Sunday, August 14, 2022
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DNA with Sudhir Chaudhary: दुनिया में कैसे बढ़ रहा भारत का दबदबा? जर्मनी के बाद अब डेनमार्क में भी मोदी-मोदी


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PM Narendra Modi Denmark Visit: जब दुनिया भारत का सम्मान करती है, भारत के प्रधानमंत्री का सम्मान करती है तो देश के 135 करोड़ लोगों के लिए इससे बड़ी गर्व की बात हो ही नहीं सकती. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) यूरोप के तीन देशों के दौरे पर हैं. मंगलवार को उनके दौरे का दूसरा दिन रहा. जर्मनी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को डेनमार्क पहुंचे, जहां उनका ज़ोरदार स्वागत हुआ.

डेनिश पीएम ने प्रधानमंत्री मोदी का किया स्वागत

डेनमार्क (Denmark) की राजधानी कोपेनहेगन के हवाई अड्डे पर, खुद वहां की प्रधानमंत्री Mette Frederiksen (मेटे फ्रेडरिक्सन) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए विमान के पास खड़ीं थीं. ये भारत के लिये बेहद सम्मान की बात है. आमतौर पर ऐसा करने की औपचारिकता नहीं है. लेकिन डेनमार्क की प्रधानमंत्री Mette Frederiksen (मेटे फ्रेडरिक्सन) ने उन नियमों और प्रोटोकॉल को तोड़कर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया.

इससे पता चलता है कि भारत के प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए डेनमार्क कितना उत्सुक था. डेनमार्क की प्रधानमंत्री Mette Frederiksen (मेटे फ्रेडरिक्सन) ने प्रधानमंत्री मोदी (Narendra Modi) को सबसे पहले नमस्कार किया और फिर बेहद गर्मजोशी के साथ, हाथ मिलाकर उनका अभिवादन किया. इस दौरान दोनों के बीच कुछ हल्की फुल्की बातें भी हुईं. डेनमार्क के दूसरे नेताओं ने भी प्रधानमंत्री मोदी से मिलने में पूरी गर्मजोशी दिखाई. 

बर्लिन की तरह की कोपेनहेगन एयरपोर्ट पर भी प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में भारतीय मौजूद थे. उन लोगों ने ढोल नगाड़ों की थाप के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिवादन किया. प्रधानमंत्री मोदी भी काफी देर तक उन लोगों के पास रुके रहे. उन्होंने ढोल बजाने वाले भारतीयों से थोड़ा हंसी मजाक भी किया.

भारतीय मूल के लोगों में दिखा गजब का उत्साह

ऐसी ही तस्वीर दोनों देशों के बीच हुई Business meet के बाद दिखी. यहां भी बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग प्रधानमंत्री का इंतजार कर रहे थे. एयरपोर्ट से प्रधानमंत्री मोदी, डेनमार्क की प्रधानमंत्री Mette Frederiksen (मेटे फ्रेडरिक्सन) के आधिकारिक आवास पहुंचे. वहां डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने उन्हें अपना घर दिखाया. 

यह कुछ ऐसा था कि जैसे आपके घर में जब कोई खास मेहमान आता है तो आप उसे अपने घर की एक-एक चीज उत्साह से दिखाते हैं. Danish प्रधानमंत्री ने, प्रधानमंत्री मोदी (Narendra Modi) को अपने घर की दीवार पर टंगी ये पेंटिंग दिखाई. ये पेंटिंग प्रधानमंत्री मोदी ने Danish प्रधानमंत्री को पिछले वर्ष अक्टूबर में उनके भारत दौरे के वक्त उपहार में दी थी. इस पेंटिंग को पट्टचित्र कहते हैं.

पट्टचित्र, ओडिशा की प्राचीन कला है और इसमें पौराणिक कहानियों, लोक कथाओं को खास तरह के कपड़े पर बनाया जाता है. इस पेंटिंग में आमतौर पर रामायण, महाभारत, कृष्णलीला और विष्णु के दस अवतारों को उकेरा जाता है और इसे बनाने के लिए कलाकार विशेष पर प्रशिक्षण लेते हैं. डेनमार्क की पीएम के घर पर जो पट्टचित्र लगा है, उसमें अयोध्या में राम दरबार को दिखाया गया है.

दुनिया में बढ़ रहा भारत का दबदबा

दोनों देशों के नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास में बने इस शानदार बगीचे में भी एक दूसरे से बातचीत की. इस दौरान क्या बातें हुईं वो तो नहीं पता, लेकिन दोनों नेताओं के हाव भाव, दोनों देशों के बीच रिश्तों की नई केमिस्ट्री बता रहे थे.

डेनमार्क (Denmark) के अखबार भी दोनों प्रधानमंत्रियों की तस्वीरों से सजे हुए हैं. इन सबसे आप समझ सकते हैं कि आजादी के 74 वर्ष बाद भारत कैसी स्थिति में है और दुनिया में उसका सम्मान अब किस प्रकार होता है. किस प्रकार हमारे प्रधानमंत्री को दुनिया के देशों में सम्मान दिया जाता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) दुनिया के किसी भी हिस्से में जाएं, वहां बच्चों से मिलना और उन्हें दुलारना वो नहीं भूलते हैं. वे सोमवार को बर्लिन में बच्चों से मिले थे, उनसे बात की थी और उनको आशीर्वाद भी दिया था. मंगलवार को डेनमार्क में भी उन्होंने एक छोटे बच्चे को स्नेह दिया. उस छोटे बच्चे के हाथ में तिरंगा था. प्रधानमंत्री बच्चे को दुलारते हुए कुछ कह रहे थे. ये प्रधानमंत्री की बच्चों के बीच लोकप्रियता ही है, जिसकी वजह से आज कोपेनहेगन में भी बहुत से बच्चे प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचे थे. प्रधानमंत्री का ये अंदाज हर किसी को बहुत पसंद आता है. प्रधानमंत्री मोदी किसी भी व्यस्त कार्यक्रम में जा रहे हों, अगर उन्हें रास्ते में कहीं भी बच्चे दिखते हैं तो वो उन्हें निराश नहीं करते हैं, उनसे पूरी सहजता के साथ मिलते हैं और वो तस्वीर सारी दुनिया के लिए खास हो जाती है.

भारत और डेनमार्क में हुए कई समझौते

अब आपको ये जानना चाहिए कि कोपेनहेगन में मंगलवार को भारत और डेनमार्क के बीच क्या समझौते हुए. तय कार्यक्रम के मुताबिक भारत और डेनमार्क (Denmark) के बीच द्विपक्षीय बातचीत शुरू हुई. बैठक में एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी और उनके साथ गया भारतीय प्रतिनिधिमंडल था तो दूसरी तरफ डेनमार्क की प्रधानमंत्री Mette Frederiksen और उनका प्रतिनिधिमंडल था.

दोनों देशों के बीच ग्रीन शिपिंग और पर्यावरण के क्षेत्र में सहयोग पर करार हुआ. इसके अलावा कौशल विकास और युवाओं को रोजगार के प्रशिक्षण पर भी समझौता हुआ. पशुपालन और डेयरी सेक्टर में भी डेनमार्क (Denmark) और भारत के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है. इसके अलावा भारत में स्टार्ट अप को बढ़ावा देने के लिए भी डेनमार्क मदद करेगा. जलशक्ति और ऊर्जा के क्षेत्र में भी डेनमार्क और भारत साथ मिलकर काम करेंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और डेनमार्क की प्रधानमंत्री Mette Frederiksen की बातचीत में एक शब्द आया- FOMO. ये FOMO एक abbreviation है. इसका मतलब है – Fear of missing out, यानी छूट जाने का डर. प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में निवेश को लेकर FOMO का जिक्र किया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन दिनों FOMO (छूट जाने का डर) शब्द सोशल मीडिया पर प्रचलित है. भारत में चल रहे सुधारों और निवेश की संभावनाओं को देखते हुए ये कहा जा सकता है कि जो लोग भारत में निवेश नहीं करेंगे, वो निश्चित रूप से पीछे छूट जाएंगे.

इस पर डेनिश प्रधानमंत्री Mette Frederiksen ने भी दिलचस्प जवाब दिया. फ्रेडरिक्सन ने कहा कि उन्हें लगता था कि FOMO का संबंध शुक्रवार की रात और पार्टियों से है लेकिन अब उन्हें एहसास हुआ है कि ये भारत से जुड़ा है. 

डेनमार्क का रूस-यूक्रेन युद्ध में दखल देने का अनुरोध

आज भारत दुनिया में ऐसे स्थान पर है, जहां उसके निर्णयों का पूरा सम्मान होता है. रशिया और यूक्रेन के बीच युद्ध को लेकर सारी दुनिया की नजरें भारत पर लगी हुई हैं. दुनिया को उम्मीद है कि इस युद्ध में भारत बड़ा निर्णायक बन सकता है, इसकी झलक मंगलवार को डेनमार्क (Denmark) की प्रधानमंत्री की बातों में भी दिखी. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से रशिया-यूक्रेन युद्ध पर दखल का अनुरोध किया.

रशिया-यूक्रेन के मुद्दे पर बर्लिन में भी प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत हुई थी और मंगलवार को डेनमार्क में भी इसी मुद्दे पर बात हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इसके बारे में बताया.

आपके लिये प्रधानमंत्री मोदी (Narendra Modi) के डेनमार्क (Denmark) दौरे का महत्व समझना भी जरूरी है. प्रधानमंत्री की ये यात्रा भारत और डेनमार्क के रिश्तों के लिए काफ़ी अहम है. डेनमार्क में भारतीय मूल के करीब 16 हज़ार 500 लोग रहते हैं. भारत में डेनमार्क की करीब 200 कंपनियां काम कर रही हैं. इन कंपनियों में AP Moller Maersk Group, Vestas, LM Wind Power, Danfoss और Ramboll शामिल हैं. शिपिंग, renewable energy, पर्यावरण और कृषि से लेकर food processing और शहरी विकास तक के क्षेत्रों में डेनमार्क की कंपनियां भारत में काम कर रही हैं. प्रधानमंत्री मोदी की मेक इन इंडिया स्कीम के तहत डेनमार्क की कई कंपनियों ने भारत में कारखाने लगाए हैं. इसके अलावा जल जीवन मिशन और डिजिटल इंडिया समेत केंद्र सरकार की कई योजनाओं में डेनमार्क की कंपनियां अहम भूमिका निभा रही हैं. 

भारतीय कंपनियों ने भी डेनमार्क में अपनी छाप छोड़ी है. डेनमार्क (Denmark) में भारत की 60 कंपनियां  कारोबार कर रही हैं. खास तौर पर भारत की IT कंपनियां डेनमार्क में काफी अच्छा काम कर रही हैं. इनमें TCS, Infosys और L&T Infotech शामिल हैं. 2021 के आंकड़ों के मुताबिक डेनमार्क में भारत का निवेश 3 हजार 449 करोड़ रुपये से अधिक है.

आपको डेनमार्क की प्रधानमंत्री Mette Frederiksen के बारे में भी जानना चाहिए. Mette Frederiksen डेनमार्क की सबसे युवा प्रधानमंत्री हैं. उनकी उम्र 44 वर्ष है और उन्हें 2019 में प्रधानमंत्री चुना गया था. उनके शासन में भारत और डेनमार्क के रिश्ते ज्यादा मजबूत हुए हैं. Mette Frederiksen पिछले साल अक्टूबर में भारत दौरे पर आई थीं. ये हम आपको पहले ही बता चुके हैं. उस समय कोविड महामारी शुरू होने के बाद किसी भी देश के head of the government की वो पहली भारत यात्रा थी. इससे पहले 2020 में प्रधानमंत्री मोदी के साथ Mette Frederiksen की वर्चुअल मीटिंग हुई थी. जिसमें दोनों देशों के बीच ग्रीन एनर्जी पर रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत हुई थी.

बुधवार को इंडो-नार्डिक समिट में भाग लेंगे पीएम मोदी

डेनमार्क में प्रधानमंत्री मोदी (Narendra Modi) बुधवार को India Nordic Summit में शामिल होंगे. Nordic का मतलब है north. उत्तरी यूरोप के पांच देशों को Nordic Countries कहा जाता है. ये देश हैं- डेनमार्क, फ़िनलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और आइसलैंड.

पहला India Nordic Summit 2018 में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में हुआ था. इसमें भी प्रधानमंत्री मोदी ने हिस्सा लिया था. दूसरा India Nordic Summit डेनमार्क (Denmark) की राजधानी कोपेनहेगन में हो रहा है. यहां भी प्रधानमंत्री मोदी मौजूद हैं और वो बुधवार को Nordic देशों के नेताओं के साथ आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे.

आपको India Nordic सम्मेलन के कूटनीतिक और geo political समीकरण को भी जानना चाहिए ताकि आप बदलते World order में भारत और उत्तरी यूरोपीय देशों के संबंधों को ठीक से समझ सकें. 

nordic देशों में डेनमार्क, फिनलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और आइसलैंड शामिल हैं. इनमें से तीन देश डेनमार्क, नॉर्वे और आइसलैंड NATO का हिस्सा हैं. फिनलैंड का land border रूस से मिलता है, जबकि स्वीडन और रशिया के बीच समुद्री सीमा है. फिनलैंड  और स्वीडन ये दोनों देश अब तक NATO में शामिल नहीं हुए. लेकिन यूक्रेन पर रशिया के हमले के बाद हालात बदल गए और जंग शुरू होने के बाद फिनलैंड और स्वीडन ने भी NATO में शामिल होने की इच्छा जताई है और जल्द ही ये NATO के सदस्य बन सकते हैं.

अमेरिका गुट में शामिल हैं नॉर्डिक देश

यानी Nordic countries अमेरिका के गुट में है. रशिया- यूक्रेन युद्ध में भारत ने किसी भी देश का समर्थन नहीं किया है और भारत लगातार शांति का पक्षधर रहा है. लेकिन भारत का झुकाव रशिया की तरफ माना जाता है. ऐसे में भारत की कोशिश है कि वो खुद तो तटस्थ देश के रूप में दुनिया के सामने पेश करे. अमेरिका समर्थक Nordic देशों के साथ संबंध बढ़ाकर भारत कूटनीतिक balance कायम करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है.

Nordic देशों के साथ भारत के रिश्तों का आर्थिक पहलू भी काफी महत्वपूर्ण है. डेनमार्क, फिनलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और आइसलैंड- इन सभी देशों को मिलाकर कुल आबादी करीब ढाई करोड़ है. यानी जनसंख्या के लिहाज से ये ज्यादा बड़े देश नहीं हैं. लेकिन इनकी कुल GDP रशिया जैसे सुपरपावर की GDP से अधिक है. रूस की GDP 126 लाख करोड़ रुपए है जबकि NORDIC देशों की GDP 136 लाख 63 हजार करोड़ रुपये है. नॉर्डिक देश देश विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में काफी आगे हैं. इनके पास ग्रीन एनर्जी की latest तकनीक है.

इन सभी देशों के लिए भारत उभरता हुए एक बड़ा बाज़ार है और कोई भी देश भारत की अनदेखी नहीं कर सकता है. भारत को भी इन देशों से विज्ञान, उद्योग, व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्र में काफी मदद मिल सकती है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस मैराथन विदेश दौरे में सबसे पहले जर्मनी के साथ भारत ने अहम समझौते किए. इससे भारत के विकास को नई रफ्तार मिलेगी. मंगलवार को डेनमार्क (Denmark) के साथ भारत ने कई अहम मुद्दों पर समझौते किए हैं. खुद डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने भी उन्हें बेहद अहम बताया है. सारी दुनिया भारत की बढ़ती ताकत देख रही है और वहां बसे भारतीय अपने प्रधानमंत्री से मिलकर गर्व महसूस कर रहे हैं लेकिन भारत में कुछ लोगों को ये सम्मान पच नहीं रहा है. उन्हें पच नहीं रहा है कि आखिर भारत के प्रधानमंत्री को दुनिया हाथों हाथ कैसे ले रही है और उनका इतना सम्मान क्यों हो रहा है. 

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विश्व में भारतीयों का भी बढ़ रहा सम्मान

सोमवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) बर्लिन में भारतीय डायसपोरा यानी वहां रहने वाले भारतीयों के सामने बोल रहे थे, उन्हें देश की नीतियां बता रहे थे, भारत के विकास के बारे में समझा रहे थे ठीक उसी समय कांग्रेस ने एक ट्वीट किया. उस ट्वीट में लिखा-देश में संकट छाया है, मगर साहेब को विदेश भाया है!

ये ट्वीट कांग्रेस की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरे के बीच आया है. क्या देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी का प्रधानमंत्री पद के लिए दिया गया ऐसा बयान शोभा देता है. प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों पर सवाल क्यों खड़े हो रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी के सभी विदेश दौरे बेहद सफल रहे हैं. उन्होंने ऐसे देशों के साथ भी संबंध बेहतर किए हैं, उनके साथ विकास के मुद्दों पर कई समझौते किये हैं, जो अब तक भारत से दूर थे. आज दुनिया के तमाम देश प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों की न सिर्फ प्रशंसा करते हैं बल्कि उनकी बहुत सी नीतियां कई देशों में बेहद लोकप्रिय हैं.

 





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