Friday, July 23, 2021
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Home Loan Rates: लोन लेने वालों के लिए खुशखबरी! Bank of Baroda ने ब्याज दरों में की कटौती


नई दिल्ली: Home Loan Rates: RBI ने अपनी क्रेडिट पॉलिसी में भले ही लगातार 6 बार से ब्याज दरों में कोई बदलाव न किया हो, लेकिन कई सरकारी बैंकों ने अपने ग्राहकों के लिए सस्ते लोन की पेशकश की है. अब Bank of Baroda ने लोन की दरों में कटौती का ऐलान किया है. बैंक ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.05 परसेंट की कटौती की है. 

Bank of Baroda ने सस्ता किया लोन

Bank of Baroda ने अपने लाखों ग्राहकों के लिए लोन दरों की ये कटौती 12 जून, 2021 से लागू की है. इस कटौती के बाद अब Bank of Baroda का 1 साल का MCLR 7.35 परसेंट हो जाएगा. इसके अलावा 6 महीने और 3 महीने की अवधि के लिये भी MCLR को 0.05 परसेंट कम करके 7.20 परसेंट और 7.10 परसेंट कर दिया गया है. 

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PNB ने भी घटाई थीं दरें 

इससे पहले पंजाब नेशनल बैंक और केनरा बैंक ने भी MCLR दरों में कटौती की थी. PNB ने MCLR में 0.05 परसेंट की कटौती करके इसे 7.30 परसेंट कर दिया था. ये नई दरें 1 जून, 2021 से लागू हो गई है. PNB ने 6 महीने और 3 महीने की अवधि के लिये MCLR में 0.10 परसेंट की कटौती की थी. इसके बाद इन अवधियों के लिए ब्याज दरें 7 परसेंट और 6.80 परसेंट हो गईं हैं. ओवरनाइट, एक महीने और 3 साल की अवधि के लिये MCLR में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

Canara Bank ने भी सस्ता किया लोन

केनरा बैंक ने मार्जिनल कॉस्‍ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) और रेपो लिंक्‍ड लेंडिंग रेट (RLLR) में बदलाव किया है. नई दरें 07 मई 2021 से लागू हो चुकी हैं. Canara Bank का दावा है कि वो ग्राहकों को सबसे कम दरों पर लोन ऑफर कर रहा है. केनरा बैंक MCLR बेस्ड लोन 7.35 परसेंट पर दे रहा है. जबकि RLLR (Repo Linked Lending Rate) बेस्ड लोन 6.9 परसेंट पर ऑफर कर रहा है. 

क्या है MCLR और RLLR में फर्क?

सबसे पहले बैंक ब्याज दरें तय करने के लिए प्राइम लेंडिंग रेट (PLR) का इस्तेमाल करते थे, इसके बाद Base Rate आया फिर 1 अप्रैल 2016 में मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) को लागू किया गया, माना ये गया कि MCLR काफी हद तक पारदर्शी है, लेकिन जब ये सभी ग्राहकों को राहत पहुंचाने में नाकाम रहे तो RBI ने एक्सटर्नल बेंचमार्क बेस्ड लेंडिंग रेट को लागू किया. RBI के कहने पर कई बैंकों ने अपने होम लोन को रेपो रेट से जोड़ा है. इस कदम से कर्ज लेने वाले ग्राहकों को रेपो रेट घटने पर फायदा होता है. वहीं, रेपो रेट बढ़ने पर नुकसान होता है. आपको बता दें कि रेपो रेट वह दर है, जिस पर बैंक आरबीआई से उधार लेते हैं.

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