल युद्धपोत को नष्ट कर दिया था और इस घटना की वजह से तब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था. आज भी ऐसा ही हो रहा है. रूस के इस युद्धपोत का नाम है, Moskva (मोस्कोवा). जो वर्ष 1983 में उसकी नौसेना में शामिल हुआ था और वर्ष 2008 से ये Black Sea में तैनात था. वर्ष 2014 में जब रूस ने Crimea पर कब्जा किया, उस समय भी इस युद्धपोत ने सैन्य संघर्ष में अहम भूमिका निभाई थी और ऐसा माना जाता था कि Black Sea में जब तक रशिया का ये Warship तैनात है, तब तक यूक्रेन Crimea में युद्ध लड़ने के बारे में सोच भी नहीं सकता. क्योंकि ये इस क्षेत्र में तैनात रशिया का सबसे बड़ा युद्धपोत था.

– ये युद्धपोत Anti Ship Missiles से लैस था

– इससे Surface to Air Missile लॉन्च की जा सकती थीं. यानी ये जमीन से हवा में मिसाइल हमला कर सकता था.

– इसमें खतरनाक Guns मौजूद थीं, जो एक साथ कई राउंड फायर कर सकती थीं.

– इसके अलावा इसमें अलग से Weapon System, Anti Submarine Mortars और Tropedo Tubes लगी हुई थीं और ये Warship, Aircraft Carrier का भी काम करता था. यानी इस पर लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर भी उतर सकते थे और इस लिहाज से ये दुनिया के सबसे खतरनाक Warship में से एक थे.

– ये युद्धपोत काफी महंगा भी था. इसकी कीमत 5 हज़ार 718 करोड़ रुपये मानी जाती है.

– लेकिन यूक्रेन का दावा है कि, उसकी 100-100 करोड़ की दो मिसाइल ने लगभग 6 हजार करोड़ के इस युद्धपोत को आसान से समुद्र में डुबो दिया.

इसलिए इस घटना के बाद ये सवाल भी उठ रहा है कि क्या अब इस तरह के Warship का दौर खत्म हो चुका है?

चीन के पास सबसे ज्यादा वॉरशिप

इस समय पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा 777 Warships चीन के पास हैं. इसके बाद रशिया के पास 605, अमेरिका के पास 484 और कोलम्बिया और उत्तर कोरिया के पास 450 Warships हैं. बड़ी बात ये है कि चीन के पास सबसे ज्यादा Warships तो हैं लेकिन वो इन्हें ज्यादा प्रभावी नहीं मानता. चीन का मानना है कि अब इस तरह की Anti Warship Missiles आ चुकी हैं, जो खतरनाक से खतरनाक Warship को कुछ ही सेकेंड में खत्म कर सकती हैं. इसलिए ऐसे Warships को विकसित करने नुकसान का सौदा होगा और यही वजह है कि चीन अब Warships बनाने के बजाय Anti Warship Missiles बनाने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है.

इसकी एक और वजह ये है कि ये आकार में बहुत बड़े होते हैं और इन्हें छिपा कर नहीं रखा जा सकता. इसके अलावा इनकी रफ्तार भी कम होती है. रूस का जो युद्धपोत नष्ट हुआ, उसका वजन साढ़े 12 हजार टन था और इसकी अधिकतम स्पीड 59 किलोमीटर प्रति घंटा थी. जिसकी वजह से यूक्रेन की नौसना इसे आसानी से अपना निशाना बना पाई.

दूसरे विश्व युद्ध के बारे में ये फैक्ट जानते हैं आप?

हालांकि आप में से बहुत सारे लोगों को शायद ये बात पता नहीं होगी कि दूसरे विश्व युद्ध में इस तरह के Warships का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुआ था और इससे पहले रूस का आखिरी युद्धपोत भी दूसरे विश्व युद्ध में ही नष्ट हुआ था. ये बात वर्ष 1941 की है. उस समय रूस, सोविय रूस हुआ करता था और तब जर्मनी की नौसेना ने सोवियत रूस के एक Warship को नष्ट कर दिया था. ये हमला तब युद्ध में एक बड़ा Turning Point साबित हुआ था और इस बार भी ऐसा हो सकता है. क्योंकि रशिया के सरकारी मीडिया ने ये कहना शुरू कर दिया है कि अब तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो चुका है. विश्व युद्ध की शुरुआत तब मानी जाती है, जब किसी युद्ध में दो देशों से ज्यादा देश हिस्सा लें. इस युद्ध में ऐसा ही हो रहा है.

युद्ध में कई देशों की हुई एंट्री

इस समय दुनिया के ज्यादातर देश इस युद्ध में यूक्रेन की सीधे तौर पर मदद कर रहे हैं. इनमें यूरोपियन यूनियन के 27 देश भी शामिल है, जो यूक्रेन को अब तक 12 हजार 355 करोड़ रुपये की सैन्य मदद दे चुके हैं. इसके अलावा अमेरिका भी यूक्रेन को हथियार दे रहा है. 24 फरवरी के बाद से अब तक अमेरिका यूक्रेन को 19 हजार करोड़ रुपये के हथियार देने का ऐलान कर चुका है और NATO के देश भी यूक्रेन की मदद कर रहे हैं. NATO, यूक्रेन को Missiles से लेकर दूसरे खतरनाक हथियार दे रहा है. इसके अलावा ब्रिटेन ने भी यूक्रेन को 800 Anti-Tank Missiles, Javelin Anti-Tank Missiles, Air Defence Systems, और दूसरे हथियार दिए हैं. इस समय लगभग 30 से ज्यादा देश यूक्रेन को हथियार दे रहे हैं. जबकि ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देश रशिया पर आर्थिक प्रतिबंध लगा कर यूक्रेन के समर्थन का ऐलान कर चुके हैं. यानी एक तरह से इस युद्ध में कई देशों की एंट्री हो चुकी है और यही वजह है कि रशिया अब ये कह रहा है कि तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो चुका है.

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