Sunday, May 29, 2022
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IIT प्रोफेसर का दावा, चौथी लहर नहीं होगी घातक: डेल्टा और ओमिक्रॉन से कमजोर रहेगी लहर, वैक्सीन नहीं लेने वालों को खतरा ज्यादा


कानपुर8 मिनट पहले

आईआईटी कानपुर के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर राजेश रंजन।

देश में कोरोना संक्रमण एक बार फिर से अपने पैर पसार रहा है। कोरोना के मामले देश के साथ प्रदेश में लगातार बढ़ते जा रहे हैं। आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर राजेश रंजन ने एसआईआर मॉडल के हवाले से दावा करते हुए कहा कि भारत में आने वाली चौथी लहर दूसरी और तीसरी लहर से कम घातक होगी। उन्होंने आगे बताया कि हमारे पास आए आंकड़ों के हिसाब से मॉडल ने यह आकलन किया है कि यह चौथी लहर मामूली होने वाली है। इसके अलावा किन लोगों को इससे खतरा हो सकता है, उसके बारे में भी भास्कर से एक्सक्लूसिव बात करते हुए उन्होंने कई बातें साझा कीं।

देश में बढ़ रहे कोरोना के मामले क्या कोरोना की चौथी लहर की तरफ इशारा करते हैं?

देखिए चौथी लहर देश में आएगी, लेकिन यह दूसरी और तीसरी लहर का मिश्रण होगा, जो ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाएगी। देश में मिल रहे मामले इसी तरफ संकेत कर रहे हैं। मगर, इससे घबराने की जरूरत नहीं है। इस बार जो म्युटेंट आया है, वो डेल्टा और ओमिक्रॉन से निकला है। इसकी मारक छमता डेल्टा के बराबर नहीं है।

कितनी घातक हो सकती है यह लहर?

कोरोना की चौथी लहर बिल्कुल सामान्य रहने वाली है, क्योंकि इसका म्युटेंट ओमिक्रॉन और डेल्टा से निकला है। जो नया म्युटेंट आया है वह XE है, जो ओमिक्रॉन के बीए-1 और बीए-2 से बनकर निकला है। इसमें कुछ मात्रा डेल्टा की भी है, जो लोगों को नुकसान पहुंचा सकती है।

किन लोगों को यह लहर नुकसान पहुंचा सकती है?

अपने देश में लोगों को वैक्सीनेशन लगाने का कार्य करीब 93 प्रतिशत तक हो चुका है। यह एक अच्छी बात है। यह जो नया म्युटेंट है, वो वैक्सीन को बाईपास नहीं कर पा रहा है। इसकी वजह हमारे देशों के लोगों की स्ट्रॉन्ग इम्यूनिटी है। कई लोगों में कोरोना होने के बाद एंटीबॉडी जनरेट हुई है। इसके अलावा कुछ लोगों को कोरोना हुआ ही नहीं था, लेकिन उन्होंने वैक्सीन लगवाकर अपना बचाव किया।

इस लहर में सबसे ज्यादा उन लोगों को खतरा है, जिनको अभी तक कोरोना नहीं हुआ है और न ही ही उन्होंने वैक्सीन लगवाई है। संक्रमितों को कौन सा वेरिएंट है, यह तो सिक्वेंसिंग के बाद ही पता लगाया जा सकता है। यह जो नया म्युटेंट आया है, यह काफी संक्रामक है। लोकल लेवल पर यह जिस तरह से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि यह भी ओमिक्रॉन की तरह ही जल्द ही खत्म भी हो जाएगा।

क्या इसमें बच्चे शामिल है, क्योंकि एनसीआर में कई स्कूली बच्चे भी कोरोना की चपेट में आए हैं?

बिल्कुल भी नहीं क्योंकि बच्चों की इम्युनिटी बहुत स्ट्रॉन्ग होती है। साथ ही सरकार ने बच्चों को भी वैक्सीन लगाने का काम शुरू कर दिया है। मगर, जिन बच्चों की इम्युनिटी कमजोर है, उनको यह थोड़ी तकलीफ दे सकता है। इस बार एडल्ट लोगों में भी इस नए वायरस के ज्यादा लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं।

तो क्या कोरोना के इस नए वेरिएंट ने कोई परिवर्तन किया है?

कोरोना ने अपने अंदर जो परिवर्तन किया है, उसे हम लोग रिकॉम्बिनेंट (पुनः संयोजक) बोलते हैं। यह नया वायरस जिस भी बॉडी में रहा होगा, उसमे एबी 1 और एबी 2 वर्जन पहले से रहा होगा। जब वह उस बॉडी को नुकसान नहीं पहुंचा सका होगा, तब इस वेरिएंट ने अपने डीएनए में परिवर्तन किया होगा, जो अब XE वेरिएंट के रूप में हमारे सामने है। यह ओमिक्रॉन का ही एक नया म्युटेंट है, जो धीरे-धीरे माइल्ड होता जाएगा।

रिस्ट्रिक्शन के बाद भी हांगकांग, चीन, साउथ कोरिया जैसे देशों में कोरोना के वेरिएंट की चैन क्यों नहीं टूट रही?

इसकी मुख्य वजह यह है कि उन देश के लोगों ने आज तक कोरोना को सीरियस नहीं लिया। उन्होंने इसे एक आम बीमारी की तरह लिया है। चाहे कितने भी लोग की मौत हुई हो इस पैंडेमिक में, लेकिन भारत इसे बहुत ही अच्छे तरीके से डील किया है। क्या कभी हम लोगों ने सुना है कि चीन या साउथ कोरिया में पहली, दूसरी या तीसरी लहर आई। भारत के लोगों की इम्युनिटी बहुत स्ट्रॉन्ग हो चुकी है, तो अब इससे घबराने की जरूरत नहीं है।

कितना सावधान रहना चाहिए देशवासियों को?

देखिए जिस तरह से मेरा आकलन है, उसे देखते हुए यह वायरस लोगों में ज्यादा संक्रमण फैलाएगा, लेकिन कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा। निचले स्तर पर इससे सावधान रहने की जरूरत है। जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई है, वो तुरंत वैक्सीन लगवाएं। साथ ही यह नया वेरिएंट अपना रूप बदले, इसकी उम्मीद कम है। मगर, यदि यह रूप बदलता है, तो घातक हो सकता है।

क्या आप प्रो. मणींद्र अग्रवाल के आकलन से सहमत है?

देखिए उनकी स्टडी अलग है मेरी अलग, न वो मेरी स्टडी के बारे में कुछ जानते है और न मैं उनकी स्टडी के बारे में जानता हूं। वो सीनियर हैं, उन्होंने अपना आकलन किया है।

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