Wednesday, October 27, 2021
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Insurance Companies के Privatisation पर आई बड़ी खबर, United India Insurance का होगा निजीकरण?


नई दिल्ली: Insurance Privatisation: सरकार United India Insurance का निजीकरण कर सकती है. CNBC-TV18 में छपी खबर के हवाले से ये बताया गया है कि सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसका निजीकरण किया जा सकता है. इस रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि बैंकों के निजीकरण से पहले इंश्योरेंस कंपनियों का निजीकरण किया जा सकता है. 

सरकार ने संसद से पास कराए बिल

आपको बता दें कि संसद ने हाल ही में जनरल इंश्योरेंस बिजनेस नेशनलाइजेशन (संशोधन) (GIBNA) बिल-2021 को पास किया था. इस बिल के बाद सरकार सरकारी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी 51 परसेंट से कम कर सकेगी. 1972 में GIBNA लाया गया था, जो जनरल इंश्योरेंस बिजनेस के विकास को सुरक्षित करके अर्थव्यवस्था की बेहतर जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय बीमा कंपनियों और अन्य मौजूदा बीमा कंपनियों के उपक्रमों के शेयरों के अधिग्रहण और ट्रांसफर करने की इजाजत देता है.

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किसी एक बीमा कंपनी का होना है निजीकरण

आपको बता दें कि 1 फरवरी को बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने 2 सरकारी बैंकों और 1 इंश्योरेंस कंपनी के निजीकरण का ऐलान किया था. पिछले साल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अध्यक्षता में कैबिनेट ने चार जनरल इंश्योरेंस कंपनियों नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी में पूंजी डालने की मंजूरी दी थी. इन्हीं चार कंपनियों में से किसी एक का निजीकरण किया जाना है. 

United India Insurance का नाम आया आगे

सरकार नॉन लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों में अबतक 12500 करोड़ रुपये डाल चुकी है. कैबिनेट ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (NICL) की अधिकृत शेयर पूंजी को बढ़ाकर 7,500 करोड़ रुपये और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (UIICL) और ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (OICL) की अधिकृत शेयर पूंजी को बढ़ाकर 5,000 करोड़ रुपये करने का भी फैसला किया था. अब रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस का नाम सबसे आगे है. चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने विनिवेश और निजीकरण का लक्ष्य 1.75 लाख करोड़ रुपए रखा है. 

जनरल इंश्योरेंस बिजनेस नेशनलाइजेशन (संशोधन) यानी GIBNA के अलावा संसद ने एक और बिल डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) को पेश किया था, जिसे ध्वनि मत से पास करा लिया गया. DICGC अमेंडमेंट बिल के कारण अब बैंक में खाताधारकों का 5 लाख रुपये रुपए तक सुरक्षित है. यानी अगर कोई बैंक डूबता है तो खाताधारकों को 5 लाख रुपये मिल जाएंगे. पहले ये सीमा 1 लाख रुपए थी. ये पैसा खाताधारकों को 90 दिन के भीतर मिल जाएगा.

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